पहाड़ों पर उगाया कृष्णा फल, अनेकों गुणों से है भरपूर

निर्मल उप्रेती
अल्मोड़ा। पहाड़ों में खेती करना आसान नहीं है। कम जमीन, कठिन भौगोलिक परिस्थितियां और बाजार तक पहुंच की चुनौती इन सबके बीच एक किसान ने कुछ अलग करने की ठानी।अल्मोड़ा जनपद रानीखेत के सिंगोली गांव के ललित सिंह रौतेला ने पहाड़ की धरती पर पैशन फ्रूट यानी कृष्णा फल की खेती शुरू कर नई राह तलाशने की कोशिश की है। दक्षिण अमेरिका मूल का माना जाने वाला यह फल अपने स्वाद और पोषक तत्वों के लिए जाना जाता है। आखिर पहाड़ में कैसे तैयार हो रहा है ये खास फल पहाड़ की ढलानों पर हरियाली तो आम है लेकिन इन बेलों पर लटकते ये फल कुछ खास हैं। ये है पैशन फ्रूट जिसे कई जगह कृष्णा फल के नाम से भी जाना जाता है। रानीखेत के सिंगोली गांव में किसान ललित सिंह रौतेला ने पारंपरिक खेती से अलग हटकर इसकी खेती शुरू की है। कहते हैं कि कुछ नया करने के लिए सिर्फ जमीन नहीं जुनून भी चाहिए। ललित सिंह रौतेला ने इसी जुनून के साथ पैशन फ्रूट की खेती का प्रयोग किया और पहाड़ की जमीन पर इसे उगाने की कोशिश शुरू की। उनकी मेहनत का नतीजा अब इन बेलों और फलों के रूप में नजर आ रहा है। पैशन फ्रूट अपने अलग स्वाद और खुशबू के लिए जाना जाता है। इसके अंदर मौजूद गूदे का इस्तेमाल जूस, शेक और कई तरह के खाद्य पदार्थों में किया जाता है।

यानी पहाड़ की मिट्टी में तैयार हो रहा ये फल स्वाद के साथ खेती के नए विकल्प की उम्मीद भी जगा रहा है। पहाड़ों में खेती की अपनी चुनौतियां हैं। छोटी जोत, मौसम और बाजार तक पहुंच जैसी दिक्कतों के बीच नई फसलों को आजमाना किसी चुनौती से कम नहीं। लेकिन ललित का प्रयोग बताता है कि अगर किसान नई संभावनाओं को आजमाएं और उन्हें तकनीकी मार्गदर्शन और बेहतर बाजार मिले, तो पहाड़ी कृषि को नई दिशा मिल सकती है। रानीखेत के सिंगोली गांव में पैशन फ्रूट की ये खेती सिर्फ एक फल की पैदावार की कहानी नहीं है। ये उस सोच की कहानी है, जिसमें पहाड़ का किसान पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर नए विकल्प तलाश रहा है। अब देखना होगा कि आने वाले समय में कृष्णा फल की ये खेती स्थानीय किसानों के लिए कितनी बड़ी संभावना बनती है। सिंगोली में ललित सिंह रौतेला की ये कोशिश यही संदेश दे रही है कि खेती में प्रयोग हों, तो पहाड़ की जमीन पर भी नई संभावनाओं के बीज उगाए जा सकते हैं।



