एम्स ऋषिकेश में पदोन्नति विवाद गहराया, पांच नर्सिंगकर्मियों की भूख हड़ताल दूसरे दिन भी जारी

रजनी गोयल
ऋषिकेश। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), ऋषिकेश में असिस्टेंट नर्सिंग सुपरिटेंडेंट (एएनएस) के 53 पदों पर पदोन्नति को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। पदोन्नति आदेश यथावत रखने की मांग को लेकर नर्सिंग ऑफिसर और सीनियर नर्सिंग ऑफिसर का धरना जारी है। वहीं, पांच नर्सिंगकर्मियों की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल रविवार को दूसरे दिन भी जारी रही। आंदोलन के दौरान एक कर्मचारी के स्वास्थ्य में गिरावट आने की सूचना है। एम्स प्रशासन ने 10 अक्टूबर को पदोन्नति के आदेश जारी किए थे, जिसके बाद कुछ कर्मचारियों ने प्रक्रिया में आरक्षण नियमों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए विरोध शुरू किया। दूसरी ओर, पदोन्नति को नियमानुसार बताते हुए आदेश वापस न लेने की मांग पर कर्मचारी आंदोलन कर रहे हैं।
नर्सिंग प्रोफेशनल डेवलपमेंट एसोसिएशन (एनपीडीए) के अध्यक्ष नरेश चौधरी ने कहा कि पदोन्नति आदेश प्रोविजनल और कंडीशनल हैं। उन्होंने बताया कि संस्थान में कार्यरत 85 असिस्टेंट नर्सिंग सुपरिटेंडेंट में 16 अनुसूचित जाति और आठ अनुसूचित जनजाति वर्ग से हैं। उनके अनुसार, यह अनुपात निर्धारित आरक्षण प्रतिशत से अधिक है। उन्होंने कहा कि पदोन्नति में ‘ओन मेरिट’ के सिद्धांत से संबंधित मामला सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है और इस संबंध में उत्तराखंड उच्च न्यायालय के स्थगन आदेश का भी विषय है। चौधरी ने कहा कि पदोन्नति और आरक्षण से जुड़े मामलों में न्यायालय के आदेशों व लागू नियमों का पालन जरूरी है। उन्होंने मरीजों की देखभाल और नर्सिंग कर्मचारियों की करियर प्रोग्रेशन को भी महत्वपूर्ण बताया।
चौधरी के अनुसार, 53 पदोन्नतियों का असर केवल संबंधित कर्मचारियों तक सीमित नहीं है। उनके पदोन्नत होने से सीनियर नर्सिंग ऑफिसर और नर्सिंग ऑफिसर संवर्ग में पद रिक्त हो सकते हैं, जिन पर आगे पदोन्नति और NORCET के माध्यम से नई भर्ती के अवसर बन सकते हैं। उन्होंने कहा कि पदोन्नति आदेश निरस्त करने से कर्मचारियों के भविष्य और भर्ती प्रक्रिया पर पड़ने वाले प्रभावों पर भी विचार किया जाना चाहिए। आंदोलनरत कर्मचारियों की मांग है कि 10 अक्टूबर को जारी पदोन्नति आदेश वापस न लिया जाए और करियर प्रोग्रेशन से जुड़े निर्णय नियमानुसार किए जाएं। भूख हड़ताल दूसरे दिन भी जारी रहने के बीच कर्मचारियों की निगाहें अब एम्स प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं।



