नासिक। नवरात्रि और सिंहस्थ कुंभ मेले के करीब आते ही महाराष्ट्र में मुसलमानों को लेकर माहौल गर्मा गया है। जहां 31 अक्टूबर से शुरू हो रहे सिंहस्थ कुंभ मेले के लिए 13 अखाड़ों ने फरमान जारी किया है कि वे मुसलमानों को किसी भी तरह का स्टॉल या दुकान नहीं लगाने देंगे।
वहीं महाराष्ट्र राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष प्यारे खान ने डांडिया और नवरात्रि उत्सवों में मुसलमानों के प्रवेश पर रोक लगाने पर सवाल उठाकर एक नई बहस खड़ी कर दी है। उनका कहना है
कि किसी भी धर्म के व्यक्ति को ऐसे सांस्कृतिक उत्सवों में शामिल होने से नहीं रोका जाना चाहिए।
महाराष्ट्र सरकार में राज्य मंत्री का दर्जा प्राप्त खान ने कहा, “किसी भी धर्म के व्यक्ति को डांडिया और नवरात्रि उत्सवों में शामिल होने की अनुमति मिलनी चाहिए, बशर्ते उनके पास आधार कार्ड जैसा
कोई वैध पहचान पत्र हो।”
धर्म के आधार पर पाबंदियों पर सवाल उठाते हुए खान ने पूछा कि जब आमिर खान, सलमान खान और शाहरुख खान जैसी बॉलीवुड हस्तियों को पूरे देश में स्वीकार किया जाता है और उनका जश्न मनाया
जाता है, तो मुस्लिम प्रतिभागियों को ऐसे उत्सवों से क्यों रोका जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि धर्म के आधार पर लोगों के साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए और उन्हें सांस्कृतिक व सामाजिक उत्सवों में शांतिपूर्वक हिस्सा लेने की अनुमति दी जानी चाहिए। इस बीच आगामी सिंहस्थ कुंभ मेले को लेकर आ रही रिपोर्टों के मुताबिक, 13 अखाड़ों के प्रतिनिधियों ने स्पष्ट कर दिया है कि इस धार्मिक समागम में मुसलमानों को किसी भी तरह की दुकान या स्टॉल लगाने की इजाजत नहीं दी जायेगी।
इस बयान ने कुंभ मेले में भागीदारी और व्यापारिक गतिविधियों को लेकर एक व्यापक बहस छेड़ दी है, जिस पर समाज के विभिन्न वर्गों से प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। एक अन्य घटनाक्रम में नासिक केंद्रीय कारागार के दौरे के बाद श्री प्यारे खान ने बताया कि उनकी गैंगस्टर अबू सलेम से बातचीत हुई। खान के अनुसार, सलेम ने सवाल उठाया कि वह पिछले 25 वर्षों से जेल में क्यों बंद है? सलेम के हवाले से खान ने कहा, “मैं 25 वर्ष से यहां हूं। मेरा क्या अपराध है? मेरी क्या गलती है?”