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एक निकासी द्वार के भरोसे अप्पू घर, हादसा हुआ तो कैसे बचेंगे लोग

मेला छड़ियान में सुरक्षा मानकों को लेकर उठे सवाल -तंग स्थान में लगाए गए कई झूले और मनोरंजन के साधन पायनियर समाचार सेवा, खतौली। खतौली में चल रहे प्रसिद्ध मेला छड़ियान में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और दर्शकों की भीड़ उमड़ रही…

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एक निकासी द्वार के भरोसे अप्पू घर, हादसा हुआ तो कैसे बचेंगे लोग
मेला छड़ियान में सुरक्षा मानकों को लेकर उठे सवाल
-तंग स्थान में लगाए गए कई झूले और मनोरंजन के साधन
पायनियर समाचार सेवा, खतौली। खतौली में चल रहे प्रसिद्ध मेला छड़ियान में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और दर्शकों की भीड़ उमड़ रही है। मेले में बच्चों और परिवारों के मनोरंजन के लिए लगाए गए अप्पू घर समेत विभिन्न झूलों और मनोरंजन के साधनों को लेकर सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। अप्पू घर जैसे भीड़भाड़ वाले स्थान पर एक ही निकासी द्वार होने से किसी आपात स्थिति में बड़ी परेशानी खड़ी होने की आशंका जताई जा रही है। सवाल यह है कि यदि अचानक आग, तकनीकी खराबी, भगदड़ अथवा अन्य कोई आपात स्थिति उत्पन्न हो गई तो अंदर मौजूद बच्चों और लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने की व्यवस्था क्या होगी?
स्थानीय लोगों का कहना है कि मेले में रात के समय बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं। विशेषकर अप्पू घर में बच्चों के साथ परिवारों की भारी भीड़ रहती है। इसके बावजूद अप्पू घर में प्रवेश और निकासी के लिए एक ही गेट होने की बात सामने आ रही है। ऐसे में आपात स्थिति में एक ही रास्ते से लोगों के बाहर निकलने की कोशिश करने पर भगदड़ और जाम जैसी स्थिति पैदा हो सकती है। बताया जा रहा है कि अप्पू घर के लिए निर्धारित स्थान अपेक्षाकृत सीमित है। इसी स्थान में चार से पांच बड़े-छोटे झूले लगाए गए हैं। इसके अलावा जलपरी समेत अन्य मनोरंजन के साधन भी लगाए गए हैं। इन्हें देखने और इनका आनंद लेने के लिए बड़ी संख्या में बच्चे और बड़े पहुंच रहे हैं। भीड़ बढ़ने के साथ अंदर लोगों के आवागमन के लिए उपलब्ध स्थान भी कम पड़ने की स्थिति बन रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सामान्य दिनों में भी भीड़ के समय एक ही निकासी द्वार पर दबाव बढ़ जाता है। यदि किसी दिन अचानक कोई हादसा हो गया तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। ऐसे में अप्पू घर में अतिरिक्त आपातकालीन निकासी की व्यवस्था होना जरूरी बताया जा रहा है। सिर्फ अप्पू घर ही नहीं, बल्कि मेले में छोटे बच्चों के लिए लगाए गए झूलों के क्षेत्र को लेकर भी सुरक्षा संबंधी सवाल उठ रहे हैं। बताया जा रहा है कि यहां भी भीड़ के मुकाबले निकासी की व्यवस्था सीमित है और एक ही निकासी द्वार है। बच्चों के साथ बड़ी संख्या में अभिभावक यहां पहुंचते हैं। ऐसे में किसी आपात स्थिति में बच्चों को सुरक्षित बाहर निकालना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। लोगों का कहना है कि मनोरंजन स्थलों पर झूलों की संख्या और उनकी क्षमता के साथ-साथ आने वाले दर्शकों की संख्या को ध्यान में रखते हुए प्रवेश और निकासी मार्गों की पर्याप्त व्यवस्था होनी चाहिए। रास्तों पर किसी प्रकार का अवरोध न हो और आपात स्थिति में बचाव दल आसानी से मौके तक पहुंच सके, इसकी भी जांच आवश्यक है। मेला छड़ियान में रोजाना बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं। ऐसे में लोगों का कहना है कि किसी दुर्घटना के बाद कार्रवाई करने के बजाय उससे पहले ही सभी सुरक्षा व्यवस्थाओं की जांच कर ली जानी चाहिए। अप्पू घर और बच्चों के झूलों वाले क्षेत्र में निकासी मार्गों की स्थिति, झूलों की फिटनेस, विद्युत सुरक्षा, अग्निशमन उपकरण तथा भीड़ नियंत्रण की व्यवस्था का स्थलीय निरीक्षण कराया जाना जरूरी है। लोगों का सवाल है कि जब मेले में हजारों की संख्या में लोग एक साथ मौजूद होते हैं और बच्चों की संख्या भी काफी रहती है, तो किसी आपात स्थिति में उन्हें सुरक्षित निकालने के लिए वैकल्पिक रास्ते कितने हैं? यदि एकमात्र निकासी द्वार पर भीड़ जमा हो गई तो बचाव कार्य किस प्रकार किया जाएगा?