पंजाब एंड सिंध बैंक में 4.15 करोड़ और इंडियन बैंक में 19 करोड़ की सीसी लिमिट में कथित फर्जीवाड़े के आरोप, कोर्ट के आदेश पर दोनों मामलों में एफआईआर दर्ज
अदनान खान। पीलीभीत
जिले में दो राष्ट्रीयकृत बैंकों से जुड़े करोड़ों रुपये के कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामलों ने बैंकिंग व्यवस्था की पारदर्शिता और ग्राहकों के भरोसे पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर पंजाब एंड सिंध बैंक की टनकपुर बाईपास रोड शाखा में 4.15 करोड़ रुपये के कथित गबन का मामला सामने आया है, तो दूसरी ओर इंडियन बैंक की गांधी स्टेडियम रोड शाखा में करीब 19 करोड़ रुपये की कैश क्रेडिट (सीसी) लिमिट फर्जी तरीके से स्वीकृत करने और करोड़ों के लेनदेन का आरोप लगा है। दोनों मामलों में न्यायालय के आदेश पर सुनगढ़ी पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच तेज कर दी है।
अमरिया क्षेत्र स्थित उजैफ एग्रोटेक राइस मिल के प्रोपराइटर मोहम्मद जीशान ने आरोप लगाया है कि पंजाब एंड सिंध बैंक के तत्कालीन शाखा प्रबंधक राधे श्याम प्रभाकर और अन्य कर्मचारियों ने अधिक ऋण सीमा और कम ब्याज दर का लालच देकर बैंकिंग दस्तावेज हासिल किए। इसके बाद व्हाट्सएप के माध्यम से चेकों की तस्वीरें मंगाकर 6 मई 2025 से 23 जनवरी 2026 के बीच कथित रूप से करीब 20 चेकों का इस्तेमाल कर खाते से 4.15 करोड़ रुपये निकाल लिए गए। शिकायतकर्ता का दावा है कि कई चेकों पर उनके हस्ताक्षर भी नहीं थे और फर्जी तरीके से धनराशि का गबन किया गया।
इसी शिकायतकर्ता ने इंडियन बैंक के तत्कालीन शाखा प्रबंधक अमित वर्मा समेत अन्य अधिकारियों पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। शिकायत के अनुसार, उनकी जानकारी और सहमति के बिना करीब 19 करोड़ रुपये की सीसी लिमिट स्वीकृत कर दी गई। आरोप है कि पूरी बैंक फाइल में फर्जी हस्ताक्षर किए गए, उनकी पत्नी को बिना जानकारी के गारंटर बना दिया गया और उनके भी कथित फर्जी हस्ताक्षर कर दिए गए। इतना ही नहीं, बिना वैध आवेदन और अनुमति के लगभग 13.61 करोड़ रुपये आरटीजीएस के माध्यम से पंजाब एंड सिंध बैंक भेजे गए तथा बैंक रिकॉर्ड, कंप्यूटर प्रणाली और चेकबुक में हेरफेर कर करोड़ों रुपये के लेनदेन किए गए।
शिकायतकर्ता का यह भी आरोप है कि बाद में अनियमितताओं को ठीक करने का आश्वासन देकर उनसे 27 लाख रुपये ओवरड्यू राशि जमा करा ली गई और वैकल्पिक संपत्ति के दस्तावेज भी ले लिए गए, लेकिन कथित गड़बड़ियों का समाधान नहीं किया गया। दोनों मामलों में सुनगढ़ी पुलिस बैंक रिकॉर्ड, चेक, लेन-देन का ब्यौरा, तकनीकी साक्ष्य और अन्य दस्तावेजों की जांच कर रही है। शिकायतकर्ता और बैंक अधिकारियों के बयान भी दर्ज किए जा रहे हैं। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
इन दोनों मामलों ने जिले में यह बहस छेड़ दी है कि क्या यह सिर्फ बैंकिंग प्रक्रिया की चूक है या फिर करोड़ों रुपये का सुनियोजित खेल फिलहाल इसका जवाब पुलिस विवेचना और साक्ष्यों से ही सामने आएगा, लेकिन एक बात तो तय है कि इन आरोपों ने बैंकिंग व्यवस्था की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
करोड़ों निकलते रहे और राइस मिल मालिक को भनक तक नहीं
करीब 23 करोड़ रुपये से अधिक के कथित लेनदेन और वित्तीय गड़बड़ियों के आरोपों के बीच एक सवाल शिकायतकर्ता राइस मिल मालिक पर भी उठ रहा है। यदि खाते से करोड़ों रुपये निकले, सीसी लिमिट स्वीकृत हुई, आरटीजीएस हुए और बैंकिंग दस्तावेजों का इस्तेमाल होता रहा, तो क्या इसकी भनक खाताधारक को नहीं लगी, या फिर मामला कुछ और है, जिसका सच अभी जांच की परतों में छिपा है। पुलिस की विवेचना अब केवल बैंक अधिकारियों की भूमिका तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे घटनाक्रम की सच्चाई तलाशने पर टिकी है। आखिर करोड़ों के इस खेल के असली किरदार का हीरो कौन है, इसका जवाब जांच पूरी होने के बाद ही पता चल सकेगा।










