धू-धूकर जला रावण, धर्मनगरी में विजयदशमी पर बुराई पर अच्छाई की जीत

गूंजे जय श्रीराम के जयकारे, रावण के पुतले दहन देखने के लिए उमड़ी भीड़
पंतद्वीप, कनखल, ज्वालापुर समेत कई जगहों पर जले पुतले
शहर और देहात में आतिशबाजी से रोशन हुआ आसमान
गौरव कुमार । हरिद्वार
बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व विजयदशमी मंगलवार को धर्मनगरी में भव्यता के साथ मनाया गया। शहर और ग्रामीण इलाकों में सुबह से ही पर्व का उल्लास छाया रहा। शाम होते ही जगह-जगह रावण, मेघनाद और कुंभकरण के विशाल पुतले दहन किए गए। जैसे ही अग्नि की लपटों में पुतले धराशायी हुए, पूरा माहौल जय श्रीराम के नारों से गूंज उठा।
आतिशबाजी और रंग-बिरंगी रोशनी ने मानो पूरे हरिद्वार को दीपावली जैसा माहौल बन गया। पंतद्वीप मैदान, कनखल, ऋषिकुल, रोड़ीबेलवाला, ज्वालापुर जटवाड़ा पुल, भेल सेक्टर एक और चार समेत दर्जनों स्थानों पर रावण दहन कार्यक्रम आयोजित किए गए। प्रत्येक स्थल पर हजारों की संख्या में श्रद्धालु और स्थानीय लोग पहुंचे। बच्चों और युवाओं में रावण दहन को लेकर खासा उत्साह देखने को मिला। महिलाएं परिवार संग पूरे जोश के साथ कार्यक्रम में शामिल हुईं। कई स्थानों पर रामलीला समितियों द्वारा मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के जीवन प्रसंगों का मंचन किया गया।
भगवान श्रीराम, लक्ष्मण और हनुमान की भूमिका निभा रहे कलाकारों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। मंचन के बाद जैसे ही रामचंद्रजी के बाणों से रावण धराशायी हुआ, पूरा वातावरण धर्म और आस्था की अनुभूति से भर उठा। जैसे ही पुतलों में आग लगाई गई, आतिशबाजी और पटाखों की गूंज से पूरा वातावरण गूंज उठा। आसमान में फैली रंग-बिरंगी रोशनी ने त्योहार को और भव्य बना दिया। बच्चों ने उत्साह में जयकारे लगाए तो बुजुर्गों ने इस परंपरा को संस्कार और संस्कृति से जोड़कर देखा।
त्योहार को देखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए। संवेदनशील स्थानों पर पुलिस बल की अतिरिक्त तैनाती की गई। यातायात व्यवस्था दुरुस्त रखने के लिए जाम से बचाव के उपाय किए गए। पुलिस अधिकारी देर रात तक क्षेत्र में गश्त करते रहे। विजयदशमी का पर्व रावण दहन के साथ ही अपने चरम पर पहुंचा। लोग देर रात तक आतिशबाजी और रोशनी का आनंद लेते रहे। हरिद्वार की गलियों और मोहल्लों में विजयादशमी का उल्लास देर रात तक छाया रहा।




