एग्री स्टार्टअप इकोसिस्टम पर ओरिएंटेशन कार्यशाला आयोजित

पायनियर संवाददाता।बांदा
कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, बांदा के आरम्भ, एग्री-बिजनेस इनोवेशन एवं इन्क्यूबेशन सेंटर द्वारा आईसीएआर-नेशनल एकेडमी ऑफ एग्रीकल्चरल रिसर्च मैनेजमेंट (नार्म), हैदराबाद के प्रौद्योगिकी व्यवसाय इनक्यूबेटर ए-आइडिया के सहयोग से एग्री स्टार्टअप इकोसिस्टम: आइडिया से संपदा सृजन तक विषय पर ओरिएंटेशन कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य विद्यार्थियों को कृषि क्षेत्र में नवाचार, उद्यमिता, स्टार्टअप इकोसिस्टम तथा अपने विचारों को व्यावसायिक उद्यम में परिवर्तित करने के अवसरों से परिचित कराना था।
कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्रीय गीत के साथ हुआ। इसके पश्चात दीप प्रज्ज्वलन किया गया तथा अतिथियों का पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया गया। विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. एस.के. सिंह ने डॉ. रंजीत कुमार, प्रधान वैज्ञानिक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी, ए-आइडिया, नार्म, हैदराबाद का स्वागत किया। वहीं प्रो. ए.के. श्रीवास्तव, आरम्भ के प्रधान अन्वेषक, ने डॉ. के. श्रीनिवास, पूर्व सहायक महानिदेशक एवं पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी, ए-आइडिया का स्वागत किया।
प्रो. ए.के. श्रीवास्तव ने स्वागत उद्बोधन में आरम्भ के उद्देश्यों एवं विश्वविद्यालय में कृषि आधारित नवाचार, उद्यमिता तथा स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए की जा रही गतिविधियों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में स्थापित यह इन्क्यूबेशन सेंटर बुन्देलखण्ड के युवा उद्यमियों के लिए नवाचार केंद्रित स्टार्टअप स्थापित करने में हर स्तर पर सहयोग प्रदान करेगा. इस प्रकार की कार्यशालाओं के माध्यम से विद्यार्थियों को अपने विचारों को पहचानने, विकसित करने तथा उन्हें व्यावसायिक अवसरों में बदलने के लिए आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान किया जा रहा है।
मुख्य वक्ता डॉ. रंजीत कुमार ने कहा कि देश में 60 प्रतिशत से अधिक कृषि आधारित स्टार्टअप ऐसे लोगों द्वारा स्थापित किए गए हैं, जिनकी पृष्ठभूमि कृषि क्षेत्र से नहीं है। उन्होंने कहा कि कृषि विश्वविद्यालयों के विद्यार्थियों में भी उद्यमिता की अपार संभावनाएं हैं। इस प्रकार की कार्यशालाएं विद्यार्थियों को उद्यमी बनने के लिए आवश्यक कौशल एवं दृष्टिकोण विकसित करने में सहायक हैं। उन्होंने बताया कि भारत सरकार द्वारा स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए बड़े स्तर पर निवेश किया जा रहा है, जिससे देश का स्टार्टअप इकोसिस्टम निरंतर मजबूत हो रहा है। उन्होंने कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों में रोजगार सृजन तथा उद्यमिता की संभावनाओं पर भी प्रकाश डाला।
डॉ. के. श्रीनिवास ने विद्यार्थियों को विचार सृजन की प्रक्रिया से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि युवाओं को केवल रोजगार प्राप्त करने की मानसिकता तक सीमित न रहकर उद्यमी दृष्टिकोण विकसित करना चाहिए। उन्होंने समस्या की पहचान से लेकर उसके समाधान के लिए नए विचार के विकास तथा उसे व्यावसायिक अवसर में परिवर्तित करने की प्रक्रिया को विस्तार से समझाया।
विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. एस.के. सिंह ने अपने संबोधन में विश्वविद्यालय में इन्क्यूबेशन सेंटर की स्थापना की प्रेरणा से जुड़ा अपना अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि एक यात्रा के दौरान एक सामान्य घटना से उन्हें विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों के नवाचार एवं उद्यमिता को प्रोत्साहित करने के लिए इन्क्यूबेशन सेंटर स्थापित करने का विचार आया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों में प्रतिभा एवं नए विचारों की कमी नहीं है और आरम्भ उन्हें अपने विचारों को वास्तविक उद्यम में बदलने के लिए आवश्यक मंच एवं मार्गदर्शन उपलब्ध करा रहा है।
कार्यशाला के पहले दिन विद्यार्थियों को स्टार्टअप की अवधारणा, विचार सृजन, नवाचार, उद्यमिता, इन्क्यूबेशन प्रक्रिया तथा कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों में व्यवसाय की संभावनाओं के बारे में जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को अपनी समस्याओं एवं विचारों को अवसर में बदलने तथा कृषि क्षेत्र में नए उद्यम स्थापित करने के लिए प्रेरित किया।
कार्यशाला में विभिन्न महाविद्यालयों के 250 से अधिक स्नातक छात्र-छात्राओं ने प्रतिभाग किया।
उद्घाटन सत्र में प्रो. नरेंद्र सिंह, प्रो. जी.एस. पंवार, प्रो. मुकुल कुमार, प्रो. एस.वी. द्विवेदी, डॉ. वंदना कुमारी, डॉ. शैलेन्द्र कुमार चौरसिया, डॉ. आशीष दीक्षित सहित विश्वविद्यालय के अन्य शिक्षक एवं अधिकारी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के अंत में डॉ. हर्षद माण्डगे ने धन्यवाद ज्ञापित किया। तकनीकी सत्रों का समन्वय डॉ. पुष्पा एवं डॉ. धीरज मिश्रा ने किया। कार्यक्रम का मंच संचालन डॉ. हंसमीत कौर ने किया, जबकि डॉ. योगेश सुमथाने और डॉ. प्रतीक शुक्ला आयोजन संबंधी व्यवस्थाओं में सहयोग प्रदान किया।



