लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र निर्धारित अवधि से पहले ही समाप्त हो गया। एक दिन का कार्यकाल शेष रहने के बावजूद विधानसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई। तीन दिनों तक चले इस सत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक, लगातार विरोध प्रदर्शन और बार-बार कार्यवाही स्थगित होने के कारण सदन का माहौल लगातार गर्म रहा।
सत्र के दौरान समाजवादी पार्टी (सपा) के विधायक राम मंदिर दान से जुड़े कथित मुद्दे पर चर्चा की मांग को लेकर लगातार विरोध प्रदर्शन करते रहे। सरकार की ओर से जवाब दिया गया कि यह मामला सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है, इसलिए सदन में इस पर चर्चा उचित नहीं है। इसी मुद्दे को लेकर विपक्ष ने सदन के भीतर और विधानसभा परिसर में लगातार नारेबाजी और प्रदर्शन किया।
तीसरे दिन विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने विपक्ष के रवैये पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि सदन की गरिमा बनाए रखना सभी सदस्यों की जिम्मेदारी है और लगातार व्यवधान लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप नहीं है। हंगामे के बीच उन्होंने सदन छोड़ दिया, जिसके बाद कार्यवाही का संचालन उपाध्यक्ष मनीष असीजा ने किया।
नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडे ने सरकार पर गंभीर मुद्दों से बचने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि यदि सरकार विपक्ष की मांग पर चर्चा के लिए समय देती, तो विवाद की स्थिति नहीं बनती। सपा विधायकों ने बिजली, कानून-व्यवस्था, छात्रों से जुड़े मुद्दों और राम मंदिर दान संबंधी विषयों को लेकर भी सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। विधानसभा परिसर में कई विधायक दान पात्र और पोस्टर लेकर विरोध जताते दिखाई दिए।
दूसरी ओर, सरकार की ओर से कहा गया कि विपक्ष को हर मुद्दे पर चर्चा का अवसर देने के लिए सरकार तैयार थी, लेकिन सदन की कार्यवाही बाधित करना लोकतांत्रिक प्रक्रिया के हित में नहीं है। कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने विपक्ष पर केवल विरोध की राजनीति करने का आरोप लगाया और कहा कि सरकार हर विषय पर चर्चा के लिए तैयार है।
इस सत्र के दौरान सरकार ने विधानसभा में अनुपूरक बजट पेश किया। इसके अलावा संभल हिंसा जांच रिपोर्ट भी सदन के पटल पर रखी गई। मदरसा शिक्षकों के वेतन भुगतान से संबंधित विधेयक सहित कई प्रशासनिक और विधायी विषयों पर भी कार्यवाही प्रस्तावित थी, लेकिन लगातार हंगामे के कारण कई कार्य प्रभावित हुए।
विधानसभा अध्यक्ष ने सभी दलों से लोकतांत्रिक मर्यादा बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि सदन जनता की समस्याओं पर चर्चा का सर्वोच्च मंच है और इसका उपयोग सकारात्मक बहस के लिए होना चाहिए। वहीं विपक्ष ने स्पष्ट किया कि जब तक उसकी मांगों पर चर्चा नहीं होगी, तब तक उसका विरोध जारी रहेगा।
सत्र के दौरान विधानसभा परिसर और आसपास सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। राजनीतिक हलकों में अब इस बात पर चर्चा तेज है कि लगातार हंगामे के कारण समय से पहले समाप्त हुआ यह मानसून सत्र आने वाले दिनों में सत्ता और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव को और तेज कर सकता है।










