नौतनवा तहसील: लैंड यूज बदले बिना ही बेचे जा रहे आवासीय प्लॉट
नौतनवा से लेकर सोनौली तक कथित कारोबारियों की कट रही चांदी,खरीददार तहसीलों के लगा रहे चक्कर

नौतनवा। नौतनवा से सोनौली कस्बे और आसपास के गांवों तक कृषि भूमि पर प्लाटिंग कर बिक्री का खेल बदस्तूर जारी है। खेतों में फसल भले न दिखाई दे, लेकिन जमीन कारोबारियों के मुनाफे की फसल खूब लहलहा रही है। आवासीय उपयोग के लिए भू-उपयोग बदले बिना बेची जा रही जमीन खरीदने वाले लोग बाद में परेशान हो रहे हैं। मकान बनाने के लिए ऋण लेने पहुंचने पर जमीन कृषि श्रेणी में दर्ज होने का पता चलता है। इसके बाद शुरू होती है तहसील की दौड़ और धारा 80 के तहत भूमि को अकृषक दर्ज कराने की मशक्कत।
नौतनवा बाईपास, बनैलिया माता मंदिर के आसपास, एसएसबी कार्यालय के निकट, सोनौली कस्बे, भुंडी, सुकरौली और एसएसबी मार्ग समेत गांवों के संपर्क मार्गों पर जगह-जगह प्लाटिंग नजर आ रही है। इसके बावजूद जिम्मेदारों की निगरानी पर सवाल उठ रहे हैं। नौतनवा नगरपालिका और सोनौली नगर पंचायत के आसपास जिन खेतों में एक वर्ष पहले गेहूं, धान और दूसरी फसलें दिखाई देती थीं, वहां अब प्लाटिंग हो चुकी है।
जमीन कारोबारियों ने जगह-जगह खेतों में दीवारें खड़ी कर भूखंड तैयार कर दिए हैं। खेतों की हरियाली की जगह अब दीवारें और घास-फूस नजर आ रही हैं। बताया जाता है कि कारोबारी किसानों को कुछ रकम एडवांस देकर जमीन पर प्लाटिंग करते हैं और ग्राहक मिलने पर किसान से सीधे बैनामा कराते हैं। आरोप है कि बिक्री से पहले न तो भूमि को धारा 80 के तहत अकृषक कराया जाता है और न ही प्लाटिंग के लिए जिला पंचायत की नियमानुसार अनुमति ली जाती है।बुधवार को नौतनवा तहसील में ऐसे कई खरीदार परेशान मिले।
उनका कहना था कि जमीन खरीदने के बाद मकान निर्माण के लिए ऋण लेने पहुंचे तो कृषि भूमि होने की जानकारी मिली। अब वे अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं। सवाल है कि बिक्री के बाद खरीदार नियमों में उलझते हैं, तो प्लाटिंग के दौरान जिम्मेदारों की नजर आखिर कहां रहती है।
नौतनवा में अवैध प्लाटिंग का खेल, रसूखदारों के नाम आने से मचा हड़कंप
नौतनवा तहसील क्षेत्र में कथित अवैध प्लाटिंग के कारोबार में रसूखदारों की संलिप्तता के मामले सामने आने से तहसील से लेकर उपनिबंधक कार्यालय तक खूब चर्चा हो रही है।पड़ताल में मामले की परतें धीरे धीरे खुलने लगी है। सूत्रों के मुताबिक, इस कारोबार से सरकारी राजस्व को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचने की आशंका है। उपनिबंधक कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, पिछले दो वर्षों में नौतनवा तहसील में कुल 17,363 रजिस्ट्रियां हुई हैं। कृषि, अकृषि और धारा 80(2) के तहत हुई रजिस्ट्रियों का ब्योरा देने में सब रजिस्ट्रार बचते नजर आए।
नौतनवा में थारू समाज की करोड़ों की जमीन पर किसका खेल?
नौतनवा कस्बे और रेलवे स्टेशन के आसपास थारू समाज की करोड़ों की जमीनों की कथित खरीद-फरोख्त अब सवालों के घेरे में है। आरोप हैं कि बेशकीमती जमीनें औने-पौने दामों पर खरीदी गर्इं और धारा 80 की प्रक्रिया को भी दरकिनार कर दिया गया। कभी थारू समाज की आबादी और जमीनों के लिए पहचाने जाने वाले नौतनवा में आज जमीनों का बदलता मालिकाना हक कई सवाल खड़े कर रहा है। सूत्रों की मानें तो कुछ नामी शिक्षण संस्थान भी ऐसी जमीनों पर खड़े हैं। जिसको लेकर सवाल उठने शुरू हो गये है।



