ईओ, चेयरमैन प्रतिनिधि समेत पांच के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का मुकदमा दर्ज

बर्खास्त पालिका कर्मी आत्महत्या प्रकरण :

 


पायनियर संवाददाता
पीलीभीत। बीसलपुर नगर पालिका के बर्खास्त कर्मचारी उपेंद्र शंखधार की आत्महत्या के मामले में बीसलपुर पुलिस ने नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी (ईओ), चेयरमैन प्रतिनिधि,दो लिपिक और अकाउंटेंट समेत पांच लोगों के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने समेत अन्य कई गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। मृतक के भाई की तहरीर और घटनास्थल से मिले पांच पेज के सुसाइड नोट के आधार पर पुलिस ने मामले की विवेचना शुरू कर दी है। मामले में रिश्वत, उत्पीड़न, मारपीट और मानसिक प्रताड़ना जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

बीसलपुर कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला दुर्गा प्रसाद निवासी अनुराग शर्मा ने अपने भाई 51 वर्षीय भाई मृतक उपेंद्र शंखधार की आत्महत्या के मामले में कोतवाली पुलिस को तहरीर देकर नगर पालिका परिषद बीसलपुर के ईओ और कर्मचारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। तहरीर में बताया गया है कि उपेंद्र कुमार 17 फरवरी 2004 से नगर पालिका परिषद बीसलपुर में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी थे। सितंबर 2025 में उन्हें गबन के आरोप में निलंबित कर दिया गया। आरोप है कि चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी होने और नगर पालिका अधिनियम के तहत रसीद काटने का अधिकार न होने के बावजूद चेयरमैन प्रतिनिधि अमन जायसवाल उनसे अवैध रूप से टैक्स वसूली और रसीद काटने का कार्य कराते थे। यह भी आरोप लगाया गया कि एक रसीद पूरी होने के बाद दूसरी रसीद देकर वसूली कराई जाती थी।

शिकायतकर्ता के अनुसार मुकदमे के दौरान उपेंद्र पर 23 लाख रुपये की रिकवरी निकाली गई। इसमें 17 लाख रुपये 6 अक्टूबर 2025 और छह लाख रुपये 29 सितंबर 2025 को नगर पालिका के बैंक खाते में जमा कराए गए। इसके बावजूद उन्हें जेल भेज दिया गया।तहरीर में बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा गया है कि जब परिवार ने ईओ शमशेर सिंह और चेयरमैन प्रतिनिधि अमन जायसवाल से बात की तो दोनों ने उपेंद्र को एक गुप्त स्थान पर बुलाया, जहां उसके साथ मारपीट की गई और कथित रूप से उसे जबरन मूत्र पिलाया गया। इस घटना की जानकारी उपेंद्र ने फोन पर अपने परिजनों को दी थी।

परिजनों का आरोप है कि इसके बाद ईओ और चेयरमैन प्रतिनिधि ने नौकरी बचाने और मुकदमे में राहत दिलाने के नाम पर 30 लाख रुपये की मांग की। आरोप है कि ईओ शमशेर सिंह ने कहा था कि यह रकम प्रशासनिक अधिकारियों तक पहुंचानी है। शिकायतकर्ता के मुताबिक उपेंद्र ने पत्नी के गहने बेचकर और अन्य स्रोतों से व्यवस्था कर लगभग 19 लाख रुपये पांच किस्तों में बैंक ऑफ बड़ौदा के दो चेकों के माध्यम से ईओ को उनके आवास पर दिए। बाद में उनसे आठ लाख रुपये और मांगे गए तथा कोर्ट में पक्ष में बयान देने का भरोसा दिया गया।

आरोप है कि जब ईओ ने अदालत में उपेंद्र के पक्ष में बयान नहीं दिया तो उन्होंने अपने चेक वापस मांगे, लेकिन ईओ ने कथित तौर पर गाली-गलौज कर उन्हें भगा दिया। इसके बाद 22 जून 2026 को नगर पालिका परिषद बीसलपुर की ओर से नोटिस जारी कर 15 दिन के भीतर धनराशि जमा न करने पर आरसी जारी करने की चेतावनी दी गई।परिजनों का कहना है कि लगातार मानसिक उत्पीड़न, आर्थिक दबाव और कथित भ्रष्टाचार से परेशान होकर उपेंद्र शंखधार ने सोमवार को आत्महत्या कर ली। घटनास्थल से पांच पृष्ठों का सुसाइड नोट भी मिला है, जिसमें कई गंभीर आरोप दर्ज होने की बात सामने आई है।

बीसलपुर पुलिस ने मृतक के भाई की तहरीर के आधार पर ईओ शमशेर सिंह, लिपिक यासीन मोहम्मद, अकरम खा,अकाउंटेंट संजीव मिश्रा और चेयरमैन प्रतिनिधि अमन जायसवाल उर्फ निक्की के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने समेत अन्य गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि सुसाइड नोट, बैंक लेनदेन और अन्य साक्ष्यों की जांच के बाद आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

अंतिम संस्कार रुका, कार्रवाई के आश्वासन पर माने परिजन

नगर पालिका के दिवंगत कर्मचारी उपेंद्र शंखधार का शव मंगलवार को पोस्टमार्टम के बाद घर पहुंचा तो परिजनों ने अंतिम संस्कार करने से इंकार कर दिया। परिजन आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और अपनी अन्य मांगों को पूरा करने की मांग पर अड़ गए। इससे मौके पर करीब तीन घंटे तक गतिरोध जारी रहा। सूचना पर पूर्व मंत्री रामचरन वर्मा और बीसलपुर भाजपा विधायक विवेक वर्मा मौके पर पहुंचे। दोनों जनप्रतिनिधियों ने शोक व्यक्त कर परिवार को सांत्वना देते हुए हर संभव मदद और निष्पक्ष कार्रवाई का भरोसा दिलाया।

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