नई दिल्ली। बेटा, अगर आज तुम जीत गए तो पूरी दुनिया तुम्हारे साथ खड़ी होगी। लेकिन अगर नहीं भी जीते, तब भी मैं हमेशा तुम्हारे साथ रहूंगा। महान कोच जसपाल राणा की यह प्रेरणादायी बात भारत के स्टार रैपिड फायर पिस्टल निशानेबाज अनीश भानवाला के जीवन का अहम आधार बन गई थी। अनीष को जैसे ही राणा के निधन की खबर मिली, उन्हें सबसे पहले यही शब्द याद आए। भारत के महानतम पिस्टल निशानेबाजों में शामिल राणा ने खिलाड़ी के रूप में शानदार सफलता हासिल की थी और बाद में कोच बनकर मनु भाकर को पेरिस ओलंपिक में ऐतिहासिक दो कांस्य पदक दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। हृदय संबंधी जटिलताओं के कारण राणा का 49 वर्ष की आयु में निधन हो गया। अनीश ने बताया कि 2018 गोल्ड कोस्ट राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीतने का आत्मविश्वास भी उन्हें राणा से ही मिला था।उन्होंने कहा, मैं 2018 राष्ट्रमंडल खेलों का जिक्र जरूर करना चाहूंगा। प्रतियोगिता के पहले दिन मेरा प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा था और मैंने 286 अंक बनाए थे। मुझे चिंता थी कि कहीं मैं रैपिड फायर के फाइनल में जगह न बना पाऊं।उन्होंने कहा, दूसरे दिन प्रतियोगिता स्थल पर जाने से पहले सर ने मुझे वापस बुलाया और कहा, ‘बेटा, अगर आज अच्छा प्रदर्शन करके जीत गए तो पूरी दुनिया तुम्हारे साथ होगी। लेकिन अगर नहीं भी जीते, तो मैं हर हाल में तुम्हारे साथ खड़ा रहूंगा।
अनीश के अनुसार, उन शब्दों ने मेरा पूरा दबाव खत्म कर दिया। इसके बाद मैंने अपने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन में से एक दिया और स्वर्ण पदक जीत लिया। राष्ट्रमंडल खेलों (2018) के स्वर्ण पदक विजेता और 2025 विश्व चैंपियनशिप के रजत पदक विजेता अनीश ने बताया कि हाल ही में म्यूनिख विश्व कप और आगामी एशियाई खेलों की तैयारी के लिए उन्हें इटली में राणा के मार्गदर्शन में दो सप्ताह के अभ्यास का मौका मिला था।दिलचस्प बात यह रही कि लगभग आठ साल बाद राणा ने उन्हें फिर वही शब्द दोहराए, जिन्होंने उनके करियर को नई दिशा दी थी और दोनों के बीच विश्वास के रिश्ते को और मजबूत किया था।इटली में मनु भाकर और जसपाल राणा के साथ बिताए समय को याद करते हुए अनीश ने कहा कि इस बार उन्हें राणा के स्वभाव में एक अलग ही बदलाव दिखाई दिया।उन्होंने कहा, ‘पिछले महीने हम म्यूनिख विश्व कप से पहले प्रशिक्षण के लिए इटली गए थे। वहां मनु भी थीं, मैं भी था और सर भी थे।
यह संयोग था या कुछ और लेकिन उन दो हफ्तों में वह बिल्कुल अलग इंसान नजर आए।अनीश ने कहा, ”उनके बोलने का तरीका, उनका व्यवहार और हर छोटी बात यह बता रही थी कि उनमें कुछ बदल गया है। वह बहुत शांत और सौम्य हो गए थे। पहले की तरह सख्त नहीं थे और अक्सर जीवन से जुड़ी सीख साझा करते रहते थे। मैं बस बैठकर उनकी बातें सुनता रहता था।उन्होंने भावुक होकर कहा, ”मैं खुद को सौभाग्यशाली मानता हूं कि उनके जीवन के अंतिम दिनों में मुझे उनके साथ इतना समय बिताने और उनसे बहुत कुछ सीखने का अवसर मिला।स्टैंडर्ड पिस्टल में पूर्व जूनियर वर्ल्ड चैंपियन और एशियाई खेलों व 2028 लॉस एंजिल्स ओलंपिक में भारत के लिए पदक जीतने की सबसे बड़ी उम्मीदों में से एक, अनीश ने बताया कि राणा के मन में उनके लिए बड़ी योजनाएं थीं।
अनीश ने कहा, उन्होंने मुझे कभी अनीश नहीं कहा, हमेशा ‘बाबू’ कहकर बुलाया। वह कहते थे, ‘बाबू’ अब तुम्हें अपने लक्ष्य को लेकर पूरी गंभीरता दिखानी होगी। और अक्सर कहते थे, ‘तुम खास मकसद के लिए चुने गए खिलाड़ी हो।लॉस एंजिलिस ओलंपिक की चर्चा करते हुए राणा ने उनसे कहा था, मैं साफ देख सकता हूं कि तुम यह उपलब्धि हासिल कर सकते हो, बस सही रास्ते पर बने रहना होगा। मुझे दो साल दो, फिर देखना परिस्थितियां कैसे बदलती हैं।अनीश ने बताया कि वह जल्द ही देहरादून जाकर फिर से राणा के साथ प्रशिक्षण करने की उम्मीद कर रहे थे।राणा और अनीश का साथ 2015-16 में शुरू हुआ था, जब राणा को जूनियर पिस्टल टीम की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। अनीश ने कहा, मैं 2017 में जूनियर राष्ट्रीय टीम में आया तब से उन्होंने मुझे प्रशिक्षण देना शुरू किया। 1994 में उन्होंने स्टैंडर्ड पिस्टल स्पर्धा में विश्व रिकॉर्ड बनाते हुए विश्व खिताब जीता था। 2017 में मैंने वही विश्व रिकॉर्ड तोड़ा। यह हमारे बीच एक खास जुड़ाव था।
अनीश ने स्वीकार किया कि राणा आसान कोच नहीं थे। वह अनुशासन के बेहद पक्के और कड़े प्रशिक्षक थे।उन्होंने कहा, वह सामान्य कोच नहीं थे। उनकी प्रशिक्षण शैली काफी सख्त थी और हर युवा खिलाड़ी उसे पसंद नहीं करता था। मैं भी कई बार महसूस करता था कि वह जरूरत से ज्यादा कठोर हैं। लेकिन जैसे-जैसे हम परिपक्व हुए, हमें समझ आया कि वह जो कुछ भी करते थे, हमारे भले के लिए करते थे। उन्हें पता था कि हमसे सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कैसे निकलवाना है।इटली में हुई आखिरी बातचीत को याद करते हुए अनीश भावुक हो गए। उन्होंने कहा, मैंने उनसे कहा था कि मैं आसानी से भावुक नहीं होता है। प्रतियोगिता कितनी भी खराब हो जाए, मैं न रोता हूं और न ही भावुक होता हूं।उन्होंने बताया, सर ने आश्चर्य से पूछा, ऐसा कैसे हो सकता है?’ तब मैंने कहा कि मुझे याद भी नहीं कि आखिरी बार कब रोया था।अनीश के अनुसार, राणा ने मुस्कुराते हुए कहा, आखिर तुम भी इंसान हो। एक दिन ऐसा आएगा जब तुम्हारा मन भी भावनाओं से भर उठेगा।अनीश ने नम आंखों से कहा, ”आज जब मैं उनके उन शब्दों के बारे में सोचता हूं, तो सचमुच भावुक हो जाता हूं।










