इंद्रलोक में चार दिन से पानी का संकट, दो हजार लोगों की जेब पर पड़ रही मार

1500 से 2000 रुपये में टैंकर खरीदने को मजबूर परिवार, ऊपरी मंजिल तक पानी पहुंचाने में 300 रुपये अतिरिक्त खर्च
खाना बनाने, नहाने, कपड़े धोने और शौचालय तक के लिए पानी की किल्लत, एचआरडीए और पेयजल निगम की व्यवस्था पर सवाल
हरिद्वार। हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण (एचआरडीए) की इंद्रलोक आवासीय कॉलोनी में पिछले चार दिन से पेयजल संकट बना हुआ है। समरसेबल खराब होने के बाद करीब 400 से अधिक परिवारों और लगभग दो हजार की आबादी के सामने पानी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। हालात ऐसे हैं कि लोगों को पीने के पानी के साथ खाना बनाने, नहाने, कपड़े धोने और शौचालय के इस्तेमाल तक के लिए पानी जुटाना पड़ रहा है। सरकारी व्यवस्था पर्याप्त नहीं होने पर परिवार 1500 से 2000 रुपये तक खर्च कर निजी टैंकर मंगाने को मजबूर हैं।
इंद्रलोक आवासीय कल्याण समिति के अध्यक्ष नरेश पाल बालियान ने कहा कि चार दिन से बनी स्थिति ने लोगों की मुश्किल बढ़ा दी है। पानी की व्यवस्था के लिए लोगों को अपनी जेब से पैसा खर्च करना पड़ रहा है। कहा कि समस्या केवल पेयजल तक सीमित नहीं है, बल्कि घरों के रोजमर्रा के काम भी प्रभावित हो रहे हैं। समिति के उपाध्यक्ष मनोज शुक्ला ने कहा कि कॉलोनी में प्रतिदिन 40 से 50 तक निजी टैंकर पानी पहुंचा रहे हैं। जल संस्थान की ओर से भी कुछ टैंकर लगाए गए हैं, लेकिन इतनी बड़ी आबादी के लिए यह व्यवस्था नाकाफी है। टैंकर का पानी नीचे तक पहुंचने के बाद ऊपरी मंजिल पर रहने वाले लोगों की परेशानी और बढ़ जाती है। पानी ऊपर चढ़ाने के लिए करीब 300 रुपये अतिरिक्त देकर मशीन लगवानी पड़ रही है। यानी पानी खरीदने के बाद उसे घर तक पहुंचाने का खर्च भी लोगों को ही उठाना पड़ रहा है।
समिति के सचिव अनिल वशिष्ठ और सामुदायिक केंद्र उपसमिति के मुख्तार सिंह ने कहा कि पेयजल निगम को लगातार शिकायतें देने के बावजूद स्थायी समाधान नहीं किया गया। कुछ पानी के टैंकर भेजकर तत्काल व्यवस्था की जा रही है, लेकिन इससे कहीं ज्यादा पानी के टैंकर स्थानीय लोग खुद व्यवस्था कर रहे हैं। लेकिन मूल समस्या जस की तस बनी हुई है। एचआरडीए की आवासीय कॉलोनी में पेयजल जैसी मूलभूत सुविधा के लिए लोगों को निजी स्तर पर हजारों रुपये खर्च करने पड़ना प्राधिकरण की व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करता है।
नीलम सिंह, कामेश्वर सिंह, सीमा सैनी, रणधीर सिंह, डॉ. देवेंद्र धनगर, प्रेम चंद सैनी, मीनू सैनी, ममता शर्मा, सरदार आरती सिंह और जोगिंदर पाल ने कहा कि कॉलोनी में प्रतिदिन करीब पांच लाख लीटर पानी की जरूरत है। विधायक आदेश चौहान के हस्तक्षेप के बाद बृहस्पतिवार शाम अस्थायी बोरवेल कराने के निर्देश दिए गए हैं। इससे करीब ढाई लाख लीटर पानी मिलने की उम्मीद है। ऐसे में प्रस्तावित व्यवस्था भी अनुमानित जरूरत की आधी ही है। लोगों का सवाल है कि बाकी पानी की व्यवस्था कैसे होगी और स्थायी समाधान कब मिलेगा। विधायक आदेश चौहान ने कहा कि लोगों की समस्या को देखते हुए बोरवेल कराया जा रहा है। इसे मुख्य लाइन से जोड़कर घरों तक पानी पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा। इससे समरसेबल खराब होने के कारण पैदा हुए संकट से लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है।
- पानी के लिए हर दिन जेब हो रही ढीली
- आधी जरूरत भी पूरी नहीं करेगा नया बोरवेल





