ग्रामीणों के हमले में पुलिस कर्मी गम्भीर रुप से घायल

रविवार को भी रूरा – शिवली मार्ग पर जाम लगा कर फलों की दुकानों में तोड़ फोड़ कर 2 घंटे तक इन्हीं ग्रामीणों द्वारा कानून व्यवस्था की उड़ाई गयी थी धज्जियां
कार्यवाही न होने से बढ़े मनोबल के साथ गुरुवार की रात्रि पुलिस बल पर जानलेवा हमले को दिया गया अंजाम

रविकांत दुबे। कानपुर देहात

रूरा थाना क्षेत्र के अमरसिंह पुरवा गांव में लड़ाई झगड़ा की सूचना पर पहुंची डायल 112 की गाड़ी में पहुंचे सिपाही और होमगार्ड के साथ ग्रामीणों ने मारपीट कर दी इससे सिपाही को गंभीर चोट आई है।सूचना पर पहुंची थाना पुलिस ने घटना की छानबीन के बाद आरोपियों के खिलाफ संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज कर मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर 12 घंटे के भीतर जेल भेजा तथा अन्य आरोपियों की तलाश के लिए कई पुलिस टीमों ने छापेमारी शुरू कर दी है।
रूरा थाना क्षेत्र के अमरसिंह पुरवा गांव के रहने वाले भूरा सिंह की पुत्री दुर्गा ने डायल 112 पर पड़ोसियों द्वारा मारपीट करने की सूचना दी थी।

सूचना पर पहुंची डायल 112 की पुलिस ने पीड़ित पक्ष के साथ पहुंच कर घटना की जानकारी करने लगे इतने में एक साथ आए कई ग्रामीणों ने 112 में ड्यूटी में तैनात सिपाही प्रेमराज के साथ मारपीट कर दी इससे वो गंभीर रूप से घायल हो गया।सूचना पर पहुंची थाना पुलिस ने घायल सिपाही को उपचार हेतु मेडिकल कॉलेज भेजा जहां हालात चिंताजनक पाए जाने पर कानपुर के रीजेंसी हॉस्पिटल उसे भेजा गया है।थानाध्यक्ष सुधीर भारद्वाज ने बताया कि मामले में पीड़ित और घायल होमगार्ड की तहरीर पर आरोपी रामदीन उसकी पत्नी और 3 अज्ञात लोगों के खिलाफ गैर जमानती संज्ञेय बी एन एस की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।

वहीं पीड़िता की तहरीर पर आरोपी रामदीन पुत्र प्रीतम निवासी अमर सिंह का पुरवा के खिलाफ पॉक्सो, छेड़खानी की संगीन धाराओं सहित बी एन एस की अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। घायल सिपाही के साथ मारपीट कर उसे गंभीर रूप से घायल करने के मुख्य आरोपी रामदीन को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है, अन्य आरोपियों की तलाश की जा रही है।

अराजकतत्वों के खिलाफ कार्यवाही न किए जाने पर अमर सिंह पुरवा गांव में पुलिस पर हमला

रूरा। गुरुवार की रात्रि को एक बार फिर अमर सिंह का पुरवा गांव के दबंगों और अराजक तत्वों का कारनामा फिर से सामने आया,जब उपद्रवियों की अराजकता का शिकार 112 पुलिस कर्मी हो गया । यहां के दबंगों ने हमला कर पुलिस कर्मी को घायल कर दिया। पुलिस कर्मी को गंभीर अवस्था मे मेडिकल कॉलेज भेजा गया है यहां उसकी हालत और बिगड़ने पर कानपुर के रीजेंसी हॉस्पिटल रेफर किया गया। रविवार को कस्बे के नहर पुल पर रविवार को पुलिस, मीडिया और कई तमाशबीनों की मौजूदगी में मारपीट के आरोप पर नहर पुल में उपद्रवियों ने नहर पुल पर जाम लगा कर जमकर तांडव किया था।

पुलिस ने राजनैतिक दवाब में सपा नेता,उनके भाई और पुत्र के खिलाफ तो मुकदमा दर्ज कर लिया। परंतु दहशत का खुला तांडव करने वाले अराजकतत्वों पर कार्यवाही न करने से पुलिस की भूमिका पर सवाल उठने शुरू हो गए हैं।आपको बताते चलें कि नहर पुल पर ही 7 जुलाई को आम खरीदने को लेकर फल विक्रेता और खरीददार के बीच विवाद हो गया था। दोनों पक्षों की शिकायत पर पुलिस ने एक दूसरे के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। अगले दिन सोशल मीडिया पर महिला के साथ मारपीट का वीडियो वायरल होने के बाद फिर से तनाव फैल गया, सामाजिक और राजनैतिक संगठनों के लोगों द्वारा मामले को तूल देने और विरोध प्रदर्शन करने से पुलिस को फिर से नई धाराओं में मुकदमा दर्ज करना पड़ा। रविवार की रात्रि को फल की दुकान लगाने को लेकर फिर से दो पक्ष आमने सामने हो गए।

एक पक्ष ने सपा नेता आनन्द यादव, उनके भाई रामशंकर यादव, और सपा नेता के पुत्र पर मारपीट का आरोप लगाते हुए रूरा -शिवली मार्ग पर हंगामा फैलाकर जाम लगा दिया, फलों की दुकान पर तोड़फोड़ कर फलों को नहर पर फेंका गया, कई तमाशबीन फलों को उठा कर अपने घरों की ओर जाते दिखाई दिए। सपा नेता के घर पर गाली गलौज के साथ पथराव किया गया। करीब दो घंटे तक नहर पुल पर उपद्रवियों द्वारा तांडव कर खुला नंगा नाच किया गया। कई थानों की फोर्स ने कड़ी मसकत के बाद काबू पाया। उसके बाद थाने पर राज्यमंत्री और उनके समर्थक आ धमके, ए एस पी आलोक प्रसाद की उपस्थिति में प्रदर्शन कर रहे लोगों की मांग पर सपा नेता और उनके भाई और पुत्र के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया।

मौके पर मौजूद पुलिस अधिकारियों ने उपद्रवियों के खिलाफ साक्ष्यों के आधार पर चिह्नित करने के बाद सख्त कार्यवाही का आश्वासन दिया, परंतु घटना के पांच दिन बीतने के बाद भी पुलिस जांच का बहाना बता कर अराजकतत्वों के खिलाफ कार्यवाही पर चुप बैठी है। पुलिस की कार्यप्रणाली और चुप्पी से प्रदेश की योगी सरकार द्वारा अपराध और अपराधियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर सवाल उठने शुरू हो गए हैं।

गुरुवार की रात्रि को बढ़े मनोबल के साथ ग्रामीणों ने पुलिस बल पर हमला कर आरक्षी और होमगार्ड को गंभीर रूप से घायल कर दिया, पुलिस द्वारा तमाम मोबाइल से सूट किए गए रविवार की उपद्रवी घटना के प्रामाणिक वीडियो साक्ष्य होने के बाद भी उपद्रवियों के खिलाफ अगर समय रहते मुकदमा दर्ज कर प्रभावी कार्रवाई की जाती तो गुरुवार को पुलिस बल के साथ हुई अप्रिय घटना से बचा जा सकता था। अगर पुलिस अब भी मामले में चूक करती है तो भविष्य में यही उपद्रवी तत्व पुलिस के लिए भारी समस्याओं और परेशानियों का सबब बन सकते हैं।

Chief Sub-editor Pioneer Hindi

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