पीलीभीत। बीसलपुर नगर पालिका के बर्खास्त कर्मचारी उपेंद्र शंखधार की आत्महत्या के मामले में प्रशासन और पुलिस ने जांच तेज कर दी है। जिलाधिकारी की ओर से गठित तीन सदस्यीय समिति सुसाइड नोट, दस्तावेजों और लगाए गए आरोपों की बिंदुवार पड़ताल कर रही है, जबकि पुलिस नामजद आरोपियों के खिलाफ दर्ज मुकदमे में साक्ष्य जुटाने में लगी है।
बीसलपुर नगर पालिका के बर्खास्त कर्मचारी उपेंद्र शंखधार की आत्महत्या के मामले में जांच अब निर्णायक चरण की ओर बढ़ रही है। जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह के निर्देश पर गठित तीन सदस्यीय जांच समिति ने मामले से जुड़े सभी पहलुओं की गहन जांच शुरू कर दी है। समिति सुसाइड नोट, विभागीय अभिलेख, बैंक लेनदेन और संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों के पक्षों का परीक्षण कर रही है।अपर जिलाधिकारी (न्यायिक) रोशनी यादव ने बताया कि जांच पूरी निष्पक्षता और पारदर्शिता के साथ की जा रही है। किसी भी स्तर पर दोषी पाए जाने वाले व्यक्ति के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। समिति में मुख्य विकास अधिकारी सतीश प्रसाद मिश्रा, अपर जिलाधिकारी (न्यायिक) रोशनी यादव और एसडीएम न्यायिक बीसलपुर शामिल हैं।
उधर, मृतक के भाई अनुराग शर्मा की तहरीर पर बीसलपुर कोतवाली पुलिस ने ईओ शमशेर सिंह, चेयरमैन प्रतिनिधि अमन जायसवाल उर्फ निक्की, लिपिक मोहम्मद यासीन, अकरम खां और अकाउंटेंट संजीव मिश्रा के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने समेत अन्य गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है।तहरीर में आरोप लगाया गया है कि उपेंद्र शंखधार से नियमों के विपरीत टैक्स वसूली कराई गई, गबन प्रकरण में धनराशि जमा कराने के बावजूद उन्हें राहत नहीं मिली और लगातार मानसिक व आर्थिक दबाव बनाया गया। परिजनों ने नौकरी बचाने के नाम पर धन मांगने, मारपीट और अपमानित करने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए हैं। घटनास्थल से पांच पृष्ठों का कथित सुसाइड नोट मिलने की बात भी सामने आई है, जिसकी जांच की जा रही है।पुलिस का कहना है कि सुसाइड नोट, बैंक लेनदेन, दस्तावेजी साक्ष्य और अन्य तथ्यों के आधार पर विवेचना आगे बढ़ाई जा रही है। वहीं, प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।










