टीकाकरण से छूटे बच्चों की पहचान कर शत-प्रतिशत टीकाकरण सुनिश्चित करें चिकित्साधिकारी : डीएम

पायनियर संवाददाता। बलरामपुर
जनपद में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाने तथा नियमित टीकाकरण का शत-प्रतिशत लक्ष्य प्राप्त करने के उद्देश्य से जिलाधिकारी डॉ. विपिन कुमार जैन की अध्यक्षता में होटल आदित्य इन में चिकित्साधिकारियों की एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई।
कार्यशाला में नियमित टीकाकरण की माइक्रोप्लानिंग, टीकाकरण सेवाओं के सुदृढ़ीकरण तथा ग्राम स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण दिवस (वीएचएसएनडी) सत्रों के प्रभावी संचालन पर विस्तृत चर्चा की गई।
कार्यशाला में जिलाधिकारी ने कहा कि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य जिला प्रशासन की प्राथमिकताओं में शामिल है। प्रत्येक पात्र बच्चे एवं गर्भवती महिला तक नियमित टीकाकरण सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित की जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि कोई भी पात्र लाभार्थी टीकाकरण से वंचित न रहे, इसके लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा प्रभावी रणनीति बनाकर कार्य किया जाए।
जिलाधिकारी ने नियमित टीकाकरण कार्यक्रम की माइक्रोप्लानिंग पर विशेष जोर देते हुए निर्देश दिए कि प्रत्येक ग्राम पंचायत एवं स्वास्थ्य उपकेंद्र स्तर पर पात्र बच्चों एवं गर्भवती महिलाओं की अद्यतन ड्यू लिस्ट तैयार की जाए। माइक्रोप्लान के अनुसार टीकाकरण सत्रों का आयोजन सुनिश्चित किया जाए तथा टीकाकरण से छूटे हुए एवं आंशिक रूप से टीकाकृत बच्चों की पहचान कर उनका प्राथमिकता के आधार पर टीकाकरण कराया जाए।
उन्होंने कहा कि वीएचएसएनडी सत्र ग्रामीण क्षेत्रों में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। इन सत्रों को और अधिक प्रभावी एवं परिणामोन्मुखी बनाया जाए। सभी सत्रों पर ड्यू लिस्ट के अनुसार पात्र बच्चों का टीकाकरण, गर्भवती महिलाओं की प्रसवपूर्व जांच, पोषण परामर्श एवं अन्य निर्धारित स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जाएं।
जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि एएनएम, आशा एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ता आपसी समन्वय से कार्य करते हुए प्रत्येक पात्र लाभार्थी तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करें। आशा कार्यकर्ताओं द्वारा टीकाकरण से पूर्व लाभार्थियों को सूचित किया जाए, जिससे निर्धारित तिथि पर अधिक से अधिक बच्चे एवं गर्भवती महिलाएं टीकाकरण सत्रों में पहुंच सकें।
उन्होंने विशेष रूप से दूरस्थ एवं स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच से नियमित टीकाकरण को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। साथ ही चिकित्साधिकारियों को टीकाकरण सत्रों की नियमित मॉनिटरिंग, ड्यू लिस्ट के अद्यतनीकरण तथा टीकाकरण की प्रगति की निरंतर समीक्षा करने को कहा।
कार्यशाला में नियमित टीकाकरण की माइक्रोप्लानिंग एवं सुदृढ़ीकरण के विभिन्न तकनीकी पहलुओं पर विस्तृत चर्चा की गई। टीकाकरण सत्रों के प्रभावी आयोजन, लाभार्थियों की पहचान, स्वास्थ्य कर्मियों के बीच बेहतर समन्वय तथा टीकाकरण कवरेज बढ़ाने की रणनीतियों पर विशेष ध्यान दिया गया।
जिलाधिकारी ने कहा कि नियमित टीकाकरण बच्चों को विभिन्न गंभीर बीमारियों से सुरक्षित रखने का प्रभावी माध्यम है। इसके लिए जनजागरूकता भी अत्यंत आवश्यक है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा ग्राम स्तर पर अभिभावकों को नियमित टीकाकरण के महत्व एवं निर्धारित टीकाकरण कार्यक्रम की जानकारी दी जाए, जिससे समुदाय की सहभागिता बढ़े और शत-प्रतिशत टीकाकरण का लक्ष्य प्राप्त किया जा सके।
उन्होंने सभी चिकित्साधिकारियों को निर्देशित किया कि कार्यशाला में प्राप्त जानकारी एवं तैयार माइक्रोप्लान को जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू किया जाए। प्रत्येक टीकाकरण सत्र की नियमित समीक्षा की जाए तथा जहां टीकाकरण की प्रगति अपेक्षाकृत कम है, वहां विशेष प्रयास किए जाएं।
कार्यशाला के दौरान मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ मुकेश रस्तोगी व स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी, चिकित्साधिकारी एवं संबंधित स्वास्थ्य कर्मी उपस्थित रहे।



