नचिकेताताल के कायाकल्प की तैयारी तेज, ईकोटूरिज्म विकास पर जोर

- झील के चारों ओर बनेगा सुरक्षित पैदल मार्ग और रेलिंग, पर्यटकों को मिलेंगी सुविधाएं
- काणाताल, यमगुफा और खाल बुग्याल को पर्यटन से जोड़ने की पहल
उत्तरकाशी। पौराणिक मान्यताओं, प्राकृतिक सौंदर्य और धार्मिक आस्था का अनूठा संगम नचिकेताताल अब ईकोटूरिज्म के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित होने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। जनपद मुख्यालय से लगभग 29 किलोमीटर दूर चौरंगीखाल कस्बे से तीन किलोमीटर पैदल मार्ग पर स्थित इस प्राकृतिक जलाशय के समग्र कायाकल्प और आसपास के पर्यटन स्थलों के संवर्धन की कार्ययोजना पर तेजी से काम किया जा रहा है। जिलाधिकारी प्रशांत आर्य के निर्देशन में पर्यटन विभाग द्वारा संचालित ईकोटूरिज्म विकास योजना के तहत जहां पर्यटकों की सुविधाएं बढ़ाई जा रही हैं, वहीं क्षेत्र की प्राकृतिक विरासत और पारिस्थितिक संतुलन को सुरक्षित रखने पर भी जोर दिया जा रहा है। समुद्र तल से लगभग 2453 मीटर की ऊंचाई पर स्थित नचिकेताताल चारों ओर फैले बांज, बुरांश, खर्सू, मोरू, रई, मुरेंड और देवदार के सघन वनों के बीच अपनी विशिष्ट पहचान रखता है। लगभग 200 मीटर लंबा, 30 मीटर चौड़ा और सात मीटर गहरा यह प्राकृतिक जलाशय अपने शांत वातावरण, वन संपदा और धार्मिक महत्त्व के कारण पर्यटकों तथा प्रकृति प्रेमियों को आकर्षित करता है। प्राकृतिक स्रोतों से सिंचित इस ताल के प्रति आसपास के ग्रामीणों की गहरी आस्था है। यहां की प्राकृतिक सुंदरता और पौराणिक पहचान इसे धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ प्रकृति आधारित पर्यटन की दृष्टि से भी महत्त्वपूर्ण बनाती है। पौराणिक परंपरा में नचिकेताताल का संबंध कठोपनिषद में वर्णित ऋषि उद्दालक के पुत्र नचिकेता की कथा से जोड़ा जाता है। मान्यता है कि नचिकेता ने मृत्यु के रहस्य और आत्मा के सत्य को जानने के लिए यमराज से प्रश्न किए थे। कठोपनिषद में वर्णित नचिकेता और यमराज का संवाद भारतीय दर्शन की महत्त्वपूर्ण शिक्षाओं में शामिल है। इस संवाद में आत्मा, मृत्यु, अमरत्व और जीवन के परम सत्य से जुड़े गूढ़ प्रश्नों का उल्लेख मिलता है। स्थानीय धार्मिक परंपरा में इसी नचिकेता से ताल का संबंध माना जाता है, जिसके कारण यह स्थल केवल प्राकृतिक जलाशय नहीं, बल्कि आध्यात्मिक जिज्ञासा और प्राचीन ज्ञान परंपरा का प्रतीक भी माना जाता है। हालांकि ताल की स्थानीय उत्पत्ति से जुड़ी मान्यताओं और कठोपनिषद की दार्शनिक कथा के ऐतिहासिक संबंधों को अलग-अलग समझना आवश्यक है।

नचिकेताताल के विकास की योजना को आसपास के अन्य प्राकृतिक और धार्मिक स्थलों से जोड़कर व्यापक स्वरूप देने की तैयारी है। जिलाधिकारी के निर्देश पर संबंधित विभागों को काणाताल, यमगुफा और खाल बुग्याल जैसे कम चर्चित, लेकिन प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर स्थलों की जानकारी पर्यटकों तक पहुंचाने के लिए आवश्यक कदम उठाने को कहा गया है। इसका उद्देश्य केवल नचिकेताताल तक पर्यटकों की आवाजाही बढ़ाना नहीं, बल्कि आसपास के क्षेत्रों को भी पर्यटन गतिविधियों से जोड़ना है। इससे पर्यटकों के ठहराव की अवधि बढ़ने के साथ स्थानीय लोगों के लिए स्वरोजगार, स्थानीय उत्पादों की बिक्री और अन्य आजीविका के अवसर विकसित होने की संभावनाएं भी बढ़ेंगी। पर्यटन विभाग से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025-26 में नचिकेताताल क्षेत्र में 2379 भारतीय और 38 विदेशी पर्यटकों ने भ्रमण किया। इस दौरान 1,22,850 रुपये का राजस्व राजकीय कोष में प्राप्त हुआ। पर्यटकों की यह आवाजाही क्षेत्र में पर्यटन की संभावनाओं को दर्शाती है। विभाग की तीन वर्षीय स्वीकृत ईकोटूरिज्म विकास योजना के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2025-26 में उपलब्ध कराई गई धनराशि से जनोपयोगी और आधारभूत सुविधाओं से जुड़े कई कार्य कराए गए हैं। वर्तमान वित्तीय वर्ष 2026-27 में झील की परिधि के चारों ओर पर्यटकों की सुरक्षा के लिए पैदल मार्ग और मजबूत रेलिंग का निर्माण कराया जा रहा है। इन कार्यों का उद्देश्य ताल तक पहुंचने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों की आवाजाही को अधिक सुरक्षित तथा सुविधाजनक बनाना है। जिलाधिकारी ने निर्माण कार्यों में गुणवत्ता और पारदर्शिता बनाए रखने के साथ निर्धारित समय-सीमा का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। चौरंगीखाल से ताल तक पहुंचने वाले मार्ग और मुख्य परिसर में सुविधाओं का विकास होने से यहां आने वाले लोगों को बेहतर अनुभव मिलने की उम्मीद है। नचिकेताताल का समग्र विकास स्थानीय धार्मिक विरासत को संरक्षित रखते हुए प्रकृति आधारित पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में महत्त्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। इसके लिए आवश्यक होगा कि निर्माण कार्यों के साथ वन संपदा, जल स्रोतों, जैव विविधता और ताल की स्वच्छता का भी विशेष ध्यान रखा जाए। पर्यटन गतिविधियों को पर्यावरण के अनुकूल स्वरूप देने और स्थानीय समुदाय की भागीदारी सुनिश्चित करने से नचिकेताताल उत्तरकाशी के ऐसे विशिष्ट पर्यटन स्थलों में शामिल हो सकता है, जहां पौराणिक आस्था, प्राकृतिक सौंदर्य और स्थानीय आजीविका एक साथ आगे बढ़ें।



