पायनियर समाचार सेवा
लखनऊ। एक पुरानी कहावत को चरितार्थ करने वाला राय उमानाथ बली प्रेक्षागृह में बिम्ब सांस्कृतिक समिति द्वारा मंचित नाटक दर्शकों को हंसाते हुए सकारात्मक संदेश दे गया। रामकिशोर नाग का लिखा और सरिता कपूर के निर्देशन में प्रस्तुत नाटक ‘घर की मुर्गी’ बता गया कि अगर नजरिया सही हो तो जो प्राप्त है और आपकी पहुंच में है उसे नकारना या उसकी अवज्ञा अनुचित है। संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार और प्रदेश के संस्कृति विभाग के सहयोग से हुए संतोष में ही सुख ढूंढने को प्रेरित करने वाले इस नाटक की कहानी में व्यवसायी रामजी की पत्नी सरिता भारतीय परिवेश और संस्कारों के हिसाब से चलने वाली कुशल शिक्षित गृहणी हैं पर रामजी को पश्चिमी संस्कृति भाती है।
लिहाजा वे सरिता पर जब तब व्यंग्य बाण छोड़ा करते हैं। सरिता के कॉलेज के साथी पति-पत्नी किटी और प्रकाश को जब सारी जानकारी होती है तो वे तीनों रामजी को सबक सिखाने की योजना बनाते हैं। रामजी को अपने आफिस में एक सेक्रेटरी की जरूरत होती है। आधुनिक वेश-भूषा में इंटरव्यू के लिये आई मोना को देखकर उनके मन में लड्डू फूटने लगते हैं। रामजी उसे खुशी खुशी नौकरी पर रख लेते हैं।
घर में सरिता का बनाया जैसा खाना रामजी को बदस्वाद लगता है, वैसा ही खाना मोना के हाथ से उन्हें चटखारे भरा लगने लगता है। मोना जब जब उनसे पत्नी के बारे में पूछती है तो वह अपने को माडर्न विचारों वाला और अपनी पत्नी को पिछड़ी गंवार बताकर मोना की सहानुभूति पाने और उस पर प्रभाव जमाना चाहते हैं। एक दिन सरिता रामजी से कहती है वो नई सेक्रेटरी जिसकी वो हर चीज की प्रशंसा करते हैं उसको देखने ऑफिस आ रही है। रामजी अपनी पोल खुलने के डर से मोना को आफिस से छुट्टी देकर भगा देते हैं।