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मेडिकल इमरजेंसी में समलैंगिक पार्टनर फ़ैसले ले सकते हैं: केंद्र सरकार

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने दिल्ली उच्च न्यायालय में कहा है कि सक्षम वयस्कों को अपने समलैंगिक पार्टनर को स्वास्थ्य संबंधी फैसले लेने के लिए अधिकृत करने की अनुमति दी जानी चाहिए। सरकार के अनुसार, उचित कानूनी सुरक्षा और प्रक्रियाओं के तहत…

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मेडिकल इमरजेंसी में समलैंगिक पार्टनर फ़ैसले ले सकते हैं: केंद्र सरकार

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने दिल्ली उच्च न्यायालय में कहा है कि सक्षम वयस्कों को अपने समलैंगिक पार्टनर को स्वास्थ्य संबंधी फैसले लेने के लिए अधिकृत करने की अनुमति दी जानी चाहिए। सरकार के अनुसार, उचित कानूनी सुरक्षा और प्रक्रियाओं के तहत ऐसी व्यवस्था को लागू किया जा सकता है। केंद्र ने दाखिल किया हलफनामा केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय और राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग ने न्यायालय में दाखिल हलफनामे में कहा कि किसी व्यक्ति को चिकित्सकीय आपात स्थिति में अक्षम होने की दशा में अपनी ओर से निर्णय लेने के लिए सक्षम पार्टनर को अधिकृत करने की व्यवस्था कानूनी एवं नैतिक ढांचे में शामिल की जा सकती है।

सरकार ने स्पष्ट किया कि उसका रुख समलैंगिक संबंधों में रहने वाले लोगों के संवैधानिक अधिकारों पर सवाल नहीं उठाता। सरकार निजता, स्वायत्तता, समानता और व्यक्तिगत पसंद के अधिकारों का सम्मान करती है। चिकित्सा प्रतिनिधि की मान्यता की मांग याचिकाकर्ताओं ने बताया कि वे 2018 से दिल्ली में समलैंगिक पार्टनर के रूप में साथ रह रहे हैं और 2023 में न्यूजीलैंड में विवाह किया था। याचिका में कहा गया कि चिकित्सकीय आपात स्थिति में पार्टनर को चिकित्सा संबंधी सहमति देने के लिए अधिकृत करने का स्पष्ट कानूनी ढांचा मौजूद नहीं है। याचिका में न्यायालय से अस्पतालों और चिकित्सकों के लिए ऐसे दिशा-निर्देश जारी करने का आग्रह किया गया है, जिससे समलैंगिक पार्टनर को चिकित्सा प्रतिनिधि के रूप में मान्यता मिल सके।