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पशुपालन विभाग आपके द्वार कार्यक्रम से 3.56 लाख से अधिक पशुपालक लाभान्वित

पशुपालन विभाग आपके द्वार कार्यक्रम से 3.56 लाख से अधिक पशुपालक लाभान्वित

  • मोबाइल वेटरनरी यूनिट के माध्यम से 16,311 चिकित्सा शिविर आयोजित 
  • 1.99 लाख पशुओं का निःशुल्क उपचार और 6.22 लाख से अधिक पशुओं का टीकाकरण
  • 17 सितंबर 2026 से अब तक प्रदेशभर में आयोजित किए गए 16,311 पशु चिकित्सा शिविर
  • 6,22,733 पशुओं का संक्रामक रोगों से बचाव के लिए टीकाकरण
  • 785 नर पशुओं का वैज्ञानिक विधि से बधियाकरण

पायनियर समाचार सेवा

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार प्रदेश में पशुपालकों के कल्याण, पशुधन के संरक्षण तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। इसी क्रम में सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत संचालित ‘पशुपालन विभाग आपके द्वार’ कार्यक्रम के माध्यम से प्रदेशभर में पशुओं को सुलभ एवं निःशुल्क चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। मोबाइल वेटरनरी यूनिट (एमवीयू) के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में पशु चिकित्सा, उपचार, टीकाकरण तथा पशुपालकों को विभागीय योजनाओं के प्रति जागरूक करने का कार्य प्रभावी ढंग से किया जा रहा है। इस पहल से अब तक प्रदेश के 3,56,615 पशुपालक प्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित हो चुके हैं।

पशुपालन विभाग से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, 17 सितंबर 2026 से 15 अक्टूबर 2026 तक प्रदेश के दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों में मोबाइल वेटरनरी यूनिट के माध्यम से कुल 16,311 पशु चिकित्सा शिविरों का सफल आयोजन किया गया। इन शिविरों के माध्यम से 1,99,722 पशुओं का त्वरित एवं निःशुल्क उपचार किया गया, जबकि संक्रामक रोगों से पशुधन की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए 6,22,733 पशुओं का टीकाकरण कराया गया। इसके अतिरिक्त, नस्ल सुधार कार्यक्रम को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 785 नर पशुओं का वैज्ञानिक विधि से बधियाकरण किया गया।

पशुपालकों को सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से विभाग द्वारा जागरूकता गतिविधियां भी संचालित की जा रही हैं। इसके अंतर्गत 30,430 पशुपालकों को विभागीय योजनाओं से संबंधित प्रचार सामग्री एवं लीफलेट वितरित किए गए, जिससे उन्हें पशुपालन से जुड़ी योजनाओं, पशुओं की देखभाल तथा उपलब्ध सुविधाओं के संबंध में जानकारी प्राप्त हो सके। पशुपालन ग्रामीण आजीविका का एक महत्वपूर्ण आधार है। इस क्षेत्र से 70 प्रतिशत से अधिक लघु एवं सीमांत किसान तथा भूमिहीन श्रमिक जुड़े हुए हैं। गाय, भैंस, भेड़, बकरी, सूकर एवं मुर्गी सहित विभिन्न पशु-पक्षियों का पालन ग्रामीण परिवारों की आय और आजीविका में महत्वपूर्ण योगदान देता है। 

इनमें बड़ी संख्या में महिलाएं भी पशुपालन गतिविधियों से जुड़ी हैं। ऐसे में पशुओं के उपचार के लिए पशु चिकित्सालयों तक पहुंचने में होने वाली कठिनाइयों को दूर करने के लिए मोबाइल वेटरनरी यूनिट के माध्यम से पशुपालकों के द्वार तक चिकित्सा सुविधाएं पहुंचाई जा रही हैं। इस व्यवस्था से समय पर उपचार उपलब्ध कराने और पशुधन को होने वाली संभावित क्षति को कम करने में सहायता मिल रही है। इस कार्यक्रम को प्रभावी बनाने के लिए मोबाइल वेटरनरी यूनिट के साथ विभागीय पशु चिकित्सकों, पशुधन प्रसार अधिकारियों, पैरावेट, मैत्री एवं पशु सखियों का सहयोग लिया जा रहा है। पशु चिकित्सा शिविरों एवं पशु मेलों के आयोजन में जनप्रतिनिधियों तथा स्थानीय प्रशासन की सहभागिता भी सुनिश्चित की जा रही है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में पशु चिकित्सा सेवाओं की पहुंच और व्यापक हो सके।

प्रदेश सरकार का उद्देश्य 1962 हेल्पलाइन और मोबाइल वेटरनरी यूनिट के माध्यम से अंतिम व्यक्ति तक पहुंचकर अंतिम पशु को भी समय पर सुलभ एवं निःशुल्क चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना है। सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत ‘पशुपालन विभाग आपके द्वार’ कार्यक्रम के माध्यम से पशुपालकों को उपचार, टीकाकरण और विभागीय योजनाओं की जानकारी उपलब्ध कराने का यह अभियान प्रदेशभर में जारी रहेगा।

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