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उत्तराखंड की चाय का उत्पादन से मिला रोजगार, 1600 हेक्टेयर भूमि पर चाय की खेती

उत्तराखंड की चाय का उत्पादन से मिला रोजगार, 1600 हेक्टेयर भूमि पर चाय की खेती

पायनियर समाचार सेवा। अल्मोड़ा। उत्तराखंड मे चाय गार्डन का इतिहास 190वर्ष पुराना है। सन 1835 मे अंग्रेज गवर्नर लॉर्ड विलियम बेंटिक ने कुमाऊ मे चाय की खेती की शुरूवात की थी सन 1850 तक कुमाऊ क्षेत्र मे 40 से ज्यादा चाय के बागान हुआ करते थे सन 1900के बाद चाय उत्पादन बंद हो गया था। आजादी के बाद सन 1994 मे उत्तर प्रदेश सरकार ने पहाड़ी जनपदों में चाय उत्पादन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कुमाऊ -गढ़वाल मंडल विकास निगम चाय बागान विकसित करने के लिए जिम्मेदारी दी गईं और उत्तराखंड राज्य गठन के बाद सन 2004 मे सरकार ने उत्तराखंड चाय विकास बोर्ड का गठन किया जिसके फलस्वरूप दो दशकों मे बोर्ड ने उत्तराखंड के चाय की खेती मे कीर्तिमान स्थापित किया जा रहा है।


टीबोर्ड के उप निदेशक का कहना है कि,सरकार ने प्रदेश मे 1600 हेक्टेयर पर चाय बागान विकसित किये जा चुके है और 5 चाय फैक्ट्रीयां स्थापित की गईं है वर्ष भर मे 9 लाख किलो चाय की हरी पत्तीयों का चुगान किया जा रहा है जिसमें से 2 लाख किलो आर्गनिक चाय का उत्पादन किया जा रहा है करीब 4करोड़ की चाय से आय अर्जित की जा रही है उन्होंने बताया कि,चाय उत्पादन मे बोर्ड द्वारा 4200लोगो रोजगार से जोड़ा गया खास तौर पर महिलाये जुड़ी हुई है जो कि पलायन रोकने पर मील का पत्थर साबित हो रहा है साथ है टी बोर्ड ने 3800 कास्तकारों की भूमि लीज ली गईं है इसके अलावा टी टूरीज्म को बढ़ावा दिया जा रहा है प्रतिवर्ष चाय गार्डनो मे पर्यटक आ रहे है.वही अब उत्तराखंड की चाय दुनिया मे अपनी महक की छाप छोड़ रही है।

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