चढ़ावा चोरी केस में 25 पुलिसकर्मी गवाह, जांच से गिरफ्तारी और बरामदगी तक कोर्ट में होगी गवाही

अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के चढ़ावा चोरी मामले में पुलिस की ओर से दाखिल चार्जशीट के बाद अब मुकदमे की सुनवाई के दौरान गवाहों की भूमिका अहम होने वाली है। मामले की जांच में शामिल रहे 25 पुलिसकर्मियों को गवाह बनाया गया है। इनमें 13 कांस्टेबल, 9 उपनिरीक्षक, 2 इंस्पेक्टर और मामले के विवेचक सीओ अयोध्या आशुतोष तिवारी शामिल हैं।
पुलिस की ओर से दाखिल चार्जशीट में CCTV फुटेज, मोबाइल चैट, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, बैंकिंग लेनदेन, बरामदगी और गवाहों के बयानों समेत कई तरह के साक्ष्यों का उल्लेख किया गया है। रिपोर्टों के अनुसार, मामले में आठ आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया गया है।
25 पुलिसकर्मियों की गवाही क्यों अहम?
चार्जशीट में गवाह बनाए गए पुलिसकर्मियों की भूमिका अलग-अलग चरणों से जुड़ी है। इनमें घटना की सूचना मिलने, मौके पर पहुंचने, आरोपियों की पहचान, गिरफ्तारी, पूछताछ, बरामदगी और साक्ष्य जुटाने की कार्रवाई में शामिल पुलिसकर्मी बताए गए हैं।अदालत में इन पुलिसकर्मियों से उनकी कार्रवाई और भूमिका को लेकर सवाल पूछे जा सकते हैं। उन्हें यह बताना पड़ सकता है कि उन्होंने जांच के दौरान क्या देखा, कौन-सा साक्ष्य जुटाया और किस प्रक्रिया के तहत उसे केस का हिस्सा बनाया गया।यानी मुकदमे की सुनवाई के दौरान पुलिस की जांच से जुड़े कई महत्वपूर्ण पहलुओं को इन गवाहों की गवाही के जरिए अदालत के सामने रखा जा सकता है।
CCTV फुटेज समेत कई साक्ष्य जांच का हिस्सा
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच में CCTV फुटेज को महत्वपूर्ण साक्ष्य के तौर पर शामिल किया गया है। पुलिस की चार्जशीट के अनुसार, CCTV फुटेज की जांच में चढ़ावे की रकम हटाने या छिपाने से जुड़ी कई घटनाएं सामने आने का दावा किया गया है। इसके अलावा मोबाइल चैट, CDR, बैंक खातों और बरामदगी से जुड़े दस्तावेजों को भी जांच का हिस्सा बनाया गया है।ऐसे में CCTV फुटेज और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच से जुड़े पुलिसकर्मियों की गवाही भी सुनवाई के दौरान महत्वपूर्ण हो सकती है।
गिरफ्तारी और बरामदगी पर भी होंगे सवाल
मामले में आरोपियों की गिरफ्तारी और उनसे की गई पूछताछ भी विवेचना का अहम हिस्सा रही है। पुलिस ने आरोपियों को रिमांड पर लेकर पूछताछ और बरामदगी की कार्रवाई की थी। चार्जशीट में जांच के दौरान जुटाए गए साक्ष्यों और आरोपियों से जुड़ी कार्रवाई का विवरण शामिल किया गया है।जिन पुलिसकर्मियों ने गिरफ्तारी या बरामदगी की कार्रवाई में हिस्सा लिया, उनसे अदालत में उनकी भूमिका और कार्रवाई की प्रक्रिया को लेकर सवाल-जवाब हो सकते हैं। बचाव पक्ष की ओर से पुलिस की जांच, साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया और गिरफ्तारी-बरामदगी के तरीके पर भी जिरह की जा सकती है।
विवेचक सीओ आशुतोष तिवारी की गवाही भी महत्वपूर्ण
मामले के विवेचक सीओ अयोध्या आशुतोष तिवारी की गवाही भी मुकदमे की सुनवाई में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। उन्होंने ही मामले की विवेचना कर साक्ष्यों को एकत्र किया और आरोपपत्र अदालत में प्रस्तुत किया। रिपोर्टों के अनुसार, 23 सितंबर 2026 को विशेष एंटी करप्शन कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की गई थी।विवेचक से जांच के दौरान जुटाए गए साक्ष्यों, आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों के आधार और चार्जशीट तैयार करने की प्रक्रिया से जुड़े सवाल पूछे जा सकते हैं।
चार्जशीट में कुल 133 गवाहों का उल्लेख
मामले की चार्जशीट में कुल 133 गवाहों का उल्लेख होने की रिपोर्ट है। इनमें पुलिसकर्मियों के अलावा मंदिर व्यवस्था से जुड़े लोग, सुरक्षाकर्मी, बैंक अधिकारी-कर्मचारी और अन्य संबंधित लोग शामिल हैं। पूर्व ट्रस्ट पदाधिकारियों चंपत राय, अनिल मिश्र और गोपाल राव को भी मामले में सरकारी गवाह बनाया गया है। अब अदालत में गवाहों के बयान और बचाव पक्ष की जिरह के दौरान जांच में जुटाए गए साक्ष्यों की कानूनी जांच होगी। इसी प्रक्रिया के दौरान पुलिस की विवेचना, साक्ष्यों की विश्वसनीयता और गिरफ्तारी-बरामदगी से जुड़े विभिन्न पहलू सामने आएंगे।



