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कंधों पर किताबों का बोझ था, आज जिम्मेदारी उठा ली… नौतनवा के नन्हे हाथों ने नेपाल के लिए दे दिए ₹1 लाख

सोनौली महाराजगंज।उम्र भले ही छोटी हो, लेकिन दिल में अगर इंसानियत और दूसरों के दर्द को समझने का जज़्बा हो तो मदद के लिए हाथ आगे बढ़ाने से कोई नहीं रोक सकता। नौतनवा के सेंट जेवियर्स जूनियर हाई स्कूल के नन्हे विद्यार्थियों…

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कंधों पर किताबों का बोझ था, आज जिम्मेदारी उठा ली… नौतनवा के नन्हे हाथों ने नेपाल के लिए दे दिए ₹1 लाख

सोनौली महाराजगंज।उम्र भले ही छोटी हो, लेकिन दिल में अगर इंसानियत और दूसरों के दर्द को समझने का जज़्बा हो तो मदद के लिए हाथ आगे बढ़ाने से कोई नहीं रोक सकता। नौतनवा के सेंट जेवियर्स जूनियर हाई स्कूल के नन्हे विद्यार्थियों ने कुछ ऐसा ही कर दिखाया है।
नेपाल में आई प्रलयकारी बाढ़ ने जब हजारों परिवारों को मुश्किल में डाल दिया, तब इन बच्चों ने पड़ोसी देश के लोगों के दर्द को अपना दर्द समझा। जिन नन्हे कंधों पर अब तक सिर्फ किताबों और स्कूल बैग का बोझ रहा है, उन्हीं कंधों ने आज इंसानियत की जिम्मेदारी उठाते हुए नेपाल के बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए नेपाली एक लाख रुपये की सहायता राशि प्रदान की।
बच्चे सहायता राशि का चेक लेकर भारत-नेपाल सीमा पार कर रूपंदेही जिले के भैरहवा पहुंचे। वहां उन्होंने रूपंदेही के मुख्य जिला अधिकारी (सीडीओ) विश्व प्रकाश आर्याल को नेपाली ₹1,00,000 का चेक सौंपा, जिसे नेपाल के प्रधानमंत्री आपदा राहत कोष में जमा कराया जाना है।
इस दौरान बच्चों के चेहरे पर मदद करने की खुशी तो थी ही, लेकिन नेपाल में आई आपदा को लेकर चिंता और संवेदना भी साफ दिखाई दे रही थी। यह सिर्फ एक लाख रुपये की मदद नहीं थी, बल्कि उन नन्हे दिलों की ओर से यह संदेश था कि इंसानियत की कोई सीमा नहीं होती।
इन बच्चों ने साबित कर दिया कि मदद करने के लिए उम्र बड़ी नहीं, जज़्बा बड़ा होना चाहिए। जिस उम्र में बच्चे अपनी छोटी-छोटी जरूरतों और इच्छाओं के बारे में सोचते हैं, उस उम्र में इन विद्यार्थियों ने आपदा से जूझ रहे परिवारों की मदद के लिए अपना योगदान देकर समाज के सामने एक बड़ी मिसाल कायम की है।
चेक सौंपने वालों में ऐशनी आनंद दुबे (कक्षा 6), अमृता यादव (कक्षा 5), श्रेया जायसवाल (कक्षा 7), सौम्या जायसवाल (कक्षा 11), फरहान खान (कक्षा 11), अंकुर यादव (कक्षा 10) और शायबा खातून (कक्षा 9) शामिल रहे।
नेपाल में आई बाढ़ ने भले ही सीमाएं लांघकर तबाही मचाई हो, लेकिन नौतनवा के इन बच्चों की संवेदना भी सीमा लांघकर भैरहवा तक पहुंची। नन्हे हाथों से दी गई एक लाख रुपये की यह सहायता राशि शायद आपदा की विशालता के सामने छोटी लगे, लेकिन इसके पीछे छिपी भावना बेहद बड़ी है।
भारत और नेपाल के बीच सदियों पुराने रोटी-बेटी, सामाजिक और मानवीय रिश्तों के बीच इन बच्चों की यह पहल एक बार फिर बता गई कि सीमा जमीनों को बांट सकती है, दिलों को नहीं।
सेंट जेवियर्स के इन विद्यार्थियों ने आज सिर्फ एक लाख रुपये की मदद नहीं की, बल्कि समाज को एक ऐसा सबक दिया है जिसे याद रखा जाएगा—
कंधों पर किताबें उठाने वाली उम्र में जब बच्चे दूसरों का दर्द उठाने लगें, तो समझिए इंसानियत अभी जिंदा है।”

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लेखक

Rashmi Singh

रश्मि सिंह मास कम्युनिकेशन में स्नातकोत्तर हैं और मीडिया एवं पत्रकारिता के क्षेत्र में व्यापक अनुभव रखती हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत ग्राउंड रिपोर्टिंग और कंटेंट लेखन से की तथा समय के साथ देश के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों और समाचार चैनलों में कार्य किया। राजनीति, समसामयिक घटनाक्रम, उत्तर प्रदेश की खबरों, सामाजिक मुद्दों और मनोरंजन जगत की रिपोर्टिंग एवं विश्लेषण में उन्हें विशेष अनुभव प्राप्त है। डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया दोनों क्षेत्रों में काम करते हुए उन्होंने तथ्यपरक, निष्पक्ष और विश्वसनीय पत्रकारिता को अपनी पहचान बनाया है।

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