चौकी में बेल्ट चली तो सवालों में आई खाकी, थर्ड डिग्री के आरोप
युवक की पिटाई के मामले में घेरे में चौकी इंचार्ज, सीओ से शिकायत कर लगाई न्याय की गुहार

रायबरेली। जिस खाकी के कंधों पर कानून की हिफाजत और आम आदमी को सुरक्षा देने की जिम्मेदारी है,उसी खाकी पर चौकी के भीतर युवक की कथित पिटाई का गंभीर आरोप लगा है। जनता की शिकायत सुनने और विवादों का समाधान कराने के लिए बनी पुलिस चौकी में ही युवक की पिटाई का मामला सामने आया है। महराजगंज क्षेत्र की थुलवासा पुलिस चौकी के चौकी इंचार्ज राहुल मिश्रा समेत दो पुलिसकर्मियों पर युवक ने लाठी-डंडे और बेल्ट से पीटने का गंभीर आरोप लगाया है। पीड़ित सोहनलाल पुत्र स्व. रामनरेश ने सीओ महराजगंज को शिकायती पत्र देकर कार्रवाई की मांग की है। पीड़ित के अनुसार वह परिवार के भरण-पोषण के लिए ग्रेटर नोएडा में मजदूरी करता है और वहीं रहता है। उसकी पत्नी मोनी गांव में रहती है। शिकायती पत्र में उसने पत्नी के किसी अन्य व्यक्ति से फोन पर बातचीत और मिलने को लेकर संदेह जताया है। आरोप है कि पत्नी को अपने साथ शहर ले जाने की बात कहने पर उसने इनकार कर दिया। इसी बात को लेकर दोनों के बीच विवाद हुआ। सोहनलाल का आरोप है कि उसने पत्नी का मोबाइल देखने का प्रयास किया तो उसने सिम तोड़ दिया। इसके बाद पत्नी ने थुलवासा चौकी में शिकायत कर दी।
आरोप है कि पुलिस उसे चौकी लेकर पहुंची और वहां समझाने-बुझाने के बजाय उसके साथ मारपीट की गई। पीड़ित का दावा है कि पुलिसकर्मियों ने उसे लाठी-डंडों और बेल्ट से पीटा, जिससे शरीर पर चोटें आर्इं। शिकायती पत्र में पीड़ित ने पत्नी द्वारा मुकदमा लिखाने की धमकी देने का भी आरोप लगाया है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और पत्नी का व पुलिस का पक्ष भी सामने आना बाकी है। थुलवासा चौकी का यह मामला सिर्फ सोहनलाल की शिकायत बनकर न रह जाए, इसके लिए जांच पारदर्शी होना जरूरी है। सवाल यह भी है कि यदि चौकी में मारपीट के आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदारी किसकी तय होगी और पीड़ित को न्याय कब मिलेगा। खाकी की असली परीक्षा अब आरोप लगाने में नहीं, आरोपों की निष्पक्ष जांच और सच सामने लाने में है।
चौकी में पूंछतांछ हुई या मारपीट:मामले के सामने आने के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठ रहे हैं। यदि युवक को पारिवारिक विवाद के सिलसिले में
चौकी लाया गया था, तो उसके साथ कथित मारपीट क्यों हुई, क्या पुलिसकर्मियों ने निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन किया, क्या युवक के आरोपों में लगाए गए बेल्ट और लाठी-डंडे से मारपीट के दावे की जांच होगी, इन सवालों का जवाब जांच के बाद ही सामने आ सकेगा। पुलिस पर लगे आरोपों की फिलहाल स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में आरोपों को सत्य मानना जल्दबाजी होगी। लेकिन किसी पुलिसकर्मी पर चैकी के भीतर मारपीट का आरोप लगना गंभीर विषय जरूर है। शिकायत के आधार पर निष्पक्ष जांच के जरिए यह स्पष्ट होना जरूरी है कि घटना के समय वास्तव में क्या हुआ था और लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है।
अब जांच पर टिकी निगाहें:पीड़ित द्वारा सीओ महराजगंज से शिकायत किए जाने के बाद अब निगाह पुलिस की जांच पर है। सवाल यह भी है कि क्या शिकायत की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित पुलिसकर्मियों की जवाबदेही तय होगी। जनता पुलिस चौकी को अपनी शिकायत लेकर पहुंचने और न्याय की उम्मीद रखने की जगह मानती है। ऐसे में चौकी के भीतर ही पुलिसिया मारपीट के आरोप सामने आना पुलिस और आमजन के बीच भरोसे से जुड़ा मामला भी बन जाता है।
अब देखना होगा कि यह शिकायत महज कागजी कार्रवाई तक सीमित रहती है या जांच के जरिए वास्तविकता सामने लाकर दोषियों पर कार्रवाई की जाती है। फिलहाल पूरे मामले में पुलिस का पक्ष और जांच का आधिकारिक निष्कर्ष सामने आना बाकी है। आरोपों की सच्चाई जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।



