लखनऊ: लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) में कथित रिश्वतखोरी और निर्माण कार्यों में उगाही की शिकायतों के बाद प्रशासन ने निगरानी व्यवस्था को और मजबूत करने की तैयारी शुरू कर दी है। प्राधिकरण जल्द ही एक टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर जारी करने जा रहा है, जिसके माध्यम से आम नागरिक, भवन निर्माण कराने वाले लोग और अन्य शिकायतकर्ता सीधे अपनी शिकायत दर्ज करा सकेंगे।
सूत्रों के अनुसार, हाल के दिनों में एलडीए के कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों पर निर्माण कार्यों की अनुमति, निरीक्षण और नक्शा पास कराने की प्रक्रिया में अवैध वसूली तथा लोगों को अनावश्यक रूप से प्रताड़ित करने के आरोप सामने आए थे। इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए प्राधिकरण ने शिकायत निवारण प्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाने का निर्णय लिया है।
शिकायतों की होगी निष्पक्ष जांच
प्रस्तावित टोल-फ्री नंबर पर प्राप्त प्रत्येक शिकायत का रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। इसके बाद संबंधित मामलों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। यदि जांच में किसी अधिकारी, इंजीनियर, सुपरवाइजर या कर्मचारी की भूमिका संदिग्ध या दोषपूर्ण पाई जाती है, तो उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर निलंबन, अनुशासनात्मक कार्रवाई या अन्य कानूनी कदम भी उठाए जा सकते हैं।
विजिलेंस की निगरानी में कई अधिकारी
सूत्रों का कहना है कि एलडीए के केवल एक-दो अधिकारियों तक ही जांच सीमित नहीं है। प्राधिकरण के कई इंजीनियरों और सुपरवाइजरों की गतिविधियों पर भी विजिलेंस की नजर बनी हुई है। विभागीय स्तर पर आंतरिक निगरानी बढ़ाई गई है और विभिन्न शाखाओं के कार्यों की समीक्षा की जा रही है, ताकि भ्रष्टाचार की संभावनाओं को कम किया जा सके।
पारदर्शिता बढ़ाने की तैयारी
एलडीए का उद्देश्य निर्माण कार्यों से जुड़े नागरिकों को पारदर्शी और समयबद्ध सेवाएं उपलब्ध कराना है। अधिकारियों का मानना है कि शिकायतों के लिए समर्पित टोल-फ्री नंबर शुरू होने से लोगों को अपनी समस्या दर्ज कराने का आसान माध्यम मिलेगा और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने में भी मदद मिलेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि शिकायतों का समयबद्ध निस्तारण और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जाती है, तो इससे आम नागरिकों का भरोसा बढ़ेगा और प्राधिकरण की कार्यप्रणाली अधिक जवाबदेह बन सकेगी।
फिलहाल टोल-फ्री नंबर जारी करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में बताई जा रही है। इसके शुरू होने के बाद नागरिक बिना किसी शुल्क के अपनी शिकायत दर्ज करा सकेंगे। एलडीए प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि भ्रष्टाचार और अवैध वसूली के मामलों में “जीरो टॉलरेंस” की नीति अपनाई जाएगी और दोषी पाए जाने वाले किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा।










