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एसटीएफ ने 250 पेटी सिरप के साथ चार आरोपी दबोचे

अवैध कोडीन कफ सिरप की तस्करी का भंडाफोड़ पायनियर समाचार सेवा लखनऊ। एसटीएफ की प्रयागराज फील्ड यूनिट ने अवैध रूप से ले जाई जा रही कोडीनयुक्त सिरप की 30 हजार बोतलें बरामद कर गुरुवार चार लोगों को गिरफ्तार किया। जहां आरोपियों के…

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एसटीएफ ने 250 पेटी सिरप के साथ चार आरोपी दबोचे

अवैध कोडीन कफ सिरप की तस्करी का भंडाफोड़

पायनियर समाचार सेवा

लखनऊ। एसटीएफ की प्रयागराज फील्ड यूनिट ने अवैध रूप से ले जाई जा रही कोडीनयुक्त सिरप की 30 हजार बोतलें बरामद कर गुरुवार चार लोगों को गिरफ्तार किया। जहां आरोपियों के कब्जे से 250 पेटी वनरैक्स ब्रांड की कोडीन कफ सिरप, जिसकी अनुमानित कीमत करीब तीन करोड़ रुपए बताई गई है। साथ ही तस्करी में इस्तेमाल एक डीसीएम और टाटा नेक्सॉन कार भी जब्त की गई है। एसटीएफ फील्ड इकाई प्रयागराज के पुलिस उपाधीक्षक शैलेश प्रताप सिंह ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों की पहचान धीरेन्द्र कुमार निवासी नाहर पुरवा, थाना बिसण्डा, बांदा, प्रवीण कुमार उर्फ लकी निवासी लखन कॉलोनी अतर्रा, थाना अतर्रा, बांदा, रोहित पाण्डेय निवासी शास्त्री नगर, रामलीला मैदान अतर्रा, थाना अतर्रा, बांदा और शेखर सिंह निवासी ग्राम भैना बहादुरगढ़, गढ़मुक्तेश्वर, जनपद हापुड़ के रूप में हुई है।

उन्होंनें बताया कि गिरफ्तारी के दौरान आरोपियों के पास से 250 पेटी (30,000 शीशी) वनरैक्स ब्रांड कफ सिरप बरामद की। साथ ही एक डीसीएम, एक टाटा नेक्सॉन कार, पांच मोबाइल और 53,530 रुपए नगद भी बरमाद किया। वहीं पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि उनका एक सक्रिय गिरोह है, जो कोडीन कफ सिरप को मेडिकल उपयोग के बजाय नशे के कारोबार में खपाने के लिए उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों में सप्लाई करता है।

एसटीएफ के अनुसार, आरोपी दिल्ली स्थित एक फर्म से कोडीन कफ सिरप की खरीद कर उसे डीसीएम और कार के जरिए अतर्रा, बांदा, चित्रकूट तथा मध्य प्रदेश के सीमावर्ती जिलों तक पहुंचाते थे। आरोप है कि मेडिकल स्टोर की सामान्य बिक्री के बजाय इसे नशे के रूप में इस्तेमाल करने वालों तक महंगे दामों पर पहुंचाया जाता था।

पुलिस के मुताबिक, गिरोह कथित तौर पर फर्जी जीएसटी इनवॉइस तैयार कर एक ऐसी फर्म के नाम का इस्तेमाल करता था जिसे वाणिज्य कर विभाग द्वारा निष्प्रयोज्य घोषित किया जा चुका है। इस तरीके से अवैध कारोबार को वैध मेडिकल सप्लाई के रूप में दिखाने का प्रयास किया जाता था।

पूछताछ में यह भी सामने आया कि गिरोह के सदस्य मुनाफे को आपस में बराबर बांटते थे। वहीं, डीसीएम चालक को खेप को सुरक्षित गंतव्य तक पहुंचाने के एवज में 25 हजार रुपए अलग से इनाम दिए जाने की बात सामने आई है।