कोलकाता। संसद मानसून सत्र के बाद पश्चिम बंगाल राज्यसभा उपचुनाव पर सबकी नजर है। बंगाल में बीजेपी सरकार बनते ही टीएमसी में बुरा हाल और 20 लोकसभा, 4 राज्यसभा और लगभग 60 विधायक पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से अलग हो चुके है। बंगाल में राज्यसभा उपचुनाव को लेकर गहमागहमी तेज हो गई है। किसी भी समय चुनाव आयोग डेट की घोषणा कर सकता है। बंगाल में बीजेपी को बहुमत और आसानी से सीट जीत लेगी। राज्यसभा के आगामी उपचुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अपनी रणनीति तेज कर दी है।
पार्टी सूत्रों के अनुसार बीजेपी इस बार कुलदीप माइती पर दांव लगा सकती है। कुलदीप माइती के नाम से ही राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। बीजेपी नेतृत्व का मानना है कि कुलदीप माइती की जमीनी पकड़ और संगठन में सक्रियता पार्टी के लिए फायदे का सौदा साबित हो सकती है। इसी कारण उपचुनाव में उन्हें उम्मीदवार बनाने पर गंभीरता से विचार चल रहा है।
अगर ऐसा होता है तो इसे बीजेपी का “सरप्राइज एंट्री” भी कहा जा सकता है। राज्यसभा की यह सीट खाली होने के बाद से ही सभी राजनीतिक दलों की नजरें इस पर टिकी हैं। बीजेपी कुलदीप माइती के नाम से न सिर्फ पार्टी कार्यकर्ताओं को साधना चाहती है, बल्कि क्षेत्रीय समीकरणों को भी साधने की कोशिश में है। पार्टी का मानना है कि माइती के मैदान में आने से बंगाल में बीजेपी का संदेश और मजबूत होगा।
वहीं विपक्षी दलों ने भी इस नाम पर प्रतिक्रिया देनी शुरू कर दी है। सियासी जानकारों का कहना है कि कुलदीप माइती के नाम की घोषणा होते ही चुनावी समीकरण पूरी तरह बदल सकते हैं। इस संभावित नाम के बाद बीजेपी के अंदर भी हलचल तेज हो गई है। वरिष्ठ नेता लगातार बैठकें कर रहे हैं और अंतिम फैसला आलाकमान के निर्देश पर लिया जाएगा।
पार्टी सूत्रों का कहना है कि अगले कुछ दिनों में उम्मीदवार के नाम की आधिकारिक घोषणा हो सकती है। कुल मिलाकर राज्यसभा उपचुनाव अब सिर्फ एक सीट का चुनाव नहीं रह गया है, बल्कि यह बंगाल की राजनीति की दिशा तय करने वाला अहम मुकाबला बनता जा रहा है। अब सबकी नजरें बीजेपी के अंतिम फैसले और कुलदीप माइती की उम्मीदवारी पर टिकी हैं।










