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इशान किशन की कप्तानी में पूर्व क्षेत्र ने 13 साल बाद जीती दलीप ट्रॉफी

चेन्नई। पूर्व क्षेत्र ने 13 साल के लंबे इंतजार के बाद दलीप ट्रॉफी का खिताब अपने नाम कर लिया। इशान किशन की कप्तानी वाली पूर्व क्षेत्र की टीम ने दक्षिण क्षेत्र के खिलाफ फाइनल मुकाबले में पहली पारी में मिली विशाल बढ़त…

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इशान किशन की कप्तानी में पूर्व क्षेत्र ने 13 साल बाद जीती दलीप ट्रॉफी
तमिलनाडु में दिलीप ट्रॉफी 2026-27 जीतने के बाद ईस्ट ज़ोन टीम के सदस्य ट्रॉफी के साथ पोज़ देते हुए। ईस्ट ज़ोन ने पिछले 12 सेशन में अपना दबदबा बनाए रखा और 13 साल बाद दिलीप ट्रॉफी जीती। उन्होंने फ़ाइनल के पांचवें और आखिरी दिन साउथ ज़ोन को पहली पारी में मिली भारी बढ़त के दम पर हराया।

चेन्नई। पूर्व क्षेत्र ने 13 साल के लंबे इंतजार के बाद दलीप ट्रॉफी का खिताब अपने नाम कर लिया। इशान किशन की कप्तानी वाली पूर्व क्षेत्र की टीम ने दक्षिण क्षेत्र के खिलाफ फाइनल मुकाबले में पहली पारी में मिली विशाल बढ़त के आधार पर खिताबी जीत हासिल की। मुकाबला ड्रॉ रहा, लेकिन पहली पारी में 372 रन की बढ़त के कारण पूर्व क्षेत्र को विजेता घोषित किया गया।

फाइनल में पूर्व क्षेत्र ने पहली पारी में 708 रन का विशाल स्कोर खड़ा कर दक्षिण क्षेत्र पर पूरी तरह दबाव बना दिया था। दक्षिण क्षेत्र की टीम पहली पारी में इस स्कोर के करीब भी नहीं पहुंच सकी और पूर्व क्षेत्र को 372 रन की निर्णायक बढ़त मिल गई।मैच के अंतिम दिन पूर्व क्षेत्र ने दूसरी पारी में सात विकेट पर 388 रन बनाए और उसकी कुल बढ़त 760 रन तक पहुंच गई। इसके बाद दोनों टीमों के खिलाड़ियों ने हाथ मिलाए और मुकाबले को ड्रॉ घोषित कर दिया गया।

पूर्व क्षेत्र की दूसरी पारी में मोहम्मद कोनेन कुरैशी ने शानदार नाबाद शतक जड़ा। अपने महज दूसरे प्रथम श्रेणी मैच में खेल रहे कुरैशी ने नाबाद 116 रन बनाते हुए अपने करियर का पहला शतक लगाया। उन्होंने अनुकूल रॉय के साथ सातवें विकेट के लिए 150 रन की अहम साझेदारी की। अनुकूल ने 64 रन का योगदान दिया।

कप्तान इशान किशन ने भी पूरे टूर्नामेंट में शानदार नेतृत्व किया। फाइनल की पहली पारी में उनके 270 रन ने पूर्व क्षेत्र की जीत की नींव रखी। किशन की कप्तानी में टीम ने विशाल स्कोर बनाने के बाद दक्षिण क्षेत्र के सभी विकेट लेकर पहली पारी की बढ़त सुनिश्चित करने की रणनीति पर काम किया।

मैच के बाद किशन ने कहा कि टीम का पूरा ध्यान पहली पारी में बढ़त हासिल करने पर था। उन्होंने कहा कि परिस्थितियों को समझते हुए टीम ने अपनी रणनीति बनाई और जब पहली पारी में पर्याप्त बढ़त मिल गई तो खिताब लगभग तय हो गया।पूर्व क्षेत्र की सफलता में कई खिलाड़ियों ने अहम भूमिका निभाई। कुमार कुशाग्र ने अपना छठा प्रथम श्रेणी शतक लगाया, जबकि शिखर मोहन ने संयम और तकनीक से भरी अर्धशतकीय पारी खेली। अनुभवी तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी ने भी अपने 100वें प्रथम श्रेणी मैच में प्रभावशाली प्रदर्शन किया।

दूसरी ओर दक्षिण क्षेत्र की टीम का प्रदर्शन उम्मीदों के अनुरूप नहीं रहा। टीम के गेंदबाज पूर्व क्षेत्र के बल्लेबाजों पर दबाव बनाने में नाकाम रहे। बल्लेबाजी में भी टीम कमजोर साबित हुई। दक्षिण क्षेत्र के टीम चयन पर भी सवाल उठे, क्योंकि करुण नायर, मयंक अग्रवाल और साई किशोर जैसे अनुभवी और फॉर्म में चल रहे खिलाड़ियों को टीम में शामिल नहीं किया गया था।पूर्व क्षेत्र ने फाइनल में शुरू से अंत तक अपना दबदबा बनाए रखा और पहली पारी की विशाल बढ़त के दम पर 13 साल बाद एक बार फिर दलीप ट्रॉफी पर कब्जा कर लिया।