बेहता नाले के पानी से 80 हेक्टेयर से अधिक फसलें बर्बाद

धान, दलहन और मिलेट्स की फसलें सड़कर खराब, रबी की बुवाई पर भी संकट, किसानों ने फसल क्षति सर्वे की मांग की
पायनियर समाचार सेवा
लखनऊ। लगातार हो रही बारिश और बेहता नाले के बढ़े जलस्तर से रहीमाबाद फार्म, तिलहन द्वितीय प्रक्षेत्र समेत आसपास के इलाकों में गंभीर जलभराव की स्थिति बनी हुई है। लंबे समय से खेतों में पानी भरा होने के कारण फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है। रहीमाबाद फार्म के तिलहन द्वितीय खंड में करीब 30 हेक्टेयर धान तथा 50 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में बोई गई दलहन और मिलेट्स की फसलें जलमग्न रहने से सड़-गलकर खराब हो गई हैं। बेहता नाले का पानी खेतों में पहुंचने से स्थिति और गंभीर हो गई। प्रभावित लोगों का कहना है कि नाले के पानी के साथ आसपास की फैक्ट्रियों और औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाला गंदा पानी भी खेतों में पहुंच रहा है।
इससे बची हुई फसलों पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है और वे तेजी से खराब हो रही हैं। किसानों ने पानी में संभावित रासायनिक तत्वों की मौजूदगी की आशंका जताते हुए इसकी वैज्ञानिक जांच कराने की मांग की है।वहींखेतों से पानी की निकासी नहीं होने के कारण कृषि कार्य भी प्रभावित हो रहा है। खेत तैयार नहीं हो पाने से गेहूं, चना, मटर, मसूर और सरसों समेत अन्य रबी फसलों की बुवाई में देरी होने की आशंका है। किसानों का कहना है कि यदि जल्द जल निकासी की व्यवस्था नहीं की गई तो खरीफ के साथ रबी की फसल भी प्रभावित हो सकती है।
प्रभावित किसानों ने प्रशासन से तत्काल स्थलीय निरीक्षण कराकर फसल क्षति का सर्वे कराने, बेहता नाले की सफाई, प्रभावी जल निकासी की व्यवस्था तथा खेतों में पहुंच रहे पानी की गुणवत्ता की वैज्ञानिक जांच कराने की मांग की है। किसानों ने कहा कि समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो उन्हें दोहरी फसल क्षति का सामना करना पड़ सकता है।



