आंखें मूंदकर नहीं बैठ सकते हैं, दिल्ली मेट्रो निर्माण में पेड़ों को नुकसान पर हाईकोर्ट

नई दिल्ली। दिल्ली के करोलबाग में भूमिगत मेट्रो निर्माण के दौरान पेड़ों और
हरित क्षेत्र को नुकसान पहुंचाने पर हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। याचिकाकर्ता अधिवक्ता अर्पित
भार्गव की शिकायत पर सुनवाई करते हुए अदालत ने डीडीए, डीएमआरसी और दिल्ली सरकार को नोटिस
जारी कर जवाब मांगा है। हाईकोर्ट ने कहा कि अधिकारी आंखें बंद करके नहीं बैठ सकते हैं। याचिका में
अवैध पेड़ कटाई और प्रदूषण से पर्यावरण को हो रहे नुकसान पर कार्रवाई की मांग की गई है।
आंखें मूंदकर नहीं बैठ सकते
दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए), दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) और
दिल्ली सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अदालत ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि
अधिकारी इस मामले में आंखें मूंदकर नहीं बैठ सकते हैं। जरूरत के हिसाब से ही चीजों को हटाया जाना
चाहिए।
6 अक्तूबर को सुनवाई
जस्टिस जसमीत सिंह की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए अधिकारियों से जवाब दाखिल करने को
कहा। मामले की अगली सुनवाई 6 अक्तूबर को होगी।
हरित क्षेत्र को नुकसान पहुंचाया जा रहा
याचिकाकर्ता अधिवक्ता अर्पित भार्गव ने याचिका में कहा है कि करोलबाग में देशबंधु गुप्ता रोड पर उनके
घर के पीछे डीडीए की खाली जमीन पर डीएमआरसी की ओर से भूमिगत मेट्रो से जुड़ा निर्माण कार्य चल
रहा है। याचिका के अनुसार, यहां बड़ी संख्या में पुराने और पूरी तरह विकसित पेड़ मौजूद हैं। निर्माण के
दौरान इन पेड़ों और हरित क्षेत्र को नुकसान पहुंचाया जा रहा है।
याचिका में क्या लग रहे आरोप?
याचिका में आरोप लगाया गया है कि निर्माण स्थल पर लोहे और स्टील की रॉड समेत अन्य सामग्री को
मशीनों से काटने और तैयार करने का काम किया जा रहा है। इससे धुआं, धूल और अन्य प्रदूषक निकल
रहे हैं। ये प्रदूषक आसपास मौजूद पुराने पेड़ों की पत्तियों और जमीन पर जमा हो रहे हैं, जिससे पेड़ों को
नुकसान पहुंच रहा है।
शिकायत पर नहीं हुई कार्रवाई
याचिकाकर्ता का दावा है कि भूमिगत निर्माण के लिए बनाई जा रही सीमा के दौरान कई पेड़ों को
नुकसान पहुंचाया गया है। इनमें पुराने और बड़े पीपल के पेड़ भी शामिल हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि
कुछ पेड़ों की अवैध कटाई और उन्हें नुकसान पहुंचाने की शिकायत संबंधित अधिकारियों से की गई,
लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
हरित क्षेत्र पर पड़ रहा प्रतिकूल असर
याचिका में कहा गया है कि निर्माण कार्य के कारण घर के पीछे मौजूद पुराने पेड़ों और हरित क्षेत्र पर
लगातार प्रतिकूल असर पड़ रहा है। यह दिल्ली वृक्ष संरक्षण अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन भी हो
सकता है। याचिकाकर्ता ने अदालत से निर्माण के दौरान पेड़ों को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों को
रोकने और आवश्यक कार्रवाई के निर्देश देने की मांग की है।



