नई दिल्ली। गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय (GBU) के एक छात्र को प्रदर्शन में शामिल होने के मामले में जारी किए गए नोटिस पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है। बुधवार को मामले का जिक्र सुप्रीम कोर्ट में हुआ तो मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने ग्रेटर नोएडा के कार्यकारी मजिस्ट्रेट की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए पूछा कि आखिर मजिस्ट्रेट ने ऐसा नोटिस जारी करने की हिम्मत कैसे की।
मामला गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के छात्र अक्षत त्रिपाठी से जुड़ा है। उन्हें भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 130 के तहत कथित तौर पर नोटिस जारी किया गया था। हालांकि, विवाद बढ़ने के बाद पुलिस के मुताबिक यह नोटिस वापस ले लिया गया था।
सुप्रीम कोर्ट ने क्यों जताई नाराजगी?
सुप्रीम कोर्ट में जब एक वकील ने छात्र को नोटिस दिए जाने का मुद्दा उठाया, तो CJI सूर्यकांत ने इस पर सख्त टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि अदालत पहले ही छात्र विरोध प्रदर्शनों से संबंधित FIR रद्द कर चुकी है और संबंधित छात्रों के खिलाफ भविष्य में किसी भी तरह की जबरन या दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगा चुकी है।CJI ने सवाल उठाया कि जब अदालत का आदेश स्पष्ट था, तो फिर कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने उसके बावजूद छात्र को नोटिस कैसे जारी कर दिया। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि कोई भी मजिस्ट्रेट सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन नहीं कर सकता।
छात्र से मांगा गया था 5 लाख का निजी मुचलका
जानकारी के मुताबिक, अक्षत त्रिपाठी को जारी नोटिस में उनसे पांच लाख रुपये का निजी मुचलका भरने को कहा गया था। इसके अलावा इतनी ही राशि के दो स्थानीय सक्षम जमानतदार पेश करने की बात कही गई थी।नोटिस में पूछा गया था कि क्यों न छात्र को छह महीने तक शांति बनाए रखने के लिए पाबंद किया जाए। मामले की सुनवाई के लिए 5 सितंबर की तारीख तय की गई थी।
पुलिस ने लगाए थे ये आरोप
यह नोटिस 4 सितंबर को ग्रेटर नोएडा आयुक्तालय के तृतीय कार्यकारी मजिस्ट्रेट कार्यालय की ओर से जारी किया गया था। कार्रवाई पुलिस रिपोर्ट के आधार पर शुरू हुई थी।पुलिस का आरोप था कि अक्षत त्रिपाठी ने विश्वविद्यालय के अन्य छात्रों को दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व वाले प्रदर्शन में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित किया और कथित तौर पर सरकार विरोधी एवं भ्रामक जानकारी प्रसारित की।पुलिस रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया था कि उनकी गतिविधियों से विश्वविद्यालय परिसर में तनाव पैदा होने और सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका थी।
छात्र ने आरोपों से किया इनकार
अक्षत त्रिपाठी ने पुलिस के आरोपों को खारिज किया है। सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो में उन्होंने दावा किया कि उन्होंने प्रदर्शन में शांतिपूर्ण तरीके से हिस्सा लिया था। उनका कहना है कि उस दौरान विश्वविद्यालय की कक्षाएं भी संचालित नहीं हो रही थीं।त्रिपाठी ने यह भी दावा किया कि 20 जुलाई को प्रदर्शनकारियों के संसद की ओर मार्च के दौरान दिल्ली पुलिस की कार्रवाई में वह घायल हुए थे।
पुलिस ने बाद में वापस लिया नोटिस
विवाद सामने आने के बाद इकोटेक-1 थाना पुलिस ने बताया कि छात्र को जारी नोटिस को 4 सितंबर को ही निरस्त कर दिया गया था और संबंधित अधिकारियों को इसकी जानकारी दे दी गई थी।
अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद प्रशासनिक कार्रवाई और अदालत के आदेशों के पालन को लेकर सवाल और गंभीर हो गए हैं। खास तौर पर यह मुद्दा महत्वपूर्ण है कि अदालत के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद छात्र के खिलाफ ऐसी प्रक्रिया क्यों शुरू की गई और भविष्य में इस तरह की कार्रवाई को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे।