आतंकवाद के खिलाफ भारत का नया सुरक्षा मॉडल: सैन्य कार्रवाई से कूटनीतिक दबाव तक

आतंकवाद के खिलाफ भारत की रणनीति पिछले एक दशक में काफी बदली है। जहां पहले आतंकी हमलों के बाद प्रतिक्रिया मुख्यतः कूटनीतिक विरोध और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर दबाव बनाने तक सीमित दिखाई देती थी, वहीं अब सैन्य कार्रवाई भी भारत की रणनीति का अहम हिस्सा बन चुकी है। 2015 से 2025 के बीच हुई चार प्रमुख कार्रवाइयां म्यांमार ऑपरेशन, 2016 की सर्जिकल स्ट्राइक, 2019 की बालाकोट एयर स्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर इस बदलाव की तस्वीर पेश करती हैं।
27 सितंबर 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ के 138वें एपिसोड में 2016 की सर्जिकल स्ट्राइक का जिक्र करते हुए इसे आतंकवाद के खिलाफ भारत की निर्णायक प्रतिक्रिया बताया। 28-29 सितंबर 2016 की रात उरी हमले के बाद LoC के पार आतंकी लॉन्च पैड्स पर की गई कार्रवाई ने यह संकेत दिया कि भारत सीमा पार आतंकवाद के जवाब में अपनी सैन्य क्षमता का इस्तेमाल करने से पीछे नहीं हटेगा।
इससे पहले जून 2015 में मणिपुर के चंदेल में सेना के 18 जवानों की मौत के बाद भारतीय विशेष बलों ने म्यांमार में आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाया था। इसके बाद फरवरी 2019 में पुलवामा हमले में CRPF के 40 जवानों की मौत के जवाब में भारतीय वायुसेना ने बालाकोट में जैश-ए-मोहम्मद के प्रशिक्षण परिसर पर एयर स्ट्राइक की। इस कार्रवाई ने भारत की प्रतिक्रिया को एक और स्तर पर पहुंचाया।
सरकार इस बदलाव को आतंकवादी हिंसा में आई कमी के आंकड़ों से भी जोड़ती है। गृह मंत्री अमित शाह द्वारा संसद में बताए गए आंकड़ों के अनुसार, 2004-14 के दौरान 7,217 आतंकवादी घटनाएं दर्ज हुईं, जबकि 2014-24 में यह संख्या घटकर 2,242 रह गई। इसी अवधि में कुल मौतों में 70 प्रतिशत, नागरिकों की मौत में 81 प्रतिशत और सुरक्षा बलों की मौत में 50 प्रतिशत कमी का दावा किया गया। जम्मू-कश्मीर में भी आतंकवाद से जुड़ी हिंसा और नागरिक मौतों में गिरावट दर्ज होने की बात सरकार ने कही है।
2016 और 2019 की कार्रवाइयां हालांकि राजनीतिक बहस से अलग नहीं रहीं। विपक्षी नेताओं ने दोनों अभियानों के परिणामों और प्रमाणों को लेकर सवाल उठाए, जबकि सरकार ने इन्हें आतंकवाद के खिलाफ जरूरी जवाब बताया। अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले में 26 नागरिकों की मौत के बाद भारत ने 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया। सरकार के अनुसार, शुरुआती कार्रवाई में पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में नौ आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाया गया। बाद में पाकिस्तान की सैन्य प्रतिक्रिया के बाद भारत ने कार्रवाई का दायरा बढ़ाते हुए कई पाकिस्तानी सैन्य प्रतिष्ठानों को भी निशाना बनाया।
ऑपरेशन सिंदूर ने भारत की रणनीति में एक और पहलू जोड़ा। सैन्य कार्रवाई के साथ सिंधु जल संधि को स्थगित रखने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का पक्ष रखने के लिए सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल भेजने जैसे कूटनीतिक कदम भी उठाए गए। 12 मई 2025 को प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत आतंकवाद के जवाब का समय और तरीका खुद तय करेगा, परमाणु धमकी को स्वीकार नहीं करेगा और आतंकवादियों तथा उन्हें समर्थन देने वालों के बीच अंतर नहीं किया जाएगा।
पिछले एक दशक का घटनाक्रम बताता है कि भारत की आतंकवाद-रोधी नीति अब केवल हमले के बाद प्रतिक्रिया तक सीमित नहीं है। सैन्य शक्ति, सटीक हमले की क्षमता, एयर डिफेंस, खुफिया तंत्र, कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय समर्थन को एक व्यापक रणनीति के हिस्से के रूप में इस्तेमाल करने पर जोर है। इसका केंद्रीय संदेश यही है कि सीमा पार आतंकवाद के जवाब में कार्रवाई की सीमा और समय का फैसला भारत अपने रणनीतिक आकलन के आधार पर करेगा।
शिवकुमार राजपूत
वरिष्ठ पत्रकार



