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अब्बास अंसारी ने गाजीपुर एसपी के खिलाफ दाखिल की अवमानना याचिका, हिस्ट्रीशीट मामले में हाईकोर्ट पहुंचे विधायक

अब्बास अंसारी ने गाजीपुर एसपी के खिलाफ दाखिल की अवमानना याचिका, हिस्ट्रीशीट मामले में हाईकोर्ट पहुंचे विधायक

माफिया मुख्तार अंसारी के बेटे और विधायक अब्बास अंसारी ने एक बार फिर इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। इस बार उन्होंने गाजीपुर की पुलिस अधीक्षक डॉ. ईरम रज़ा के खिलाफ अवमानना याचिका दाखिल की है। मामला मोहम्मदाबाद थाने में खोली गई हिस्ट्रीशीट से जुड़ा हुआ है, जिसे लेकर अब्बास अंसारी लगातार कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं।

दरअसल, अब्बास अंसारी ने पहले हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर अपने खिलाफ खोली गई हिस्ट्रीशीट को चुनौती दी थी। उनका कहना था कि पुलिस ने दुर्भावना के तहत उनके खिलाफ कार्रवाई की और राजनीतिक कारणों से हिस्ट्रीशीट खोली गई। इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने 17 जुलाई 2025 को सुनवाई करते हुए उन्हें गाजीपुर एसपी के समक्ष प्रार्थना पत्र देने का निर्देश दिया था।

हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच, जिसमें जस्टिस सिद्धार्थ और जस्टिस अवनीश सक्सेना शामिल थे, ने आदेश दिया था कि एसपी गाजीपुर एक महीने के भीतर मामले में निर्णय लें और उचित आदेश पारित करें। इसके बाद अदालत ने मूल याचिका का निस्तारण कर दिया था।

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अब्बास अंसारी का आरोप है कि उन्होंने हाईकोर्ट के निर्देश के अनुसार कई बार गाजीपुर एसपी को आवेदन दिया, लेकिन इसके बावजूद मामले में कोई आदेश पारित नहीं किया गया। उनका कहना है कि अदालत के स्पष्ट निर्देश के बाद भी प्रशासन की ओर से कार्रवाई न करना न्यायालय की अवमानना के दायरे में आता है। इसी आधार पर उन्होंने अब एसपी डॉ. ईरम रज़ा के खिलाफ अवमानना याचिका दाखिल की है।

याचिका में अब्बास अंसारी की ओर से कहा गया है कि वह जनता द्वारा चुने गए जनप्रतिनिधि हैं और मौजूदा समय में विधायक हैं। बावजूद इसके पुलिस ने उनके खिलाफ हिस्ट्रीशीट खोलकर उनकी छवि खराब करने की कोशिश की है। उनके वकीलों का कहना है कि हिस्ट्रीशीट खोलने का फैसला तथ्यों और कानून के आधार पर नहीं, बल्कि दुर्भावनापूर्ण तरीके से लिया गया।

इस मामले ने एक बार फिर उत्तर प्रदेश की राजनीति और कानून-व्यवस्था को लेकर बहस तेज कर दी है। विपक्षी दल पहले भी आरोप लगाते रहे हैं कि राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के चलते नेताओं के खिलाफ पुलिस कार्रवाई की जाती है, जबकि सरकार का कहना है कि अपराध और कानून व्यवस्था के मामलों में किसी के साथ भेदभाव नहीं किया जाता।

अब इस अवमानना याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई के बाद यह साफ होगा कि अदालत एसपी गाजीपुर से जवाब तलब करती है या मामले में कोई नया निर्देश जारी किया जाता है। फिलहाल इस केस पर राजनीतिक और कानूनी दोनों हलकों की नजरें टिकी हुई हैं।

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