जनता दरबार पहुंचा परिवहन भर्ती विवाद, सीएम योगी ने दिए जांच के आदेश

ड्राइविंग लाइसेंस परियोजना से जुड़ी ठेका कंपनियों पर गंभीर आरोप, दोषी मिलने पर ब्लैकलिस्ट करने का परिवहन मंत्री ने दिया आश्वासन

 

ए के दुबे
लखनऊ। उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग में ड्राइविंग लाइसेंस परियोजना के तहत हुई भर्ती को लेकर उठे विवाद ने अब नया मोड़ ले लिया है। कई महीनों से न्याय की मांग कर रहे नौकरी से हटाए गए कर्मचारियों ने सोमवार को मुख्यमंत्री के जनता दरबार में अपनी शिकायत दर्ज कराई। मामले को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को तत्काल जांच के निर्देश दिए।

बता दें मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद परिवहन विभाग में हलचल तेज हो गई। जिन अधिकारियों पर अब तक शिकायतों की अनदेखी करने के आरोप लग रहे थे, उन्होंने पीड़ित कर्मचारियों से संपर्क कर उनकी शिकायतें सुनना शुरू कर दिया है। पीड़ित कर्मचारियों ने भर्ती में अनियमितताओं का आरोप लगाया है कि ड्राइविंग लाइसेंस निर्माण कार्य के लिए ठेका प्राप्त कंपनियों ने भर्ती प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं कीं। उनका कहना है कि नौकरी दिलाने के नाम पर अभ्यर्थियों से लाखों रुपये लिए गए और कुछ ही समय बाद बिना स्पष्ट कारण बताए सेवा से हटा दिया गया।

कर्मचारियों का यह भी आरोप है कि कार्यालय में उपयोग होने वाले कंप्यूटर, सीपीयू और अन्य उपकरण भी उनसे स्वयं खरीदवाए गए। इतना ही नहीं, कुछ कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि उन्हें मिलने वाले वेतन का एक हिस्सा भी वापस लिया जाता था। पीड़ितों का कहना है पिछले चार महीनों से परिवहन विभाग के अधिकारियों और उच्च स्तर तक शिकायतें करते रहे, लेकिन उनकी मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अंततः उन्होंने मुख्यमंत्री के जनता दरबार का दरवाजा खटखटाया, जहां उनकी शिकायत पर तत्काल संज्ञान लिया गया।

कई जिलों के कर्मचारियों ने अपनी बात रखते हुए बताया कि रायबरेली, कानपुर सहित विभिन्न जिलों से पहुंचे कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री के समक्ष अपने दस्तावेज और भुगतान संबंधी साक्ष्य प्रस्तुत किए। उनका दावा है कि भर्ती के नाम पर दो से पांच लाख रुपये तक की राशि ली गई और बाद में बिना कारण सेवा समाप्त कर दी गई।

यूपी के परिवहन राज्य मंत्री दया शंकर सिंह मामले का लिया संज्ञान, जांच के दिए निर्देश

उत्तर प्रदेश के परिवहन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) ने कहा कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। यदि जांच में ठेका कंपनियों की भूमिका दोषपूर्ण पाई जाती है तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर संबंधित कंपनियों को ब्लैकलिस्ट भी किया जाएगा तथा नियमों के अनुरूप प्रभावित कर्मचारियों के हितों पर भी निर्णय लिया जाएगा। अब सभी की निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला परिवहन विभाग की भर्ती प्रक्रिया और ठेका व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर सकता है।

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