एजेंसी। नई दिल्ली। केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने शनिवार को कहा कि भारत की शिक्षा व्यवस्था विद्यार्थी-केंद्रित, अनुसंधान आधारित और भविष्य के लिए तैयार है तथा देश के युवा अब दुनिया से केवल प्रतिस्पर्धा नहीं कर रहे बल्कि उसका नेतृत्व भी कर रहे हैं।
जोशी ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), दिल्ली के 57वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए कहा, ह्यह्यशिक्षा मंत्री का अतिरिक्त प्रभार संभालने के बाद किसी शिक्षण संस्थान में यह मेरा पहला सार्वजनिक कार्यक्रम है और वह भी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ। मैं आप सभी के बीच आकर बहुत खुश हूं और खुद को सौभाग्यशाली मानता हूं।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने भारत के युवाओं की क्षमता पर हमेशा अपार विश्वास जताया है और वह उन्हें विकसित भारत 2047 का प्रमुख शिल्पकार मानते हैं। जोशी ने कहा, आज उच्च शिक्षा में 4.5 करोड़ से अधिक विद्यार्थी पंजीकृत हैं। विश्वविद्यालयों की संख्या में 2014 से करीब 70 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा, 650 से अधिक नए विश्वविद्यालय, 14,000 नए महाविद्यालय, 4,000 से अधिक नए औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई), नौ नए भारतीय प्रबंध संस्थान (आईआईएम), सात नए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) और 13 नए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) स्थापित किए गए हैं। जोशी ने कहा कि मेडिकल कॉलेज की संख्या दोगुनी से अधिक हो गई है और मेडिकल की सीटें लगभग तीन गुनी हो गई हैं। उन्होंने कहा कि ह्यह्यदेश के 823 मेडिकल कॉलेज में करीब 1.4 लाख सीट उपलब्ध हैं।
उन्होंने कहा कि 14,000 से अधिक पीएम स्कूल्स फॉर राइजिंग इंडिया (पीएम श्री) विद्यालयों और 10,000 अटल टिंकरिंग प्रयोगशालाओं के माध्यम से बच्चों को नवोन्मेष, प्रौद्योगिकी और नए विचारों की ताकत से अवगत कराया जा रहा है। जोशी ने खेलों के क्षेत्र में सरकार की पहलों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि खेलो इंडिया, विश्वविद्यालय खेल और युवा खेलों जैसे कार्यक्रमों ने गांवों, कस्बों और उभरते शहरों की प्रतिभाओं को राष्ट्रीय मंच तक पहुंचाया है।
उन्होंने कहा, इससे आप समझ सकते हैं कि युवाओं और खेलों दोनों को कितना महत्व दिया गया है। जोशी ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं से पहले और बाद में खिलाड़ियों से मुलाकात करते हैं, जिससे उनका आत्मविश्वास बढ़ता है। उन्होंने कहा, नए भारत का यह आत्मविश्वास हाल में हुए राष्ट्रमंडल खेलों में एक बार फिर दिखाई दिया। जोशी ने कहा कि भारतीय खिलाड़ियों ने 13 स्वर्ण, 17 रजत और नौ कांस्य समेत कुल 39 पदक जीते और पदक तालिका में चौथा स्थान हासिल किया।
उन्होंने कहा, एक समय सवाल यह था कि भारत के युवा दुनिया से कैसे प्रतिस्पर्धा करेंगे। आज दुनिया देख रही है कि भारत के युवा उसका नेतृत्व कैसे कर रहे हैं और नारी शक्ति भी निश्चित रूप से पीछे नहीं है। जोशी ने शिक्षा के क्षेत्र में महिलाओं के योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (एसटीईएम) विषयों में पंजीकरण कराने वालों में महिलाओं की हिस्सेदारी करीब 44 प्रतिशत है, जो दुनिया में सबसे अधिक अनुपातों में से एक है। उन्होंने कहा, ह्यह्यप्रधानमंत्री मोदी के दृष्टिकोण ने हमारी शिक्षा व्यवस्था को विद्यार्थी-केंद्रित, अनुसंधान आधारित और भविष्य के लिए तैयार बनाया है।
जोशी ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी)-2020 तथा एकेडमिक बैंक आॅफ क्रेडिट्स और मल्टीपल एंट्री, मल्टीपल एग्जिट जैसी पहल विद्यार्थियों को काफी लचीलापन दे रही हैं और उच्च शिक्षा को वास्तव में विद्यार्थी-केंद्रित बना रही हैं। उन्होंने कहा, प्रधानमंत्री ने भारत के संस्थानों में नया आत्मविश्वास पैदा किया है कि हमारे परिसर केवल स्नातक ही नहीं, बल्कि नवप्रवर्तक, शोधकर्ता और राष्ट्र निमार्ता भी तैयार कर सकते हैं।
जोशी ने आईआईटी दिल्ली को इस बदलाव का जीवंत उदाहरण बताते हुए कहा कि संस्थान को वैश्विक स्तर पर मिल रही पहचान न केवल उसकी उत्कृष्टता बल्कि ह्यह्यदुनिया भर में भारतीय उच्च शिक्षा के बढ़ते कद को भी दर्शाती है। उन्होंने कहा, भारत की युवा शक्ति की उल्लेखनीय झलक आज यहां प्रधानमंत्री के सामने बैठी है। जोशी ने डिग्री प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों से कहा, आज आप आईआईटी से केवल डिग्री लेकर नहीं जा रहे हैं, बल्कि एक जिम्मेदारी भी लेकर जा रहे हैं-उद्देश्यपूर्ण नवोन्मेष करने, ईमानदारी के साथ नेतृत्व करने और भारत को विकसित भारत बनाने में योगदान देने की जिम्मेदारी। उन्होंने विद्यार्थियों और उनके माता-पिता को बधाई देते हुए कहा, उत्कृष्टता के साथ-साथ नैतिकता और मूल्य भी महत्वपूर्ण हैं।