गुरुग्राम। सोमवार को मूसलाधार बरसात में एक बार फिर से गुरुग्राम बरसाती पानी में डूबा नजर आया। इस बरसात में शहर के भीतरी इलाकों में लंबा जाम लग गया। प्रशासन ने बरसात के मद्देनजर 25 अगस्त को वर्क फ्रॉम होम की एडवाइजरी जारी की है।

यह बारिश बहुत से लोगों के लिए आफत बनकर बरसी। बारिश के बाद सबसे खराब हालात सुभाष चौक पर नजर आए। तेज बारिश की वजह से सडक़ों पर कई फुट जलभराव हो गया। जलभराव और जाम के कारण सुभाष चौक पर कई स्कूल बसें बीच सडक़ पर फंसी रहीं। उमस और गर्मी के बीच बसों में बैठे छोटे बच्चे परेशान होते रहे। स्थानीय लोगों और राहगीरों ने कड़ी मशक्कत कर बच्चों को सुरक्षित निकालने में मदद की। अन्य कई स्थानों पर वाहन पानी मेें बंद हो गए और लोग परेशान होते रहे। सोमवार सुबह से लगातार हो रही बारिश के चलते कई क्षेत्रों में जलभराव की स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट पर है।
सुबह 11 बजे से लगातार हो रही भारी बारिश से जनजीवन प्रभावित होने के मद्देनजर डीएम एवं जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अध्यक्ष उत्तम सिंह ने सोमवार को जरूरी एडवाइजरी जारी की। एडवाइजरी में कहा गया है कि मंगलवार 25 अगस्त को नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और आवश्यक सेवाओं पर दबाव कम करने के लिए एहतियातन कई कदम उठाए हैं। सभी कॉरपोरेट एवं निजी कार्यालयों से अपील की गई है कि वे मंगलवार को अपने कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम की सुविधा प्रदान करें। इससे सडक़ों पर यातायात का दबाव कम होगा और कर्मचारियों को भी खराब मौसम के दौरान आवागमन में होने वाली परेशानियों से राहत मिलेगी। उन्होंने बताया कि जिले के सभी विद्यालयों को भी मंगलवार को इस एडवाइजरी के पालन की सलाह दी गई है। इस निर्णय का उद्देश्य विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना तथा अभिभावकों को भी खराब मौसम के बीच बच्चों को विद्यालय भेजने की चिंता से राहत प्रदान करना है।

शहर में भारी बारिश के बीच गुरुग्राम ट्रैफिक पुलिस ने इस बार तकनीक का सहारा लिया। जलभराव और ट्रैफिक जाम से निपटने के लिए पुलिस ने ड्रोन को अपनी तीसरी आंख बनाया और शहर के प्रमुख मार्गों व जलभराव वाले क्षेत्रों की हवाई निगरानी की। पुलिस के अनुसार ड्रोन के माध्यम से जलभराव और यातायात की स्थिति का हवाई निरीक्षण किया गया। इससे उन संवेदनशील स्थानों की तुरंत पहचान हो सकी जहां पानी भरने से ट्रैफिक जाम होने की आशंका थी। ड्रोन से मिली लाइव जानकारी के आधार पर कंट्रोल रूम से ही फील्ड में तैनात पुलिसकर्मियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए, जिससे ट्रैफिक व्यवस्था को प्रभावी तरीके से संभाला जा सका। ट्रैफिक पुलिस के अधिकारियों और कर्मचारियों ने जलभराव वाले स्थानों पर लगातार निगरानी रखते हुए यातायात का संचालन बनाए रखा। जहां-जहां पानी अधिक भरा था, वहां तुरंत बैरिकेडिंग कर वाहनों को वैकल्पिक मार्गों पर डायवर्ट किया गया।