- 100 से ज्यादा लोगों का हैरतअंगेज रेस्क्यू
पायनियर समाचार सेवा
नोएडा। नोएडा के थाना फेस-3 क्षेत्र में बुधवार दोपहर इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग के दौरान स्पार्क होने से अचानक आग लग गई। इस आग ने आसपास खड़े पेट्रोल वाहनों को भी चपेट में ले लिया। मौके पर पहुंची फायर ब्रिगेड की कई गाड़ियों ने आग पर काबू पाया और कॉम्प्लेक्स में फंसे 50 परिवार के लोगों को पुलिस की मदद से रेस्क्यू किया गया। इस आग के धुएं से मूर्छित महिला समेत दो लोगों को अस्पताल में भर्ती करवाया गया, जहां पर डॉक्टर ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
मुख्य दमकल अधिकारी प्रदीप कुमार चौबे ने बताया कि आज दोपहर फायर ब्रिगेड को सूचना मिली कि मामूरा गांव के गली नंबर 2 के जी-4 बिल्डिंग के ग्राउंड फ्लोर में एक इलेक्ट्रिक वाहन बैटरी चार्ज पर लगा था। इसी बीच स्पार्क होने के चलते वाहन में आग लग गई। आग ने आसपास खड़े अन्य वाहनों को भी अपनी चपेट में ले लिया और विकराल रूप ले लिया। उन्होंने बताया कि स्थानीय लोगों और पुलिस ने बचाव कार्य शुरू किया। परिसर के अंदर 50 परिवार रहते थे। जिन्हें रेस्क्यू करके बाहर निकला गया। उन्होंने बताया कि धुएं से एक महिला और पुरुष समेत दो लोगों का स्वास्थ्य बिगड़ गया था, जिन्हें एंबुलेंस द्वारा अस्पताल भिजवाया गया। वहां पर एक महिला और एक पुरुष की मौत हो गई है।
सीएफओ ने बताया कि मृतकों की पहचान स्नेहा श्रीवास्तव (24)पुत्री अश्विनी कुमार निवासी चक्कर चौक साउथ श्याम ठाकुर हाउस नियर सुरेश शर्मा एमएलसी थाना काजी मोहम्मदपुर जिला मुजफ्फरपुर बिहार और ऋषभ कुमार (२७) पुत्र सुजीत कुमार निवासी वार्ड नंबर 5 एपीटीएस रमरामा माइंस बारा सिवली बालाघाट मध्यप्रदेश हैं। उन्होंने बताया कि थाना फेस-3 पुलिस ने बिल्डिंग के मालिक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। कुछ लोगों को इस मामले में हिरासत में लिया गया है। जहां आग लगी है, वह घनी आबादी है। आग लगने के बाद बिल्डिंग से बाहर निकलने का एकमात्र रास्ता धुएं के गुबार से घिर गया, जिससे 100 से ज्यादा जिंदगियां मौत के मुहाने पर खड़ी हो गईं। दमकल विभाग की टीम ने स्थानीय पुलिस और जांबाज नागरिकों की मदद से पड़ोसी इमारतों पर सीढ़ियां लगाकर एक बेहद हैरतअंगेज रेस्क्यू आॅपरेशन चलाया और सभी 100 से अधिक लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दोपहर के वक्त अचानक इमारत के निचले हिस्से (पार्किंग एरिया) से काले धुएं का गुबार और आग की लपटें उठती दिखाई दीं। इससे पहले कि लोग कुछ समझ पाते, आग ने विकराल रूप धारण कर लिया। चूंकि ग्राउंड फ्लोर पर कई दोपहिया वाहन खड़े थे, इसलिए आग की लपटें तेजी से भड़क उठीं। इमारत का मुख्य निकास द्वार भूतल (ग्राउंड फ्लोर) पर ही था, जहां आग का तांडव जारी था। सीढ़ियों के रास्ते जहरीला और घना धुआं तेजी से ऊपरी मंजिलों की ओर फैल गया। चंद ही मिनटों में पूरी पांच मंजिला इमारत काले धुएं के गुबार में तब्दील हो गई। कमरों और बालकनी में खड़े लोग अपनी जान बचाने के लिए चीखने-चिल्लाने लगे। पूरे इलाके में अफरा-तफरी और दहशत का माहौल पैदा हो गया।
जांबाजी की मिसाल: सीढ़ी बनाकर बचाया 100 से ज्यादा लोगों को
घटना की जानकारी मिलते ही दमकल विभाग की आधा दर्जन से अधिक गाड़ियां और स्थानीय थाना फेस-3 की पुलिस टीम मौके पर पहुंची। संकरी गलियों के कारण दमकल की गाड़ियों को घटना स्थल तक पहुंचने में भारी मशक्कत करनी पड़ी। लेकिन स्थिति की गंभीरता को देखते हुए दमकल कर्मियों ने बिना एक पल गंवाए रेस्क्यू आॅपरेशन शुरू किया। दमकल कर्मियों और स्थानीय युवाओं ने सूझबूझ का परिचय देते हुए प्रभावित इमारत के ठीक सामने वाली बिल्डिंग की बालकनी और छत से लोहे तथा बांस की सीढ़ियां जोड़ीं। दो इमारतों के बीच हवा में झूलती इन सीढ़ियों के सहारे बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को बेहद सुरक्षित तरीके से दूसरी इमारत में उतारा गया। इस दिल दहला देने वाले रेस्क्यू आॅपरेशन के दौरान कई दमकल कर्मियों ने खुद की जान जोखिम में डालकर हवा में लटककर रोते-बिलखते बच्चों को अपनी गोद में लिया और सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। इस साहसिक कार्य की हर तरफ सराहना हो रही है।
हादसे में दो की मौत, दो की हालत नाजुक
दमकल विभाग और पुलिस की टीम ने जब आग पर काबू पाते हुए इमारत के अंदर प्रवेश किया, तो वहां का मंजर बेहद खौफनाक था। धुएं की चपेट में आने और दम घुटने के कारण एक 26 वर्षीय युवती और एक युवक अचेत अवस्था में मिले। अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने दोनों को मृत घोषित कर दिया। मृतकों की शिनाख्त के प्रयास किए जा रहे हैं। इसके अलावा, आग की लपटों से घिरे दो अन्य लोग गंभीर रूप से झुलस गए, जिन्हें एम्बुलेंस की मदद से अस्पताल पहुंचाया गया। डॉक्टरों के मुताबिक, दोनों की हालत अत्यंत गंभीर बनी हुई है और वे वेंटिलेटर सपोर्ट पर हैं।
प्रशासनिक अमले में हड़कंप, मौके पर पहुंचे आला अधिकारी
इतने बड़े हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस कमिश्नरेट नोएडा के आला अधिकारी, डीसीपी (सेंट्रल नोएडा), एडिशनल डीसीपी और मुख्य अग्निशमन अधिकारी (सीएफओ) दलबल के साथ मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने खुद खड़े होकर राहत एवं बचाव कार्य की कमान संभाली और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पूरे क्षेत्र की बैरिकेडिंग करवाई। दमकल की करीब 8 गाड़ियों ने करीब तीन घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर पूरी तरह काबू पाया। इसके बाद दमकल कर्मियों ने पूरी बिल्डिंग में सघन सर्च आॅपरेशन चलाया ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई और व्यक्ति अंदर न फंसा हो। इसके साथ ही मलबे को ठंडा करने के लिए ‘कूलिंग आॅपरेशन’ भी चलाया गया।
शॉर्ट सर्किट या लापरवाही? जांच के घेरे में मकान मालिक
शुरूआती जांच में आशंका जताई जा रही है कि ग्राउंड फ्लोर पर खड़ी किसी इलेक्ट्रिक बाइक की बैटरी चार्जिंग के दौरान शॉर्ट सर्किट हुआ, जिससे यह भयावह हादसा हुआ। हालांकि, पुलिस और फॉरेंसिक टीम आग के सटीक कारणों का पता लगाने में जुट गई है। इस हादसे ने एक बार फिर नोएडा के घनी आबादी वाले गांवों में धड़ल्ले से बनी बहुमंजिला इमारतों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। संकरी गलियों में बिना किसी नक्शे, फायर एनओसी और आपातकालीन निकास के बनाई गई इस पांच मंजिला इमारत में सुरक्षा मानकों की धज्जियां उड़ाई गई थीं।
अधिकारियों का बयान
नोएडा डीसीपी ने कहा कि मामूरा की यह घटना बेहद दुखद है। हमने आग के कारणों की विस्तृत जांच के आदेश दे दिए हैं। इस बात की भी गहनता से जांच की जा रही है कि इतनी संकरी गली में बिना सुरक्षा मानकों के पांच मंजिला इमारत कैसे खड़ी की गई और इसमें कितने किराएदार रह रहे थे। मकान मालिक और नियम विरुद्ध निर्माण करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।”
स्थानीय निवासियों में आक्रोश
हादसे के बाद स्थानीय लोगों में जिला प्रशासन और प्राधिकरण के खिलाफ भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि मामूरा, हरौला, चौड़ा और बहलोलपुर जैसे शहरी गांवों में बिना किसी योजना और सुरक्षा मानकों के छह-सात मंजिला इमारतें खड़ी कर दी गई हैं, जहां हजारों प्रवासी मजदूर और छात्र किराए पर रहते हैं। इन इमारतों में न तो आग बुझाने के उपकरण होते हैं और न ही आपातकाल में भागने का रास्ता। स्थानीय निवासियों ने मांग की है कि ऐसे अवैध निमार्णों का तुरंत सर्वे कराया जाए और जिम्मेदार अधिकारियों व भूमाफियाओं पर सख्त कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में ऐसे हादसों को रोका जा सके।










