नयी दिल्ली। सार्वजनिक क्षेत्र की तीन पेट्रोलियम विपणन कंपनियों की पेट्रोल और डीजल की बिक्री में जुलाई के दौरान जोरदार उछाल आया। उद्योग के प्रारंभिक आंकड़ों से यह जानकारी मिली। कमजोर मानसून के कारण किसानों और वाहन चालकों की ओर से ईधन की मांग बढ़ने से ऐसा हुआ। इंडियन आॅयल कॉरपोरेशन (आईओसी), भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) की पेट्रोल बिक्री जुलाई में 9.7 प्रतिशत बढ़कर 34.5 लाख टन हो गई, जो एक साल पहले इसी अवधि में 31.4 लाख टन थी।
यह मात्रा जुलाई, 2024 में बेचे गए 29.9 लाख टन से 15.1 प्रतिशत अधिक और 2023 की समान अवधि में दर्ज स्तर से 36.1 प्रतिशत अधिक रही। हालांकि, जून की तुलना में पेट्रोल की बिक्री 34.8 लाख टन से 1.1 प्रतिशत घट गई।
भारत में आर्थिक गतिविधियों के एक प्रमुख संकेतक- डीजल की बिक्री जुलाई में सालाना आधार पर 10.7 प्रतिशत बढ़कर 71.2 लाख टन हो गई, जो एक साल पहले 64.3 लाख टन थी। डीजल भारत में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला र्इंधन है, जो माल ढुलाई, कृषि मशीनरी और सिंचाई को ऊर्जा प्रदान करता है। सामान्य से कम मानसूनी बारिश ने मुख्य बुवाई के मौसम के दौरान सिंचाई की मांग को बढ़ा दिया।
विमान र्इंधन (एटीएफ) की बिक्री जुलाई के दौरान 2.9 प्रतिशत बढ़कर 6,59,900 टन हो गई। यह मात्रा जुलाई, 2024 के 6,41,300 टन की खपत से 2.3 प्रतिशत अधिक और जुलाई, 2023 के 5,66,600 टन से 16.5 प्रतिशत अधिक थी। तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) की बिक्री में गिरावट जारी रही, जो 17.4 प्रतिशत घटकर 23.7 लाख टन रह गई। उद्योग के अधिकारियों ने कहा कि इसका मुख्य कारण यह था कि पश्चिम एशिया संकट के बाद से कुछ मांग पाइप वाली प्राकृतिक गैस (पीएनजी) में स्थानांतरित हो गई है।










