लाखों का उप स्वास्थ्य केंद्र बना सफेद हाथी

- भवन में ताला—कागजों में दौड़ रही स्वास्थ्य व्यवस्था
पायनियर संवाददाता। बांदा
नरैनी तहसील क्षेत्र के ग्राम पचोखर में लाखों रुपये की लागत से बना उप स्वास्थ्य केंद्र स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाली का आईना बन गया है। ग्रामीणों के इलाज के लिए खड़ा किया गया भवन खुद वीरान पड़ा है और उसके मुख्य दरवाजे पर लटका ताला सरकारी दावों की हकीकत बता रहा है। भवन मौजूद है, लेकिन नियमित स्वास्थ्य सेवा नदारद।
गांव के कमल किशोर कहते हैं, “भवन बनाते समय लगा था कि अब गांव में इलाज मिलेगा, लेकिन यहां ताला ही दिखता है।” सुनील ने कहा, “जब इलाज के लिए बाहर ही जाना है तो इस केंद्र का फायदा किसे मिला?”
ग्रामीणों के मुताबिक केंद्र पर नियमित स्वास्थ्यकर्मी उपलब्ध नहीं रहते। नाम न छापने की शर्त पर स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि यहां केवल एक एएनएम तैनात हैं, जो महीने के प्रथम बुधवार को बैठती हैं और बाकी समय अन्य केंद्रों की जिम्मेदारी संभालती हैं।
श्यामबाबू का कहना है, “महीने में एक दिन बैठने से स्वास्थ्य केंद्र नहीं चलता, यह तो सिर्फ खानापूर्ति है।”
विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार जनवरी में लखनऊ से आई टीम तथा मई में दिल्ली से आई टीम ने केंद्र का निरीक्षण किया था। सवाल यह है कि निरीक्षण के बाद भी व्यवस्था जस की तस क्यों है? क्या रिपोर्टें सिर्फ फाइलों में दर्ज होकर रह गईं?
नाम न छापने की शर्त पर एक कर्मचारी ने बताया कि पचोखर से करीब साढ़े सात किलोमीटर की दूरी पर नरैनी, बहेरी और अतर्रा में सीएचसी-पीएचसी मौजूद हैं। कर्मचारी के अनुसार इसी कारण यहां एमबीबीएस डॉक्टर की तैनाती को लेकर भी समस्या बनी हुई है।
उदयनरायन ने तीखा सवाल किया, “अगर डॉक्टर की तैनाती ही नहीं करनी थी तो लाखों रुपये खर्च कर भवन किस योजना और किस जरूरत के आधार पर बनाया गया?”
रमाकांत ने कहा, “सरकारी पैसा खर्च हुआ है, इसलिए केंद्र बंद रहने की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।”
नरायन बोले, “गांव के गरीब मरीजों को छोटी बीमारी के लिए भी बाहर जाना पड़ता है।”
बबलू के मुताबिक भवन की दीवार पर लिखा “उप स्वास्थ्य केंद्र” तक मौसम की मार से मिटता जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि संचालन और रखरखाव के अभाव में सरकारी धन से बनी यह संपत्ति भी धीरे-धीरे जर्जर हो सकती है।
ग्रामीणों ने विभागीय अधिकारियों से केंद्र की वास्तविक स्थिति की जांच कराने, कर्मचारियों की उपलब्धता सुनिश्चित करने और नियमित स्वास्थ्य सेवाएं शुरू कराने की मांग की है।
पचोखर में सवाल सिर्फ एक बंद भवन का नहीं, बल्कि उस सरकारी व्यवस्था का है जिसमें लाखों रुपये खर्च कर स्वास्थ्य केंद्र तो खड़ा कर दिया गया, मगर उसे चलाने की व्यवस्था आज तक खड़ी नहीं हो सकी।



