धनराज पिल्लै ने कहा- नीली जर्सी ही भारतीय हॉकी की पहचान, यह कोई फ्रेंचाइजी लीग नहीं
नई दिल्ली। विश्व कप से पहले भारतीय पुरुष और महिला हॉकी टीम की जर्सी का रंग नीले से बदलकर केसरिया किए जाने पर विवाद गहरा गया है। पूर्व कप्तान परगट सिंह और महान फॉरवर्ड धनराज पिल्लै ने इस फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि भारतीय हॉकी की पहचान दशकों से नीली जर्सी रही है। वहीं हॉकी इंडिया ने सफाई देते हुए कहा कि तकनीकी कारणों और खिलाड़ियों व कोचों के सुझाव के आधार पर यह फैसला लिया गया है।
चार ओलंपिक, विश्व कप और चैंपियंस ट्रॉफी सहित भारत के लिए 339 मैच खेलने वाले धनराज पिल्लै ने कहा कि भारतीय हॉकी की पहचान हमेशा नीली जर्सी रही है। उन्होंने कहा कि केसरिया रंग राष्ट्रीय ध्वज का हिस्सा जरूर है, लेकिन भारतीय हॉकी से उसकी कोई पारंपरिक पहचान नहीं रही। उन्होंने सवाल उठाया कि इतने वर्षों बाद अचानक जर्सी का रंग बदलने की जरूरत क्यों पड़ी।
धनराज ने कहा कि 1928 से लेकर अब तक मेजर ध्यानचंद, बलबीर सिंह सीनियर, मोहम्मद शाहिद, जफर इकबाल और 1980 मॉस्को ओलंपिक की स्वर्ण पदक विजेता टीम सहित सभी महान खिलाड़ी नीली जर्सी में ही खेले हैं। उन्होंने कहा कि वह स्वयं 15 वर्ष तक भारतीय टीम का हिस्सा रहे और इस दौरान केवल नीले रंग की जर्सी पहनी। उन्होंने कहा, यह कोई आईपीएल या हॉकी इंडिया लीग नहीं है, जहां फ्रेंचाइजी अपनी पसंद के रंग चुनती हैं। राष्ट्रीय टीम की पहचान उसकी नीली जर्सी है।
उन्होंने हॉकी इंडिया की उस दलील को भी खारिज किया कि नीली टर्फ पर नीली जर्सी से खिलाड़ियों को परेशानी होती है। उनका कहना था कि वर्षों से नीली टर्फ पर मुकाबले हो रहे हैं, लेकिन ऐसा कोई मुद्दा कभी सामने नहीं आया।
वहीं 1992 और 1996 ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके पूर्व कप्तान परगट सिंह ने कहा कि देश में हर चीज की ‘भगवा ब्रांडिंग’ की जा रही है, जो दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि खेल धर्म, जाति और राजनीति से ऊपर होना चाहिए, लेकिन अब उसमें भी रंगों के जरिए राजनीति की जा रही है।
परगट ने हॉकी इंडिया के इस दावे पर भी सवाल उठाया कि खिलाड़ियों और कोचों की सलाह पर जर्सी बदली गई। उन्होंने कहा कि जर्सी के रंग जैसे फैसलों में खिलाड़ियों या कोचों की भूमिका नहीं होती। उन्होंने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय हॉकी महासंघ (एफआईएच) के पास टीमों की जर्सी के रंग पहले से पंजीकृत रहते हैं और भारतीय हॉकी की पहचान हमेशा नीले रंग से रही है।
उन्होंने कहा कि नीला रंग भारतीय हॉकी की विरासत और पहचान का प्रतीक बन चुका है। नारंगी रंग पहले से नीदरलैंड की टीम से जुड़ा हुआ है, ऐसे में भारतीय टीम का उससे जुड़ाव स्वाभाविक नहीं लगता। परगट ने कहा कि मुख्य जर्सी के रूप में केसरिया रंग को पंजीकृत किए जाने का कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण अब तक नहीं दिया गया है।
भारत की पुरुष और महिला हॉकी टीमें 15 अगस्त से नीदरलैंड और बेल्जियम में शुरू हो रहे विश्व कप में नई केसरिया जर्सी में उतरेंगी, जबकि इस फैसले को लेकर बहस लगातार तेज होती जा रही है।










