निर्मल उप्रेती
अल्मोड़ा। अल्मोड़ा के ऐतिहासिक नंदादेवी मेला में नंदाष्टमी के अवसर पर मां नंदा-सुनंदा की कदली खामों से निर्मित मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा चंदशाशकों के परिवार द्वारा विधिवत पूजा-अर्चना के बाद नंदाष्टमी शुरू हो गई है। आज नंदाष्टमी के दिन भोर से से श्रद्धांलुओं की भीड़ उमड़ने लगी है लोग नंदा -सुनंदा की पूजा अर्चना करते है और लोगों की मनोकामनाएं पूर्ण होती है। अल्मोड़ा में नंदा देवी मेले का इतिहास करीब चार सौ वर्ष पुराना माना जाता है। उस दौर में नंदा देवी मेला नगर के मल्ला महल में होता था।

वर्तमान नंदा देवी मंदिर परिसर में मेले की शुरूआत वर्ष 1816 से मानी जाती है। बताया जाता है कि तत्कालीन कुमाऊं कमिश्नर कर्नल ट्रेल ने उद्योत चंद्रेश्वर मंदिर में नंदा देवी मेले की शुरूआत कराई थी। सप्तमी को केले के तनों से मां नंदा-सुनंदा की मूर्तियों का निर्माण किया जाता है। देर रात प्राण-प्रतिष्ठा के बाद नंदाष्टमी के ब्रह्म मुहूर्त से मां नंदा-सुनंदा की मूर्तियों की विधिवत पूजा-अर्चना शुरू हो जाती है।नंदाष्टमी के दिन हजारों की संख्या मे श्रद्धांलु आते है और मां की पूजा अर्चना करते है। उत्तराखंड मे नंदादेवी को कुलदेवी के रूप मे पूजी जाती है।