दरिंदगी के घावों पर पुलिस का मरहम: पीड़ित परिवार का सहारा बनी गोरखपुर पुलिस

एक साल का मकान किराया, बच्चियों की पढ़ाई और सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी उठाएगा पुलिस विभाग

पायनियर संवाददाता। गोरखपुर

खाकी को दागदार करने वाला अभिषेक यादव की दरिंदगी का शिकार हुई मासूम बच्ची के परिवार को न्याय दिलाने के साथ-साथ उनके जीवन को दोबारा सामान्य बनाने की दिशा में गोरखपुर पुलिस ने संवेदनशील पहल की है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) डॉ. कौस्तुभ ने पीड़ित परिवार के लिए विशेष सहायता योजना तैयार करते हुए यह संदेश दिया है कि कानून केवल अपराधियों को सजा दिलाने तक सीमित नहीं है, बल्कि पीड़ितों के पुनर्वास और उनके विश्वास को लौटाने की जिम्मेदारी भी निभाता है।एसएसपी डॉ. कौस्तुभ के निर्देश पर पुलिस विभाग पीड़ित परिवार के एक वर्ष तक के मकान का किराया स्वयं वहन करेगा।

इसके लिए मकान मालिक को अग्रिम किराया देने की तैयारी भी शुरू कर दी गई है, ताकि परिवार को आर्थिक और मानसिक परेशानियों का सामना न करना पड़े। इसके साथ ही परिवार की अन्य बच्चियों की शिक्षा का पूरा खर्च भी पुलिस विभाग उठाएगा। स्कूल फीस, किताबें, यूनिफॉर्म, स्टेशनरी और अन्य सभी शैक्षिक आवश्यकताओं की व्यवस्था पुलिस की ओर से की जाएगी। बच्चियों की पढ़ाई किसी भी परिस्थिति में प्रभावित न हो, इसके लिए विशेष निगरानी भी रखी जाएगी।घटना के बाद परिवार और विशेष रूप से बच्चियों पर पड़े मानसिक प्रभाव को देखते हुए पुलिस ने उनके लिए सुरक्षित और सहयोगात्मक माहौल तैयार करने का भी निर्णय लिया है।

बच्चियों को स्कूल लाने और वापस घर छोड़ने की सुरक्षित व्यवस्था पुलिस करेगी, ताकि परिवार किसी प्रकार के भय या असुरक्षा की भावना से मुक्त रह सके। आवश्यकता पड़ने पर उन्हें मनोवैज्ञानिक परामर्श और भावनात्मक सहयोग भी उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे वे धीरे-धीरे इस दर्दनाक हादसे से उबर सकें। एसएसपी डॉ. कौस्तुभ ने कहा कि यह केवल एक प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि मानवीय दायित्व भी है। उन्होंने कहा कि इस घटना ने पूरे समाज को झकझोर दिया है। पीड़ित परिवार का पुलिस पर दोबारा विश्वास कायम करना हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। सुरक्षा, शिक्षा और हर जरूरी सहायता उन्हें लगातार उपलब्ध कराई जाएगी।

गोरखपुर पुलिस की यह पहल केवल राहत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संदेश भी देती है कि किसी भी जघन्य अपराध के बाद पीड़ित परिवार को अकेला नहीं छोड़ा जाएगा। न्यायिक प्रक्रिया अपनी गति से आगे बढ़ेगी, वहीं दूसरी ओर पुलिस परिवार को सम्मानपूर्वक जीवन जीने का संबल देने के लिए हर संभव प्रयास करेगी। संवेदनशीलता और सामाजिक जिम्मेदारी का यह कदम उन परिवारों के लिए उम्मीद की नई किरण बनकर सामने आया है, जो किसी दर्दनाक अपराध के बाद असहाय महसूस करते हैं।

Chief Sub-editor Pioneer Hindi

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