UPI भुगतान पर शुल्क का रास्ता साफ, लोकसभा से संशोधित टैक्स बिल पास

नई दिल्ली। यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) के माध्यम से होने वाले कुछ डिजिटल भुगतानों पर भविष्य में शुल्क लगाए जाने का रास्ता साफ हो गया है। गुरुवार को लोकसभा ने टैक्स संबंधी संशोधनों वाला विधेयक पारित कर दिया। हालांकि, बिल में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि किस प्रकार के या कितनी राशि से अधिक के यूपीआई लेनदेन पर शुल्क लागू होगा। इस संबंध में अंतिम निर्णय भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) और नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) द्वारा लिया जाएगा।

व्यक्ति से व्यक्ति (P2P) ट्रांजेक्शन पर शुल्क नहीं

सूत्रों के अनुसार, पर्सन-टू-पर्सन (P2P) यानी दो व्यक्तियों के बीच होने वाले यूपीआई लेनदेन पर किसी प्रकार का शुल्क नहीं लगाया जाएगा। शुल्क केवल पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) या मर्चेंट-टू-मर्चेंट (M2M) श्रेणी के लेनदेन पर लागू हो सकता है।

71 प्रतिशत लेनदेन शुल्क से रह सकते हैं मुक्त

वित्त मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में यूपीआई के जरिए 24,161.69 करोड़ लेनदेन हुए, जिनका कुल मूल्य 314 लाख करोड़ रुपये रहा। इनमें लगभग 71 प्रतिशत राशि P2P लेनदेन की थी, जिन पर शुल्क लगाए जाने की संभावना नहीं है। शेष 29 प्रतिशत लेनदेन P2M श्रेणी के रहे।

2,000 रुपये से अधिक के मर्चेंट भुगतान पर लग सकता है शुल्क

सूत्रों के मुताबिक 2,000 रुपये से अधिक के पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) यूपीआई भुगतान पर शुल्क लगाए जाने पर विचार किया जा रहा है। वित्त मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, पिछले वित्त वर्ष में P2M श्रेणी के केवल 4 प्रतिशत लेनदेन ही 2,000 रुपये से अधिक के थे, जबकि 59 प्रतिशत लेनदेन 0 से 500 रुपये के बीच रहे।

शुल्क की दर पर अभी फैसला नहीं

विधेयक में शुल्क की दर का कोई उल्लेख नहीं किया गया है। आरबीआई और एनपीसीआई इस संबंध में अलग से निर्णय लेंगे। वर्तमान में देश में 700 से अधिक बैंक और वित्तीय संस्थान यूपीआई सेवाएं प्रदान कर रहे हैं।

साइबर सुरक्षा और नेटवर्क मजबूती पर होगा खर्च

विशेषज्ञों के अनुसार, बैंकों को यूपीआई सेवा के संचालन पर प्रतिवर्ष लगभग 10,000 करोड़ रुपये खर्च करने पड़ते हैं। यदि शुल्क लागू होता है, तो इससे मिलने वाली आय का उपयोग यूपीआई नेटवर्क को और मजबूत बनाने तथा साइबर सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर करने में किया जा सकेगा।

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