कवि सम्मेलन खत्म हुआ तो संयोजक बोला नहीं कर सकता भुगतान

-सपा नेता बच्ची सैनी ने एक लाख से अधिक रुपये उधार देकर बचाई पालिका की इज्जत
पायनियर समाचार सेवा, खतौली। नगर पालिका परिसर में आयोजित अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का समापन भले ही देर रात हो गया, लेकिन इसके बाद कवियों के पारिश्रमिक के भुगतान को लेकर आयोजकों के सामने असहज स्थिति खड़ी हो गई। रात करीब तीन बजे कार्यक्रम समाप्त होने के बाद देश के विभिन्न हिस्सों से आए कवियों को पूर्व निर्धारित पारिश्रमिक का भुगतान किया जाना था, लेकिन आयोजन से जुड़े लोगों के पास तत्काल भुगतान के लिए पर्याप्त धनराशि उपलब्ध नहीं थी। इस दौरान नगर पालिका से कार्यक्रम के लिए मिलने वाली करीब 1.30 लाख रुपये की धनराशि प्राप्त नहीं होने की बात सामने आई। आयोजन से जुड़े लोगों के अनुसार, शहर के दानदाताओं से एकत्र की गई धनराशि कार्यक्रम की व्यवस्थाओं में खर्च हो चुकी थी। ऐसे में कवियों के पारिश्रमिक का तत्काल भुगतान करना मुश्किल हो गया। मौके पर मौजूद तीन में से इकलौते संयोजक मास्टर सत्तार ने भी तत्काल भुगतान के लिए धन उपलब्ध नहीं होने की स्थिति से लोगों को अवगत कराया। चूंकि बाहर से आए कवियों को भुगतान प्राप्त करने के बाद अपने-अपने गंतव्य के लिए रवाना होना था, इसलिए मौके पर ही धनराशि की व्यवस्था करना जरूरी हो गया। स्थिति बिगड़ती देख संयोजक मास्टर सत्तार ने नगर पालिका अध्यक्ष हाजी शाहनवाज लालू से फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे बातचीत नहीं हो सकी। इसके बाद कार्यक्रम के उद्घाटनकर्ता एवं सपा के वरिष्ठ नेता श्यामलाल उर्फ बच्ची सैनी से मदद लेने का सुझाव दिया गया। इस पर संयोजक की ओर से उन्हें फोन पर पूरे मामले की जानकारी दी गई। उस समय बच्ची सैनी शाहपुर की ओर जा रहे थे। मामले की जानकारी मिलने के बाद वह रास्ते से वापस खतौली पहुंचे। इसके बाद नगर पालिका में अधिशासी अधिकारी के कक्ष में आयोजन से जुड़े लोगों और कवियों के साथ बातचीत हुई। इस दौरान मास्टर सत्तार ने कवियों के भुगतान को लेकर उत्पन्न स्थिति से उन्हें अवगत कराया। कवियों के भुगतान में तत्काल परेशानी को देखते हुए श्यामलाल उर्फ बच्ची सैनी ने अपनी ओर से एक लाख रुपये से अधिक की नकद धनराशि उपलब्ध कराई। इसके बाद कवियों के पारिश्रमिक के भुगतान का रास्ता साफ हुआ। बताया गया कि मास्टर सत्तार की ओर से यह धनराशि अगले दो-तीन दिनों में वापस करने की बात कही गई है। धनराशि की व्यवस्था होने के बाद कवियों को भुगतान किया गया और वे अपने गंतव्य के लिए रवाना हो सके। हालांकि, कवि सम्मेलन के समापन के बाद भुगतान को लेकर पैदा हुई इस स्थिति ने नगर पालिका की ओर से आयोजित कार्यक्रम की वित्तीय व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बाहर से बुलाए गए कवियों के सामने पारिश्रमिक के भुगतान को लेकर असमंजस की स्थिति बनने से आयोजन की व्यवस्थाओं पर भी चर्चा होती रही। आयोजकों और पालिकाध्यक्ष का पक्ष नहीं मिला। इस संबंध में कार्यक्रम संयोजक मास्टर सत्तार और अमित अहलावत से पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका। नगर पालिका अध्यक्ष हाजी शाहनवाज लालू से भी फोन पर बातचीत नहीं हो पाई। ऐसे में नगर पालिका से कार्यक्रम के लिए स्वीकृत करीब 1.30 लाख रुपये की धनराशि कब और किस प्रक्रिया के तहत उपलब्ध होनी थी, इस संबंध में उनका पक्ष सामने नहीं आ सका।



