श्रीराम की बाल लीलाओं और अहिल्या उद्धार का किया मार्मिक वर्णन

रामनगर, बाराबंकी। श्री राम कथा के चौथे दिन शुक्रवार को कथा व्यास अतुल कृष्ण भारद्वाज महाराज ने भगवान श्रीराम की बाल लीलाओं, नामकरण संस्कार और अहिल्या उद्धार का मार्मिक वर्णन किया। उन्होंने कहा कि बचपन में मिले संस्कार व्यक्ति के व्यक्तित्व और जीवन की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कथा व्यास ने कागभुशुंडि जी के प्रसंग का वर्णन करते हुए भगवान श्रीराम की बाल लीलाओं का भावपूर्ण चित्रण किया। उन्होंने कहा कि हिंदू धर्म में 16 संस्कार बताए गए हैं, जिनमें नामकरण संस्कार का विशेष महत्व है।
नाम व्यक्ति के व्यक्तित्व और जीवन को प्रभावित करता है। उन्होंने संस्कारयुक्त शिक्षा पर जोर देते हुए कहा कि शिक्षा ऐसी होनी चाहिए, जो व्यक्ति को धर्म, त्याग, परोपकार और सदाचार से जोड़े। संस्कारों के अभाव में समाज में बुराइयां बढ़ती हैं। कथा के दौरान विश्वामित्र के साथ श्रीराम-लक्ष्मण के वन गमन, ताड़का, मारीच और सुबाहु वध तथा मिथिला जाते समय अहिल्या उद्धार का प्रसंग सुनाया गया। अहिल्या उद्धार का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि गलतियों से मुक्ति का मार्ग प्रायश्चित और क्षमा याचना है। पाप छिपाने से बढ़ता है, जबकि सच्चे मन से प्रायश्चित करने पर आत्मिक शांति मिलती है।
भगवान श्रीराम के दर्शन मात्र से अहिल्या का उद्धार हो गया। कथा में यजमान रविकांत पांडेय सहित पूर्व कैबिनेट मंत्री अरविंद सिंह गोप, पूर्व विधायक रामगोपाल रावत, एडवोकेट सतीश चंद्र शुक्ला, अविरल सिंह, पवन कुमार ओझा, पप्पू सिंह, प्रभात सिंह, हसमत अली, गुड्डू और प्रभात शुक्ला सहित अन्य श्रद्धालु पहुंचे। सभी ने कथा व्यास से आशीर्वाद प्राप्त किया। लगातार हो रही बारिश के बावजूद बड़ी संख्या में महिला-पुरुष श्रद्धालु पंडाल में मौजूद रहे और श्रीराम कथा का रसपान किया।



