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उत्तराखंड बनेगा देश का रोपवे हब, 160 किमी में 51 परियोजनाओं की तैयारी

उत्तराखंड बनेगा देश का रोपवे हब, 160 किमी में 51 परियोजनाओं की तैयारी
  • पहले चरण में छह रोपवे को प्राथमिकता, केदारनाथ-हेमकुंड समेत प्रमुख धार्मिक व पर्यटन स्थलों को मिलेगी कनेक्टिविटी

पायनियर समाचार सेवा। देहरादून। उत्तराखंड को देश का रोपवे हब बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने तैयारियां तेज कर दी हैं। मुख्यमंत्री के निर्देश पर पर्यटन विभाग ने प्रदेश में प्रस्तावित रोपवे परियोजनाओं को धरातल पर उतारने की प्रक्रिया तेज कर दी है। राज्य और केंद्र सरकार की साझेदारी से करीब 160 किलोमीटर लंबे 51 रोपवे विकसित किए जाने की योजना है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य पर्वतीय क्षेत्रों में यातायात को सुगम बनाने के साथ धार्मिक और पर्यटन स्थलों तक सुरक्षित एवं सुविधाजनक पहुंच उपलब्ध कराना है। सरकार के अनुसार रोपवे नेटवर्क के विस्तार से पर्वतीय सड़कों पर वाहनों का दबाव कम होगा और पर्यावरणीय प्रभाव भी घटेगा। साथ ही पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है।

पहले चरण में छह परियोजनाओं पर जोर

सरकार ने पहले चरण में छह रोपवे परियोजनाओं को प्राथमिकता दी है। इनमें रुद्रप्रयाग की सोनप्रयाग-केदारनाथ और कनकचौरी-कार्तिक स्वामी, चमोली की गोविंदघाट-हेमकुंड साहिब और जोशीमठ-औली-गोरसों, नैनीताल की रानीबाग-हनुमानगढ़ी-कैंची धाम तथा उत्तरकाशी की रैथल-दयारा बुग्याल परियोजनाएं शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने संबंधित कार्यदायी संस्थाओं को चयनित परियोजनाओं पर आगामी 9 नवंबर तक काम शुरू करने के निर्देश दिए हैं। परियोजनाओं की प्रगति की शासन स्तर पर लगातार समीक्षा की जा रही है।

देहरादून-मसूरी रोपवे का काम जारी

देहरादून के पुरुकुल गांव से मसूरी के लाइब्रेरी क्षेत्र तक करीब 5.2 किलोमीटर लंबे रोपवे का निर्माण कार्य चल रहा है। परियोजना पूरी होने के बाद देहरादून से मसूरी की यात्रा का समय करीब एक से डेढ़ घंटे से घटकर 15 से 20 मिनट रहने की उम्मीद है। इससे पर्यटन सीजन के दौरान मसूरी में सड़क यातायात और जाम की समस्या कम करने में मदद मिल सकती है। पर्यटन विभाग के अनुसार परियोजना को 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य है।

यमुनोत्री और पूर्णागिरि तक भी रोपवे

जानकी चट्टी यानी खरसाली से यमुनोत्री धाम तक रोपवे की योजना पर भी काम चल रहा है। इससे श्रद्धालुओं को करीब पांच किलोमीटर की कठिन पैदल यात्रा से राहत मिल सकेगी।
वहीं, चंपावत के पूर्णागिरि धाम के लिए ठुलीगाड़ से रोपवे प्रस्तावित है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक इस वर्ष 1 अप्रैल से 19 सितंबर के बीच 24 लाख 62 हजार 319 श्रद्धालु पूर्णागिरि धाम पहुंचे।

नीलकंठ महादेव के लिए 6 किमी का रोपवे

ऋषिकेश के त्रिवेणी घाट से पौड़ी जिले के नीलकंठ महादेव मंदिर तक करीब छह किलोमीटर लंबे रोपवे की योजना पर प्राथमिकता से काम किया जा रहा है। पहले चरण में त्रिवेणी घाट से मंदिर तक 4.1 किलोमीटर लंबा रोपवे विकसित किया जाएगा। इससे ऋषिकेश और नीलकंठ क्षेत्र में सड़क यातायात का दबाव कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

हरिद्वार में दो नए समानांतर अलाइनमेंट

हरिद्वार के इंटीग्रेटेड रोपवे प्रोजेक्ट पर भी सरकार का फोकस है। चंडी देवी और मनसा देवी रोपवे परियोजना के तहत मौजूदा अलाइनमेंट के अलावा दो नए समानांतर अलाइनमेंट विकसित किए जा रहे हैं।

कई शहरों में फिजिबिलिटी स्टडी

उत्तराखंड मेट्रो रेल कॉरपोरेशन को कई प्रस्तावित रोपवे मार्गों की फिजिबिलिटी स्टडी की जिम्मेदारी दी गई है। अल्मोड़ा जिले में रानीखेत-चौबटिया, कसारदेवी-अल्मोड़ा, हनुमान मंदिर-दूनागिरी मंदिर, द्वाराहाट-कुकुछीना-पांडुखोली, चौखुटिया-तरगताल-कुकुछीना और चौघानपाटा-बेस अस्पताल समेत कई मार्गों का अध्ययन किया जा रहा है। नैनीताल में तल्लीताल बाजार से गंगनाथ मंदिर के नीचे तक रोपवे प्रस्तावित है। वहीं मसूरी-देहरादून क्षेत्र में कैमल बैक रोड से लाल टिब्बा, जॉर्ज एवरेस्ट और कैंपटी फॉल तक रोपवे कनेक्टिविटी की संभावनाएं भी देखी जा रही हैं। टपकेश्वर महादेव-रॉबर्स केव, गुच्चूपानी-पैसिफिक मॉल, पैसिफिक मॉल-पुरुकुल, पैसिफिक गोल्फ-सहस्रधारा और रायपुर-मालदेवता मार्ग भी प्रस्तावित सूची में हैं। मालदेवता से धनोल्टी तक करीब 15 किलोमीटर लंबे रोपवे विकल्प का भी अध्ययन किया जा रहा है।

कुमाऊं में बढ़ते ट्रैफिक के बीच रोपवे पर जोर

पर्यटन सचिव धीराज गर्ब्याल के अनुसार उत्तराखंड में करीब 50 रोपवे परियोजनाएं चिन्हित की गई हैं, जिनमें केदारनाथ और हेमकुंड साहिब प्रमुख परियोजनाएं हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग लॉजिस्टिक्स प्रबंधन लिमिटेड (एनएचएमएल) और पर्यटन विभाग के बीच हुए एमओयू के तहत राज्य सरकार परियोजनाओं को चिन्हित कर एनएचएमएल को सौंपेगी। इसके बाद एनएचएमएल चरणबद्ध तरीके से डीपीआर तैयार कर परियोजनाओं को आगे बढ़ाएगा। कुमाऊं क्षेत्र में हल्द्वानी, नैनीताल और अल्मोड़ा जाने वाले मार्गों पर बढ़ते यातायात को देखते हुए नैनीताल क्षेत्र में भी रोपवे कनेक्टिविटी पर काम किया जा रहा है। कैंची धाम में बढ़ती श्रद्धालुओं की संख्या के मद्देनजर नैनीताल-ज्योलीकोट, ज्योलीकोट-हनुमानगढ़ी और दूसरे चरण में ज्योलीकोट-कैंची धाम रोपवे की योजना बनाई गई है। एनएचएमएल ने पहले चरण के रोपवे की डीपीआर तैयार कर ली है, जबकि कैंची धाम तक दूसरे चरण की डीपीआर तैयार की जा रही है।

6.03 करोड़ पर्यटक पहुंचे उत्तराखंड

उत्तराखंड में पर्यटन और तीर्थाटन के बढ़ते दबाव को देखते हुए सरकार सड़क, रेल और हवाई सेवाओं के साथ रोपवे को भी परिवहन व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाने की तैयारी कर रही है। सरकार के अनुसार 2025 में राज्य में छह करोड़ तीन लाख से अधिक पर्यटक और तीर्थयात्री पहुंचे थे। बढ़ती आवाजाही के बीच पर्वतीय क्षेत्रों में रोपवे को परिवहन का एक महत्वपूर्ण विकल्प माना जा रहा है।

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