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कुंतरीलगा फाली, सैंती और धुर्मा में 17-18 सितंबर 2025 की रात मची थी तबाही
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पहली बरसी पर फिर छलका प्रभावित परिवारों का दर्द
पायनियर समाचार सेवा। देहरादून। एक साल का वक्त गुजर गया, लेकिन नंदानगर क्षेत्र के आपदा प्रभावित परिवारों के जेहन में 17-18 सितंबर 2025 की वह भयावह रात आज भी ताजा है। कुंतरीलगा फाली, सैंती और धुर्मा में आई आपदा ने कई परिवारों से उनके अपने छीन लिए, जबकि कई घर मलबे में तब्दील हो गए। आपदा की पहली बरसी पर एक बार फिर प्रभावित परिवारों का दर्द छलक उठा। अपनों को याद करते हुए परिजनों की आंखें नम हो गईं। आपदा के बाद प्रभावित परिवारों ने जिंदगी को दोबारा पटरी पर लाने की कोशिश की, लेकिन हादसे के जख्म अब भी पूरी तरह नहीं भर सके हैं। किसी परिवार ने अपना सदस्य खोया तो किसी ने अपना आशियाना। हादसे की यादें और अपनों की कमी आज भी परिवारों को उस काली रात की ओर ले जाती हैं।
आपदा की पहली बरसी पर प्रभावित परिवारों और ग्रामीणों ने हादसे में जान गंवाने वालों को श्रद्धांजलि दी। परिजनों ने दिवंगतों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की और उन्हें भावुक होकर याद किया। इस दौरान कई परिवारों की आंखों से आंसू छलक पड़े। ग्रामीणों ने कहा कि समय बीतने के साथ दर्द कम होने की उम्मीद थी, लेकिन अपनों की याद हर दिन साथ रहती है। बरसी उनके लिए महज कैलेंडर की एक तारीख नहीं, बल्कि उस भयावह रात की यादों को फिर से सामने लाने वाला दिन है। आपदा को एक वर्ष बीतने के बाद भी प्रभावित परिवारों के सामने पुनर्वास और मूलभूत सुविधाओं से जुड़े सवाल बने हुए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि राहत के साथ प्रभावित परिवारों को स्थायी समाधान और सुरक्षित भविष्य की जरूरत है। उनका कहना है कि आपदा में खोए अपनों को वापस लाना संभव नहीं है, लेकिन प्रभावित परिवारों को सम्मानजनक और सुरक्षित जीवन उपलब्ध कराना जिम्मेदारी जरूर है। नंदानगर की इस त्रासदी की पहली बरसी पर क्षेत्र ने अपने दिवंगतों को नम आंखों से याद किया। एक साल बीतने के बावजूद प्रभावित परिवारों के दिलों में उस रात की टीस आज भी जिंदा है।