18 नहीं, 23 साल में हो बेटियों की शादी, शामली में होटलों की जांच की मांग

-मुख्यमंत्री के नाम एडीएम को सौंपा ज्ञापन, कम उम्र में विवाह से पढ़ाई और भविष्य प्रभावित होने का दिया हवाला
कैराना। लड़कियों की विवाह की न्यूनतम आयु 18 वर्ष से बढ़ाकर 23 वर्ष करने की मांग उठाई गई है। इस संबंध में राष्ट्रीय परशुराम परिषद के मंडल अध्यक्ष सुमित शर्मा सहित अन्य लोगों ने शनिवार को मुख्यमंत्री के नाम अपर जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में कम उम्र में विवाह के फैसलों से युवाओं की पढ़ाई और भविष्य पर पड़ने वाले प्रभाव का हवाला देते हुए विवाह की आयु बढ़ाने की मांग की गई। इसके साथ ही जिले में कथित रूप से अनैतिक गतिविधियों में संलिप्त होटलों की जांच कर कार्रवाई करने की मांग भी की गई।
ज्ञापन में कहा गया कि 18 वर्ष की उम्र में कई युवा जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण फैसले लेने के लिए पूरी तरह परिपक्व नहीं होते। ऐसे में कुछ युवक-युवतियां परिवार की सहमति के बिना अपनी पसंद से विवाह कर लेते हैं, जिससे उनकी पढ़ाई और भविष्य प्रभावित होने की आशंका रहती है। ज्ञापन देने वालों का कहना है कि माता-पिता बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए मेहनत करते हैं, लेकिन कम उम्र में विवाह के फैसलों से परिवार की चिंताएं बढ़ जाती हैं। इसी को देखते हुए लड़कियों की विवाह की न्यूनतम आयु बढ़ाकर 23 वर्ष करने की मांग की गई। ज्ञापन में शामली जिले के कुछ होटलों में कथित रूप से अनैतिक गतिविधियां संचालित होने का आरोप लगाते हुए प्रशासन से जांच कराने की मांग की गई। ज्ञापनकर्ताओं का कहना है कि होटलों में नियमों के विपरीत गतिविधियां होने की शिकायतों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। उन्होंने संबंधित होटलों की जांच कर अनियमितताएं पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की। ज्ञापन के माध्यम से मुख्यमंत्री से दोनों मामलों में आवश्यक कदम उठाने की अपील की गई। वहीं, महिलाओं के विवाह की न्यूनतम कानूनी आयु फिलहाल 18 वर्ष है और इसे बढ़ाने के लिए कानून में बदलाव आवश्यक होगा। इस दौरान दीपक चौहान, राकेश प्रधान, गुलफाम मीर, महबूब, चाँद सिंह व विकास कुमार आदि मौजूद रहे।



