तीन युवकों को निगल गई सई नदी, 18 घंटे बाद मिले शव

पायनियर समाचार सेवा
लखनऊ। जबरेला पुल के पास सई नदी में गणेश प्रतिमा विसर्जन के दौरान मंगलवार शाम डूबे तीन युवकों के शव बुधवार को करीब 18 घंटे चले सर्च ऑपरेशन के बाद बरामद हुए। एसडीआरएफ, जल पुलिस के गोताखोरों और पुलिस की टीमों ने रातभर नदी में तलाश की। पुलिस ने तीनों शवों का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। सिसेंडी गांव से सैकड़ों श्रद्धालु गणेश प्रतिमा विसर्जन के लिए नदी पहुंचे थे। इसी दौरान धीरज (25) नहाने के लिए नदी में कूदा और गहरे पानी में डूबने लगा। उसे बचाने के प्रयास में हरिप्रसाद (40) और प्रमोद (23) भी नदी में कूद पड़े। तीनों गहरे पानी में समा गए।


सूचना पर एसीपी आरके सिंह, प्रभारी निरीक्षक रामबाबू सिंह और एसएसआई यशवंत सिंह पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। एसडीआरएफ और गोताखोरों ने रातभर तलाश की। बुधवार सुबह करीब 6:30 बजे धीरज का शव डूबने वाले स्थान से 300 मीटर दूर मिला। करीब 7:30 बजे हरिप्रसाद का शव बरामद हुआ। वहीं करीब 11:45 बजे प्रमोद का शव डूबने वाले स्थान से करीब ढाई किलोमीटर दूर मिला।
शव घर पहुंचे तो मचा कोहराम पोस्टमार्टम के बाद बुधवार दोपहर धीरज और हरिप्रसाद के शव गांव पहुंचे तो परिजनों में चीख-पुकार मच गई। शाम को प्रमोद का शव भी घर पहुंचा। तीनों परिवारों में मातम छा गया। बाद में परिजनों ने अंतिम संस्कार किया धीरज की पत्नी अनीता दो माह की गर्भवती है। वहीं हरिप्रसाद की पत्नी श्यामावती आठ माह की गर्भवती हैं। हादसे से दोनों परिवारों में आने वाली खुशियां मातम में बदल गईं। प्रमोद के परिवार में मां रानी देवी, तीन भाई और एक बहन हैं।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
ग्रामीणों ने गणेश विसर्जन के दौरान सुरक्षा इंतजामों पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि नदी का जलस्तर बढ़ा होने के बावजूद मौके पर पहले से पर्याप्त नाव, गोताखोर और जल पुलिस की व्यवस्था नहीं थी। परिजनों ने मामले की जांच कर जिम्मेदारी तय करने की मांग की है।



