- पीएम नरेंद्र मोदी ने दी शुभकामनाएं, कहा- प्रवासी भारतीय भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच जीवंत सेतु
डरबन/दक्षिण अफ्रीका। चिन्मय मिशन की 75वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में दक्षिण अफ्रीका के डरबन स्थित चैट्सवर्थ स्टेडियम में भव्य आध्यात्मिक आयोजन किया गया। मैन टू हनुमान कार्यक्रम के तहत आयोजित इस ऐतिहासिक आयोजन में 17,000 से अधिक श्रद्धालुओं ने एक साथ 27 बार हनुमान चालीसा का पाठ किया। इस तरह कुल 4 लाख से अधिक सामूहिक पाठ पूरे हुए, जो भारत के बाहर सनातन परंपरा के सबसे बड़े आयोजनों में गिना जा रहा है।
स्टेडियम केसरिया रंग, भक्ति और एकता के अद्भुत संगम में बदल गया। यह आयोजन केवल धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सांस्कृतिक गौरव, सेवा और सामूहिक आध्यात्मिक चेतना का विराट उत्सव बन गया। हजारों भक्तों ने एक साथ खड़े होकर जब हनुमान चालीसा का पाठ किया, तो पूरा वातावरण भक्ति में सराबोर हो गया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस अवसर पर शुभकामना संदेश भेजते हुए कहा कि दक्षिण अफ्रीका में भारतीय समुदाय की आध्यात्मिक यात्रा में यह आयोजन एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। उन्होंने कहा कि चंट डरबन, शांत डरबन थीम सामूहिक भक्ति के माध्यम से सद्भाव बढ़ाने का प्रतीक है।उन्होंने प्रवासी भारतीयों की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच एक जीवंत सेतु का काम किया है और दोनों देशों के सांस्कृतिक व सामाजिक संबंधों को मजबूत किया है।
कार्यक्रम में शामिल होने के लिए क्वाज़ुलु-नताल और आसपास के क्षेत्रों से हजारों श्रद्धालु 80 से अधिक बसों के जरिए पहुंचे। इसके अलावा बड़ी संख्या में लोग स्वयं भी कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे। कई भक्तों ने इसे जीवन में एक बार मिलने वाला अद्वितीय आध्यात्मिक अनुभव बताया।
पद्मश्री अनूप जलोटा और सिंगर-एक्टर अनुजा सहाय के नेतृत्व में सामूहिक मंत्रोच्चार ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। अनूप जलोटा के भावपूर्ण गायन पर बार-बार तालियां गूंजीं, जबकि अनुजा सहाय की मधुर प्रस्तुति ने भक्ति को और ऊंचाई दी।
अपने संबोधन में अनूप जलोटा ने चिन्मय मिशन की 75 वर्षों की वैश्विक आध्यात्मिक सेवा को श्रद्धांजलि दी और स्वामी अभेदानंद सरस्वती के योगदान की सराहना की। उन्होंने बताया कि स्वामी अभेदानंद 2026 में दक्षिण अफ्रीका में अपनी 20 वर्ष की सेवा पूरी कर रहे हैं और उन्होंने वहां भारतीय संस्कृति के पुनर्जागरण में अहम भूमिका निभाई है।
स्वामी अभेदानंद सरस्वती के संबोधन ने कार्यक्रम को भावनात्मक चरम पर पहुंचा दिया। उन्होंने श्रद्धालुओं से अपनी आध्यात्मिक पहचान पर गर्व करने और सेवा व सद्भाव के मार्ग पर चलने का आह्वान किया। उनके आह्वान पर पूरा स्टेडियम तीन बार मैं एक गर्वित हिंदू हूं के उद्घोष से गूंज उठा।अंतिम चरण में हजारों श्रद्धालु भगवान हनुमान की तस्वीर और केसरिया झंडे लहराते नजर आए। यह दृश्य भक्ति, एकता और सांस्कृतिक चेतना का अद्भुत उदाहरण बन गया।
कार्यक्रम में क्वाज़ुलु-नताल के प्रीमियर थामी न्तुली भी शामिल हुए। उन्होंने चिन्मय मिशन के योगदान की सराहना की और आयोजन में सक्रिय भागीदारी निभाई।करीब 200 स्वयंसेवकों ने कार्यक्रम की व्यवस्था संभाली, जबकि 100 से अधिक स्वयंसेवकों ने 20,000 लोगों के लिए भोजन तैयार कर महाप्रसाद वितरित किया। सभी श्रद्धालुओं को विशेष गिफ्ट पैक भी दिए गए, जिनमें धार्मिक पुस्तकें, प्रसाद और अन्य सामग्री शामिल थी।










