भारत में 60 समुद्री कुओं की खुदाई होगी, प्रत्येक के लिए 650 करोड़ रुपये देगी सरकार

नयी दिल्ली। भारत बजटीय सहायता के जरिये जोखिम भरे अपतटीय तेल और गैस खोज का वित्तपोषण करने वाले दुनिया के पहले बड़े कार्यक्रमों में से एक की शुरुआत करने जा रहा है। सरकार का यह कदम देश के विशाल अप्रयुक्त गहरे जल भंडारों के माध्यम से आयातित कच्चे तेल और गैस पर बढ़ती निर्भरता को कम करने की एक कोशिश है। अधिकारियों ने बताया कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पिछले सप्ताह 84,084 करोड़ रुपये की ‘समुद्र मंथन राष्ट्रीय अपतटीय अन्वेषण योजना’ को मंजूरी दी। इसके तहत सरकार गहरे समुद्र और अत्यधिक गहरे जल में अन्वेषण कुएं की खुदाई की आधी लागत या 650 करोड़ रुपये (जो भी कम हो) का प्रत्यक्ष रूप से वित्तपोषण करेगी।

एक अधिकारी ने कहा कि शायद यह पहली बार है जब दुनिया की कोई सरकार बजट से जोखिम अन्वेषण का वित्तपोषण कर रही है। उन्होंने कहा कि अगले पांच वर्षों में कुल मिलाकर 60 गहरे जल और अत्यधिक गहरे जल वाले अन्वेषण कुओं का वित्तपोषण बजट से किया जाएगा। अन्वेषण कुओं की खुदाई की लागत का एक हिस्सा वहन करने के अलावा, सरकार साझा बुनियादी ढांचे का भी आंशिक वित्तपोषण करेगी। इससे कई परिचालकों को साझा परिसंपत्तियों का उपयोग करके हाइड्रोकार्बन खोज का व्यावसायिक उपयोग करने की अनुमति मिलेगी।

अधिकारियों ने कहा कि निजी कंपनियां जोखिम भरे अन्वेषण से बड़े पैमाने पर बचती रही हैं क्योंकि यदि कोई व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य हाइड्रोकार्बन खोज नहीं होती है तो निवेश को बट्टे खाते में डालना पड़ता है। एक अधिकारी ने कहा कि वे केवल पहले से स्थापित खोज से उत्पादन पर पैसा खर्च कर रहे थे। जोखिम अन्वेषण में शायद ही कोई पैसा गया, जो नए संसाधनों को खोजने के लिए महत्वपूर्ण है। इक्रा लिमिटेड के वरिष्ठ उपाध्यक्ष प्रशांत वशिष्ठ ने कहा कि यह योजना गहरे जल/अत्यधिक गहरे जल वाले कुओं की ड्रिलिंग के लिए सहायता प्रदान करती है, जहां घरेलू अपस्ट्रीम क्षेत्र के पास सीमित अनुभव और इसका दोहन अत्यधिक पूंजी-गहन और जोखिम भरा बना हुआ है।

योजना का 84,084 करोड़ रुपये का परिव्यय अन्वेषण श्रृंखला के सबसे जोखिम भरे हिस्से पर केंद्रित है। इसमें से आधे से अधिक (43,200 करोड़ रुपये) वर्ष 2031 तक पांच वर्षों में विशेष रूप से गहरे समुद्र में खुदाई के लिए दिए किए जाएंगे। यह योजनाबद्ध 60 कुओं में प्रत्येक के लिए लगभग 650 करोड़ रुपये बैठता है।

Chief Sub-editor Pioneer Hindi

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